Lebanon Explosion: पेजर क्या होते हैं और मोसाद ने कैसे फिट किया PETN बम? हिज्बुल्लाह पर हुए हमले की पूरी कहानी

Lebanon Pager explosion Hindi: ईरान के शह पर कूदने वाले हिज्बुल्लाह शायद भूल गया था, कि वो जिससे पंगे ले रहा है, दुश्मनों को माफ करने की उसकी फितरत नहीं है। हिज्बुल्लाह, पिछले साल अक्टूबर से ही इजराइल को परेशान कर रहा है और इस बार इजराइल ने घर में घुसकर पलटवार किया है।

इजराइल लंबे वक्त से चेतावनी दे रहा था, कि अगर हिज्बुल्लाह उसपर हमले करना जारी रखता है, तो फिर लेबनान का भी गाजा जैसा हाल कर दिया जाएगा, लेकिन हिज्बुल्लाह, इजराइल को फ्लावर समझ रहा था, लेकिन जब मोसाद ने फायर लगाई, तो पूरे लेबनान के साथ साथ पूरी दुनिया हैरान रह गई, कि आखिर ऐसा हमला किया कैसे गया है?

Israel-Hezbollah News

आइये हम आपको शुरू से लेकर अंत तक पूरी कहानी बताते हैं, कि आखिर लेबनान में हजारों हिज्बुल्लाह लड़ाकों के हाथों में एक साथ विस्फोट कैसे हुए?

लेबनान के स्वास्य मंत्रालय ने कहा है, कि अभी तक 2750 घायल मिले हैं, जिनमें 9 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और 500 घायलों की हालत काफी गंभीर है, जिनका इलाज चल रहा है।

पेजर क्या है, इसका इस्तेमाल क्यों किया गया?

पेजर छोटे कम्युनिकेशन डिवाइस हैं, जिनका प्रयोग मोबाइल फोन के व्यापक रूप से प्रचलित होने से पहले आमतौर पर किया जाता था। डिवाइस यूजर्स के लिए एक छोटा टेक्स्ट संदेश दिखाते हैं, जिसे एक केंद्रीय ऑपरेटर के माध्यम से टेलीफोन द्वारा रिले किया जाता है।

मोबाइल फोन के विपरीत, पेजर रेडियो तरंगों पर काम करते हैं, ऑपरेटर रेडियो आवृत्ति के जरिए संदेश भेजता है और इंटरनेट के बजाय प्राप्तकर्ता के डिवाइस पर ये मैसेज दिखता है। ऐसा माना जाता है कि पेजर में इस्तेमाल की जाने वाली बुनियादी तकनीक और साथ ही भौतिक हार्डवेयर पर उनकी निर्भरता का मतलब है, कि उन्हें मॉनिटर करना कठिन है, जिससे वे हिजबुल्लाह जैसे समूहों के बीच काफी लोकप्रिय हो गए हैं, जहां गतिशीलता और सुरक्षा दोनों ही सर्वोपरि हैं।

इंटरनेट नहीं होने की वजह से इसे ट्रैक नहीं किया जा सकता है, इसलिए हिज्बुल्लाह ने अपने आतंकियों को पेजर के इस्तेमाल सलाह दी थी।

पेजर में बम लगाकर कैसे किया विस्फोट?

विस्फोटों का ये सिलसिला शाम करीब 4:45 बजे शुरू हुई और करीब एक घंटे तक चली। हताहतों की कुल संख्या की पुष्टि अभी भी की जा रही है। लेकिन 2700 से ज्यादा लोगों के घायल होने की पुष्टि हो चुकी है और 9 मृतकों में एक 8 साल की बच्ची भी भी।

हिज्बुल्लाह के सांसद अली अम्मार के बेटे मोहम्मद महदी अम्मार के भी मारे जाने की खबर है।

हिजबुल्लाह ने पुष्टि की है कि उसके दो लड़ाके मारे गए हैं।

लेबनान के स्वास्थ्य मंत्री फिरास अबियाद ने अल जजीरा को बताया है, कि "लगभग 2,750 लोग घायल हुए हैं, ... उनमें से 200 से ज्यादा काफी गंभीर रूप से घायल हैं। घायलों में ऐसे ज्यादा हैं, जिनके चेहरे, हाथ और पेट पर काफी गहरे जख्म हैं।

लेबनान में ईरान के राजदूत मोजतबा अमानी भी विस्फोटों में घायल हो गए।

हमला किसने करवाया है?

