क्या बर्बाद होकर इजराइल की कमर तोड़ जाएगा हमास? समझिए PM नेतन्याहू की राजनीति कैसे हो सकती है खत्म
Israel-Hamas War: हमास के खिलाफ इजराइली युद्ध का आज 10वां दिन है और दोनों तरफ से चल रहे भीषण हवाई हमलों में अभूतपूर्व संख्या में लोगों की जान जा रही है। इज़राइली पक्ष पहले ही 1,300 लोगों की जान गंवा चुका है, जबकि फिलिस्तीनी अधिकारियों ने घोषणा की है, कि अंतिम गणना में गाजा पट्टी में मरने वालों की संख्या 2,750 थी और 9,700 लोग अभी तक घायल हुए हैं।
संयुक्त राष्ट्र राहत एवं कार्य एजेंसी के प्रमुख फिलिप लेज़ारिनी ने रविवार को सामने आ रही स्थिति के बारे में कहा, कि "गाजा का गला घोंटा जा रहा है और ऐसा लगता है, कि दुनिया ने भी अपनी मानवता खो दी है।" उन्होंने कहा, कि एक "अभूतपूर्व मानवीय आपदा" सामने आ रही है और उन्होंने चेतावनी दी, कि "गाजा में कोई भी जगह सुरक्षित नहीं है।"

लेकिन इस विनाशकारी मानवीय आपदा के अलावा, इज़राइल-हमास युद्ध के और भी बड़े असर हैं। युद्ध से न केवल विनाशकारी मानव क्षति होगी, बल्कि इज़राइल की अर्थव्यवस्था, राजनीति और सामाजिक जीवन पर भी इसका बेहद गंभीर असर पड़ने वाला है।
आइये जानते हैं, कि इजराइल को आर्थिक नुकसान से लेकर प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की राजनीति पर इसका क्या असर होने वाला है?
इजराइल की अर्थव्यवस्था पर असर
चल रहे इज़राइल-हमास युद्ध का लंबे समय में इजराइल की अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ने की आशंका है। इस बात को लेकर भी चिंताएं हैं, कि लंबी लड़ाई का देश की अर्थव्यवस्था पर जो असर पड़ेगा, उसकी लंबे वक्त कर भरपाई संभव नहीं है।
इज़राइल ने ड्यूटी के लिए 300,000 रिजर्व सैनिकों को बुलाया है। ये रिजर्व सैनिक, इजराइल के अलग अलग सेक्टर में काम करने वाले लोग हैं, जैसे शिक्षक, तकनीकी कर्मचारी, स्टार्टअप उद्यमी, किसान, वकील, डॉक्टर, नर्स, पर्यटन और कारखाने के कर्मचारी हैं।
जेरूसलम में हिब्रू विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर ईयाल विंटर, जिन्होंने इज़राइल के युद्धों के आर्थिक प्रभाव का अध्ययन किया है, उन्होंने सीएनबीसी को बताया, कि "प्रभाव काफी गहरा है।"
टाइम्स ऑफ इज़राइल की रिपोर्ट के अनुसार, इज़राइल के सबसे बड़े बैंकों में से एक, बैंक हापोलिम ने पहले ही भविष्यवाणी कर दी है, कि इज़राइल और हमास के बीच युद्ध की लागत करीब 27 अरब NIS यानि करीब 2.24 लाख करोड़ रुपये होगी।
बैंक हापोलिम के मुख्य रणनीतिकार मोदी शफ़रीर को टाइम्स ऑफ़ इज़राइल से कोट करते हुए कहा है, कि "वर्तमान समय में यह माना जा सकता है (बहुत मोटे अनुमान में) कि मौजूदा युद्ध की लागत सकल घरेलू उत्पाद का कम से कम 1.5 प्रतिशत होगी, जिसका मतलब है कि बजट घाटे में सकल घरेलू उत्पाद का कम से कम 1.5 प्रतिशत की वृद्धि होगी।"

