Harvard Vs Trump: ट्रंप के फैसले से बेल्जियम की प्रिंसेस की छूटेगी पढ़ाई, जाना होगा घर!
Harvard Vs Trump: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों का वैश्विक स्तर पर असर हो रहा है, जिसका असर अब शाही परिवारों पर भी पड़ रहा है। बेल्जियम की प्रिंसेस एलिजाबेथ, जो अगली रानी बन सकती हैं, अब अपनी पढ़ाई-लिखाई को लेकर चिंतित हैं। प्रिंसेस एलिजाबेथ हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में पब्लिक पॉलिसी की पढ़ाई कर रही थीं, लेकिन विदेशी छात्रों के संबंध में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा नई नीति थोपे जाने के बाद कई छात्र-छात्राओं की पढ़ाई छूट रही है। इनमें से प्रिंसेस एलिजाबेथ भी एक हो सकती हैं।
विदेशी छात्रों पर प्रभाव
ट्रम्प सरकार के इस फैसले से एलिज़ाबेथ का अगला साल खतरे में है। हार्वर्ड में मास्टर्स डिग्री का पहला साल पूरा करने के बाद, उन्हें शायद अमेरिका छोड़ना होगा या किसी दूसरे संस्थान में ट्रांसफर लेना होगा। ट्रंप सरकार ने हार्वर्ड में विदेशी छात्रों के लिए अनुमति रद्द कर दी है, और यह नियम अन्य कॉलेजों पर भी लागू हो सकता है। जिससे बेहतर शिक्षा की तलाश में अलग-अलग देशों से अमेरिका पहुंचने वाले लाखों छात्रों का भविष्य अब संकट में है।

टेंशन में शाही परिवार
बेल्जियम का शाही परिवार स्थिति पर बारीकी से नज़र रख रहा है। शाही परिवार के प्रवक्ता लोरे वंडोर्न ने ट्रंप सरकार के फैसले पर आश्चर्य जताया और कहा कि वे इस फैसले के प्रभाव का आकलन कर रहे हैं। कम्युनिकेशन डारेक्टर ज़ेवियर बार्ट ने कहा कि वे स्थिति को समझ रहे हैं, क्योंकि यह पहली बार है जब इस तरह का वाकया सामने आया। उन्होंने स्वीकार किया कि बहुत कुछ बदल सकता है।
कौन हैं प्रिंसेस एलिजाबेथ?
एलिज़ाबेथ राजा फिलिप और रानी मैथिल्डे की सबसे बड़ी बेटी और शाही सिंहासन की अगली उत्तराधिकारी हैं। हार्वर्ड में दाखिला लेने से पहले, उन्होंने ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी से इतिहास और राजनीति में ग्रेजुएशन किया है। हार्वर्ड में पब्लिक पॉलिसी कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को पब्लिक सर्विस में करियर के लिए तैयार करना है।
हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की प्रतिक्रिया
हार्वर्ड यूनिवर्सिटी एडमिनिस्ट्रेश खुद ट्रंप सरकार के ऊल-जलूल फैसलों से परेशान चल रहा है। लिहाजा यूनिवर्सिटी ने इस कदम की खुलकर आलोचना की है। एक बयान में उन्होंने इसे अवैध और सीधे तौर पर अंतरराष्ट्रीय छात्रों को निशाना बनाने वाला बताया है। इस फैसले ने दुनियाभर के शैक्षणिक संस्थानों और छात्रों के बीच व्यापक चिंता पैदा कर दी है। लेकिन सब जगह एक बात कॉमन है वो ये कि ट्रंप को सभी जगह से आलोचना का शिकार हो रहे हैं।
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