हिजबुल्लाह समेत कई लोग इजराइल की ओर इशारा कर रहे हैं। न्यूयार्क टाइम्स ने खुफिया एजेंसी मोसाद का नाम लिया है।

8 अक्टूबर से लेबनान-इजराइल सीमा पर इजराइल और हिज्बुल्लाह के बीच कम स्तर की गोलीबारी चल रही है। यह घटना हमास के नेतृत्व में इजराइल पर किए गए हमलों के एक दिन बाद हुई, जिसमें 1,139 लोग मारे गए, करीब 240 लोग बंदी बनाए गए और गाजा पर इजराइल का युद्ध शुरू हो गया।

हाल ही में, इजराइल के राजनेताओं और मीडिया ने लेबनान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की बात कही थी, ताकि हिज्बुल्लाह को सीमा से वापस खदेड़ा जा सके और हमले शुरू होने के तुरंत बाद निकाले गए करीब 60,000 इजराइलियों को उनके घरों में वापस लाया जा सके।

हिज्बुल्लाह ने एक बयान में कहा है, कि "हम इजराइल को इस आपराधिक आक्रमण के लिए पूरी तरह जिम्मेदार मानते हैं।" साथ ही उन्होंने कहा, कि इजरायल को "इस पापपूर्ण आक्रमण के लिए निश्चित रूप से उचित सजा मिलेगी।"

लेबनान के सूचना मंत्री ज़ियाद मकरी ने भी इसी तरह की निंदा की है, लेकिन इजराइल की तरफ से अभी तक कोई बयान नहीं दिया गया है।

गाजा में इसी तरह के विस्फोट क्यों नहीं हुए?

लंदन के किंग्स कॉलेज में रक्षा विभाग के हमजा अत्तर ने अलजजीरा की एक रिपोर्ट में कहा है, कि "वे गाजा में उसी पद्धति का उपयोग नहीं कर सकते, क्योंकि हिज्बुल्लाह की तुलना में हमास बहुत ज्यादा साइबर-जागरूक है।

उन्होंने कहा, कि "जब दूरसंचार की बात आती है, तो हमास बहुत सक्षम हैं।" उन्होंने हमास के बारे में कहा, कि "वे फोन या सेलफोन का उपयोग नहीं करते हैं। उनके पास अपना नेटवर्क और इंटरनेट कम्युनिकेशन है और उन्हें जमीन के ऊपर किसी भी चीज की आवश्यकता नहीं है।"

पेजर्स में कैसे लगाए गये बम?

लिथियम-आयन बैटरियों को आग लगने और क्षतिग्रस्त होने पर विस्फोट होने के लिए जाना जाता है। इन बैटरियों को सही तरह से देखभाल नहीं करने और फेंक देने की वजह से कई बार कचरों के ढेर में भी धमाका होते देखा गया है। ऐसा देखा गया है, कि इन बैटरियों की वजह से अकसर भीषण आग तक लग जाती है।

हालांकि, लेबनान में में हुए विस्फोटों के मामले में, इस बात पर संदेह उत्पन्न हो गया है, कि क्या सिर्फ खराब बैटरी के कारण ही इतनी बड़ी तबाही हुई है?

