'हीटवेव से जा सकती है हजारों की जान', मौसम वैज्ञानिकों ने भारत-पाकिस्तान के लिए जारी की चेतावनी
वैज्ञानिकों ने कहा कि हीटवेव के कारण हजारों लोगों की जान जा सकती है। इसके साथ ही उन्होंने ये भी चेतावनी दी है कि अगर जलवायु परिवर्तन को नहीं रोका गया तो इससे भी बदतर हालात पैदा हो सकते हैं।
पेरिस, 07 मईः बीते तो महीने से भारत और पाकिस्तान में अभूतपूर्व गर्मी कहर बरपा रही है। आने वाले समय में इसमें और वृद्धि होने की आशंका है। वैज्ञानिकों ने कहा कि हीटवेव के कारण हजारों लोगों की जान जा सकती है। इसके साथ ही उन्होंने ये भी चेतावनी दी है कि अगर जलवायु परिवर्तन को नहीं रोका गया तो इससे भी बदतर हालात पैदा हो सकते हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक तापमान में कमी होने के कोई आसार नजर नहीं आ रहे हैं ऐसे में इन दक्षिण एशियाई देशों में स्थिति बद से बदतर हो सकती है।

सबसे गर्म दिन अभी आना बाकी
मार्च और अप्रैल में भारत और पाकिस्तान के 100 करोड़ से ज्यादा लोग इस समय 40 डिग्री सेल्सियस के झुलसाने वाले तापमान में रह रहे हैं। जबकि अभी सबसे गर्म दिन आने बाकी हैं। जलवायु विज्ञान अनुसंधान करने वाली एक गैर लाभकारी संस्था बर्कले अर्थ के प्रमुख वैज्ञानिक रॉबर्ट रोडे ने ट्वीट कर चेतावनी दी है कि ये हीटवेव जानलेवा साबित हो सकती है और इससे हजारों लोगों की जान जा सकती है। इसमें सबसे ज्यादा बुजुर्ग प्रभावित होंगे।

अत्यधिक गर्मी से हजारों लोग मरे
एक शोध में वैज्ञानिकों ने कहा कि अगर ग्लोबल वार्मिंग न भी हो तो भी दक्षिण एशिया गर्म ही रहता है। ठीक वैसे ही जैसे कैलिफोर्निया, भूकंप के लिए अभ्यस्त हो चुका है। जलवायु वैज्ञानिकों का कहना है कि पिछले दो महीनों में इन दक्षिण एशियाई क्षेत्रों में विनाशकारी गर्मी के कारण हजारों लोगों की जान जा सकती है। वैज्ञानिकों ने ये भी चेतावनी दी है कि अगर जलवायु परिवर्तन को नहीं रोका गया तो भविष्य में इससे भी बदतर हालात पैदा हो सकते हैं।

हवा की गुणवत्ता भी हुई खराब
भारत के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के मुताबिक भारत में 1980 के बाद से गर्म हवाओं के कारण मृत्यु दर में अब तक 60 प्रतिशत से अधिक की बढोतरी हुई है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन के प्रमुख पेटेरी तालस ने कहा कि गर्मी का सबसे खराब असर कृषि, ऊर्जा उत्पादन और पानी पर पड़ रहा है। इसके साथ ही हवा की गुणवत्ता भी खराब हुई है और बड़े पैमाने पर आग लगने का खतरा भी बढ़ा है। गर्मी अधिक होने की वजह से बिजली की डिमांड भी तेजी से बढ़ी है। इस कारण भारी मात्रा में बिजली कटौती देखने को मिली है।

वैज्ञानिक देते रहे हैं चेतावनी
हवाई विश्वविद्यालय में प्रोफेसर कैमिलो मोरा ने कहा, 'मुझे सबसे ज्यादा अजीब बात यह लगती है कि अधिकांश लोगों को यह अत्यधिक गर्मी हैरान कर रही है, जबकि हमारे लिए यह कोई नई बात नहीं है। मौसम वैज्ञानिक लगातार ऐसी आपदाओं के बारे में चेतावनी देते रहे हैं। यह दक्षिण एशियाई इलाका और अधिकांश उष्ण कटिबंधीय क्षेत्र हीटवेव के लिए सबसे अधिक संवेदनशील हैं।'

भीषण गर्मी की चपेट में होंगें अरबों लोग
प्रोफेसर कैमिली मोरा ने एक रिपोर्ट के आधार पर दावा किया कि पेरिस समझौते के तहत ग्लोबल वार्मिंग को दो डिग्री सेल्सियस नीचे रखे जाने के बावजूद 2100 तक हर साल दुनिया की आधी आबादी 20 दिन या उससे भी अधिक समय तक घातक गर्मी की चपेट में आएगी। इंपीरियल कॉलेज के शोधकर्ता मैरियन जकारिया ने कहा कि मानवीय गतिविधियों से पहले भारत में 50 सालों में एक बार गर्मी पड़ती थी लेकिन अब यह हर 4 वर्षों में दोहराई जा रही है।












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