यह अनुमान इजराइल द्वारा लड़े गए पिछले युद्धों के आधार पर निकाला गया है। उदाहरण के लिए, इंस्टीट्यूट फॉर नेशनल सिक्योरिटी स्टडीज (आईएनएसएस) के अनुसार, 2006 में दूसरे लेबनान युद्ध में इज़राइल की लागत 9.4 बिलियन एनआईएस (78,272 करोड़ रुपये) या जीडीपी का 1.3 प्रतिशत थी।
दिसंबर 2008 से जनवरी 2009 तक ऑपरेशन कास्ट लीड की लागत 3.3 बिलियन एनआईएस (27,450 करोड़ रुपये) आंकी गई थी।
बैंक रणनीतिकार ने कहा, कि मुख्य प्रभाव निजी खपत और पर्यटन के आंकड़ों पर महसूस किया जाएगा। हालांकि, रिजर्व फोर्स की बड़ी लामबंदी से अर्थव्यवस्था पर और भी ज्यादा प्रभाव पड़ेगा।
पर्यटन सेक्टर पर गंभीर असर
युद्ध के अल्पकालिक प्रभाव पहले से ही इज़राइल में देखे जा सकते हैं। पर्यटन व्यवसाय लगभग ठप हो गया है। क्रूज़ जहाज़ इज़राइल के तटों से बच रहे हैं और प्रमुख एयरलाइनों ने इज़राइल से उड़ान भरना बंद कर दिया है।
समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने खबर दी है, कि सिक्स सेंसेज शाहरूट और होटल इंडिगो तेल अवीव भी बंद हो गए हैं। अन्य होटल भी बुकिंग कैंसिल होने की रिपोर्ट कर रहे हैं। इज़राइल की शीर्ष श्रृंखलाओं में से एक, इस्रोटेल ने कहा है कि वे अस्थायी रूप से बंद होने के कगार पर हैं।
इसके अलावा, आने वाले महीनों में ईसाई तीर्थयात्राओं के कारण भारी भीड़ देखने की उम्मीद थी। लेकिन, उस पर भी असर पड़ा है। पर्यटन के अलावा, इजराइल का लगातार बढ़ता तकनीकी उद्योग भी युद्ध से प्रभावित होने की संभावना है। विंटर ने कहा, कि "स्टार्टअप उद्योग के लिए एक अस्थायी झटका होगा।"
निवेशकों और विश्लेषकों का यह भी अनुमान है, कि युद्ध इजरायली तकनीकी क्षेत्र को पटरी से उतार देगा। इजराइल की सबसे बड़ी उद्यम पूंजी फर्मों में से एक, ऑवरक्राउड के मुख्य कार्यकारी जॉन मेडवेड ने रॉयटर्स को बताया, "अगले कुछ हफ्तों और महीनों तक विदेशी निवेश धीमा हो जाएगा, खासकर इस हद तक, कि वहां अभी भी शत्रुता चल रही है।"
हालांकि, कुछ लोगों ने कहा कि इज़राइल का तकनीकी क्षेत्र उसी तरह से पलटाव करेगा जैसे उसने फिलिस्तीनी और हिजबुल्लाह आतंकवादियों के साथ पिछले संघर्षों में किया था। स्टार्टअप नेशन सेंट्रल के सीईओ और पूर्व उद्यम पूंजीपति एवी हसन ने कहा, "इजरायली तकनीक ने संघर्ष के दौरान काम करने और उससे उबरने में सक्षम होने के मामले में निवेशकों का विश्वास अर्जित किया है। इसलिए, मुझे नहीं लगता कि निवेशकों का इज़राइल पर से इतनी जल्दी विश्वास ख़त्म हो जाएगा।"
स्थानीय व्यवसायों के अलावा, विदेशी कंपनियां भी युद्ध से प्रभावित होंगी। बैंक ऑफ अमेरिका ने अपना तेल अवीव कार्यालय बंद कर दिया है, जबकि गोल्डमैन सैक्स और जेपी मॉर्गन चेज़ ने अपने कर्मचारियों को घर से काम करने के लिए कहा है।
इस बीच, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और कंप्यूटर ग्राफिक्स के लिए उपयोग की जाने वाली चिप्स बनाने वाली दुनिया की सबसे बड़ी निर्माता कंपनी एनवीडिया ने भी तेल अवीव में होने वाले आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस शिखर सम्मेलन को रद्द कर दिया है, जिसमें सीईओ जेन्सेन हुआंग भी शामिल होने वाले थे।
कपड़े की दिग्गज कंपनी ज़ारा और एचएंडएम ने भी इज़राइल में स्टोर बंद कर दिए हैं, जिसका असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
टाइम्स ऑफ इज़राइल ने यह भी बताया है, कि चूंकि सैन्य अभियान के लिए अधिक खर्च की आवश्यकता होगी, लिहाजा बैंकिंग लोन महंगा हो सकता है और टैक्स बढ़ाए जा सके हैं, इन सबका अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

