कंधार हाईजैकर की कराची में गोली मारकर हत्या, दो अज्ञात बाइक सवारों ने मौत के घाट उतारा
कराची, 08 मार्च। तकरीबन दो दशक पहले भारतीय विमान IC-814 को हाइजैक करने वाले आतंकी को मौत के घाट उतार दिया गया है। लंबे समय तक इंसाफ की राह देख रहे रूपिन कात्याल के परिवार को आखिरकार इंसाफ मिल गया। भारतीय विमान को मिस्त्री जहूर इब्राहिम उर्फ जमाली की कराची में कुछ अज्ञात लोगों ने गोली मारकर हत्या कर दी। रिपोर्ट के अनुसार 1 मार्च को अज्ञात व्यक्तियों ने बाइक पर सवार होकर जहूर को गोली मार दी, जिसके बाद उसकी मौत हो गई।

यह पूरी घटना एक सीसीटीवी कैमरे में कैद हुई है लेकिन बाइकसवार हमलावरों का मुंह ढका हुआ था, जिसकी वजह से उनकी अभी तक कोई पहचान नहीं हो सकी है। इब्राहिम की मौत के बाद जैश के मोहम्मद के पांच में से सिर्फ दो आतंकी ही जिंदा बचे हैं जिन्होंने इस हाइजैक को अंजाम दिया था। इस हाइजैक में शामिल अब सिर्फ दो आतंकी इब्राहिम अजहर और शाहिद अख्तर ही जिंदा बचे हैं और ये दोनों ही पाकिस्तान में हैं। ये दोनों वैश्विक आतंकी संगठन के सरगना हैं।
तकरीबन 25 साल पहले रूपिन कात्याल की जहूर ने 25 दिसंबर 1999 को बर्बरता से हत्या कर दी थी। हत्या के बाद उनके शव को यूएई में जहाज से बाहर फेंक दिया गया था। रूबिन अपनी पत्नी के साथ हनीमून मनाकर काठमांडू से वापस दिल्ली लौट रहे थे, लेकिन इस दौरान हवाई जहाज हाइजैक हो गया और रूबिन की हत्या कर दी गई थी। काउंटर टेररिज्म एक्सपर्ट का कहना है कि सिर्फ इब्राहिम अजहर और शाहिद अख्तर सैयद ही जिंदा हैं और ये दोनों पाकिस्तान में हैं।
रिपोर्ट के अनुसार हाइजैक में शामिल एक अन्य आतंकी की पहले ही प्राकृतिक मौत हो गई थी, जबकि दूसरे को भारतीय सुरक्षाकर्मी ने 13 दिसंबर 2001 में मौत के घाट उतार दिया था जब उसने संसद पर हमला किया था। माना जाता है कि जहूर के अंतिम संस्कार में जैश के वरिष्ठ नेता भी शामिल हुए थे। बता दें कि 31 दिसंबर 1999 को कश्मीरी आतंकी मुश्ताक अहमद जरगर, मसूज अजहर, ओमर सईद शेख को रिहा किया गया था। इसके बाद अजगह ने तालिबानी चीफ मुल्ला उमर से मुलाकात की और वह पाकिस्तान पहुंच गया।












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