हमले के तरीके के बारे में अभी भी पुख्ता तौर पर कुछ भी दावा नहीं किया जा सकता है। लेकिन, प्रारंभिक सोशल मीडिया रिपोर्टों ने सुझाव दिया है, कि पेजर विस्फोट डिजिटल हैकिंग की घटना के कारण हो सकता है, जिसके कारण बैटरियां ज़्यादा गरम हो गई थीं।

लेबनानी ब्रॉडकास्ट कॉर्पोरेशन ने बताया है, कि प्रारंभिक जांच से संकेत मिलता है कि संभावित साइबर हमले ने पेजर सर्वर को प्रभावित किया था, जिसके कारण एक स्क्रिप्ट की स्थापना हुई, जिससे ओवरलोड हुआ, जिसके परिणामस्वरूप बैटरियाँ ज़्यादा गरम हो गईं और बाद में विस्फोट हो गया। ऑनलाइन साझा किए गए फुटेज में विस्फोट इतने शक्तिशाली दिखाई दिए, कि उन्हें सिर्फ पेजर बैटरियों के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।

एक व्यापक रूप से प्रसारित तस्वीर में क्षतिग्रस्त पेजर को दिखाया गया था, जिसमें कुछ पहचान योग्य मेक और मॉडल की जानकारी थी, जिससे पता चलता है, कि यह गोल्ड अपोलो AP-900 अल्फ़ान्यूमेरिक पेजर हो सकता है। अन्य स्रोतों ने संकेत दिया कि मॉडल गोल्ड अपोलो AR-924 हो सकता है, जो लिथियम-आयन बैटरी पर काम करता है।

जबकि AP-900 में दो AAA बैटरियां इस्तेमाल की जाती हैं, जो सैद्धांतिक रूप से विस्फोट कर सकती हैं, लेकिन यह संभावना नहीं है, कि वे विस्फोटों में देखे गए फोर्स के स्तर को उत्पन्न करेंगी। इसके विपरीत, यदि AR-924 या इसी तरह का कोई मॉडल शामिल होता, तो लिथियम-आयन बैटरियां अधिक जोखिम पैदा कर सकती थीं, फिर भी विशेषज्ञों का तर्क है, कि ये भी आमतौर पर कई लोगों को घायल करने में सक्षम विस्फोटों का कारण नहीं बनतीं।

पेंटाएरीथ्रिटोल टेट्रानाइट्रेट (PETN) विस्फोटक क्या इस्तेमाल

एक और थ्योरी ये है, कि इस विस्फोट में पेंटाएरीथ्रिटोल टेट्रानाइट्रेट (PETN) का इस्तेमाल किया गया है। कहा गया है, कि इस हमले में इस्तेमाल किया गया विस्फोटक पेंटाएरीथ्रिटोल टेट्रानाइट्रेट (PETN) था, जो एक बहुत शक्तिशाली रसायन है। PETN पेंटाएरीथ्रिटोल का नाइट्रेट एस्टर है, और प्लास्टिसाइज़र के साथ मिलकर प्लास्टिक विस्फोटक बनाता है। यह अभी तक ज्ञात सबसे शक्तिशाली विस्फोटकों में से एक है और सेमटेक्स में एक कंपोनेंट है।

PETN न केवल अपनी विस्फोटक क्षमताओं के लिए जाना जाता है, बल्कि इससे मेडिकल रिसर्च भी किए जाते हैं। FDA ने इसे एनजाइना जैसी हृदय रोग के उपचार के लिए कोरोनरी वैसोडिलेटर के रूप में अनुमोदित किया है। इसके वासोडिलेशन प्रभाव ग्लिसेरिल ट्रिनिट्रेट के समान हैं, लेकिन लंबे समय तक चलते हैं। हालांकि, यहां इसका प्राथमिक उपयोग औषधीय एजेंट के बजाय विस्फोटक के रूप में करना था।

पेजर में कहां डाला गया विस्फोटक?

पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी के अधिकारियों समेत विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है, कि विस्फोटों का पैमाना इस बात की ओर इशारा करता है कि अज्ञात हमलावरों ने जानबूझकर पेजर में विस्फोटक डाले थे। एक सुरक्षा विशेषज्ञ ने टिप्पणी की, कि क्षति की भयावहता लिथियम-आयन बैटरी की बजाय अतिरिक्त विस्फोटक सामग्री की मौजूदगी की तरफ इशारा करता है।

ऐसे हमलों के लिए ऐतिहासिक मिसालें मौजूद हैं, जिसमें 1996 की घटना भी शामिल है, जिसमें हमास के लिए बम बनाने वाले एक्सपर्ट को निशाना बनाने के लिए मोबाइल फोन के भीतर विस्फोटक छिपाए गए थे। यह आपूर्ति श्रृंखला हमले की संभावना को उजागर करता है, जिसमें विस्फोटकों को उनके उपयोगकर्ताओं तक पहुंचने से पहले गुप्त रूप से उपकरणों में बम लगा दिया जाता है।

ताइवान कनेक्शन क्या है?

लेबनान के वरिष्ठ सुरक्षा सूत्रों की रिपोर्ट के मुताबिक, विस्फोटों का कारण 5,000 ताइवान निर्मित पेजर के अंदर छिपे विस्फोटकों की छोटी मात्रा थी, जिसे घटना से पांच महीने पहले हिज्बुल्लाह ने मंगवाया था। ईरान समर्थित आतंकवादी समूह कम्युनिकेशन के लिए पेजर का इस्तेमाल करते हैं, यानि पेजर में कम से कम 5 महीने पहले विस्फोटक लगाया गया होगा।

यह दावा किया गया है, कि मोसाद के एजेंट्स ने विस्फोटकों को पेजर के भीतर डाला था, और एक कोड मैसेज ने दूर से विस्फोटों को ट्रिगर किया। ताइवान के निर्माता गोल्ड अपोलो से मंगवाए गए इन पेजर को अप्रैल और मई के बीच लेबनान में तस्करी करके लाया गया था। इनमें से एक उपकरण, जिसकी पहचान AP924 मॉडल के रूप में की गई है, उसे एक सुरक्षा स्रोत ने विस्फोट करने वाले उपकरण के रूप में पहचाना। क्षतिग्रस्त पेजर की तस्वीरों से गोल्ड अपोलो के समान डिजाइन और स्टिकर का पता चलता है।

इन पेजर्स का उपयोग, पुरानी तकनीक होने के बावजूद, हिज्बुल्लाह के संचार के लिए जरूरी है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां आधुनिक डिवाइस को बहुत आसानी से हैक किया जा सकता है। लेकिन, पेजर के जरिए हमला करके मोसाद ने हिज्बुल्लाह को हिला दिया है। इसके अलावा, अब हिज्बुल्लाह के लिए दूसरी जगहों से सामान मंगवाना भी मुश्किल हो गया है, क्योंकि उसे कुछ पता नहीं होगा, कि कौन सी सप्लाई चेन हैक है या नहीं है।

पेजर बनाने वाली कंपनी ने क्या कहा?

इस बीच, गोल्ड अपोलो के संस्थापक ह्सू चिंग-कुआंग ने एक बयान में कहा है, कि कंपनी ने लेबनान में विस्फोटों में इस्तेमाल किए गए पेजर्स नहीं बनाए हैं।

भले ही विस्फोट साइबर-भौतिक हमले से ट्रिगर न हुए हों, लेकिन यह संभव है कि पेजर्स के भीतर छिपे विस्फोटकों को दूर से सक्रिय किया गया हो। कुछ फुटेज से पता चलता है, कि यूजर्स विस्फोट होने के समय अपने उपकरणों की जांच कर रहे थे, जिससे यह सवाल उठता है कि क्या कोई संदेश ट्रिगरिंग मैकेनिज्म भी काम कर रहा था।

कुल मिलाकर, इन हमलों के परिणाम धीरे धीरे सामने आएंगे। लेकिन हिज्बुल्लाह पर मनोवैज्ञानिक प्रभाव डाला जा चुका है, क्योंकि अब उसे अहसास है कि विस्फोटक उपकरण रोजमर्रा की तकनीक में छिपे हो सकते हैं। यह घटना इस बात की याद दिलाती है कि खुफिया अभियान किस हद तक जा सकते हैं, खासकर जब इलेक्ट्रॉनिक उपकरण शामिल हों।

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