इजराइल की राजनीति पर प्रभाव?
अर्थव्यवस्था के अलावा, कई लोगों का मानना है, इजराइल की खुफिया एजेंसियां हमास के हमले का पता लगाने में बुरी तरह से नाकाम रही हैं, जिसका इजरायल के प्रधान मंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। जैसे-जैसे दिन बीत रहे हैं और लोग अपने नुकसान पर शोक मना रहे हैं, इजराइल में सवाल पूछे जा रहे हैं, कि हमास ने इजरायली सेना को कैसे धोखा दिया और नेतन्याहू ने अब तक कोई जिम्मेदारी क्यों नहीं ली है?
तेल अवीव स्थित पत्रकार रूथ मार्गालिट, जो नेतन्याहू प्रशासन को कवर कर रहे हैं, उन्होंने एनपीआर को बताया, कि "नेतन्याहू ने इसमें अपनी भूमिका के बारे में कुछ नहीं कहा है। और यह काफी आश्चर्यजनक है। तर्कसंगत रूप से, आप सोच सकते हैं, कि बेंजामिन नेतन्याहू का राजनीतिक कैरियर भी खत्म हो सकता है।"
उन्होंने कहा, कि सरकार के खिलाफ, प्रधानमंत्री नेतन्याहू के खिलाफ लोगों का गुस्सा बढ़ रहा है और उनसे जिम्मेदारी लेने को कहा जा रहा है।
दरअसल, हाल ही में लोगों के बीच किए गए एक सर्वे से पता चला है, कि अगर चुनाव होते हैं, तो बेनी गैंट्ज़ को सबसे ज्यादा वोट मिल सकते हैं। उन्हें 48 प्रतिशत जनता का समर्थन प्राप्त है और नेतन्याहू 29 प्रतिशत पर आ गये हैं।

इज़राइल के चैनल 12 के मुख्य राजनीतिक टिप्पणीकार अमित सहगल भी इसी तरह की भावना व्यक्त करते हैं। उन्होंने कहा, कि "इज़राइली इतिहास ने हमें सिखाया है, कि प्रत्येक लड़ाई और संकट सरकार के पतन का कारण बना है। 1973 में (योम किप्पुर युद्ध के बाद) गोल्डा मेयर की सरकार का पतन हो गया था, जबकि 1982 में पहले लेबनान युद्ध में मेनाकेम बेगिन की सरकार चली गई थी। साल 2006 में दूसरे लेबनान युद्ध में प्रधानमंत्री एहुद ओलमर्ट के साथ भी यही हुआ था और हो सकता है, कि अब प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की घड़ी टिक-टिक कर रही है।"
इज़राइल-हमास युद्ध का भविष्य अनिश्चित है, लेकिन इसका प्रभाव बहुत बड़ा है और रहेगा। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की गीता गोपीनाथ ने एनडीटीवी से कहा, कि "यदि युद्ध एक क्षेत्रीय संघर्ष बन जाता है, और इसमें अधिक देशों की भागीदारी देखी जाती है, तो यह तेल की कीमतों को प्रभावित कर सकता है, जिससे मुद्रास्फीति में वृद्धि हो सकती है और वैश्विक जीडीपी पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।"












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