हाजी बशीर नूरज़ई: तालिबान का वो क़रीबी जिसे छोड़ने के लिए अमेरिका ने बदली अपनी नीति
तालिबान के एक सहयोगी हाजी बशीर नूरज़ई अमेरिका में कई दशकों की क़ैद के बाद आख़िरकार रिहा हो गए और सोमवार को अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल पहुँचे.
अफ़ग़ानिस्तान की सरकारी मीडिया के मुताबिक़, नूरज़ई उन आख़िरी क़ैदियों में शामिल थे जिन्हें दुनिया की सबसे बदनाम जेल में रखा गया था.
ग्वांतानामो बे 'चरमपंथ के ख़िलाफ़ जंग' की शुरुआत के बाद साल 2002 में शुरू की गई थी और यहाँ उन लोगों को रखा जाता था जिन्हें अमेरिकी सरकार 'चरमपंथी' घोषित करती थी.
ग्वांतानामो बे में पहली बार 11 जनवरी 2002 को 20 क़ैदी लाए गए थे और इसके बाद से यहाँ सैकड़ों लोगों को रखा जा चुका है. इनमें से अधिकतर पर ना ही कोई आरोप तय किए गए और न ही मुक़दमा चलाया गया.
नूरज़ई की रिहाई तालिबान शासकों और अमेरिका के बीच लंबी बातचीत के बाद तय हुई अदला-बदली का नतीजा है. साल 2020 में बंधक बनाए गए एक अमेरिकी इंजीनियर मार्क फ़्रेरिच की रिहाई के बदले तालिबान के नूरज़ई को छोड़ा गया है. नूरज़ई साल 2005 से अमेरिका की जेल में बंद थे.
अमेरिका ने हालाँकि तालिबान सरकार को मान्यता नहीं दी है, लेकिन सोमवार को दोनों देशों में अधिकारियों ने कहा कि लंबे दौर की बातचीत के बाद क़ैदियों की अदला-बदली पर सहमति बनी है. साथ ही ये भी कहा था कि तालिबान और बाइडन प्रशासन के बीच बातचीत के रास्ते खुले हुए हैं.
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा, "मार्क फ्रेरिच की रिहाई के लिए बातचीत आसान नहीं थी. ये अमेरिकी लोगों की सुरक्षा के लिए ज़रूरी है कि ऐसे फ़ैसलों को स्वीकार किया जाए."
तालिबान ने कहा है कि फ्रेरिच को सोमवार को काबुल हवाई अड्डे पर अमेरिकी अधिकारियों के हवाले किया गया. बदले में अमेरिकी अधिकारियों ने ड्रग तस्करी के आरोप में जेल में बंद नूरज़ई को तालिबान के हवाले किया.
60 साल के फ्रेरिच का तालिबान ने अफ़ग़ानिस्तान में सत्ता पर काबिज होने से एक साल पहले अपहरण कर लिया था. फ्रेरिच काबुल में 10 साल से बतौर सिविल इंजीनियर काम कर रहे थे.
फ्रेरिच की बहन शार्लीन ककोरा ने कहा कि उन्हें भाई के रिहा होने की पूरी उम्मीद थी. एक बयान में ककोरा ने कहा, "मैं यह सुनकर बहुत खुश हूँ कि मेरा भाई सही सलामत है और घर लौट रहा है. पिछले 31 महीने से मेरा परिवार हर दिन उनके लिए प्रार्थना कर रहा था."
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कौन हैं नूरज़ई?
नूरज़ई तालिबान के लिए कितने अहम हैं, इसका अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अगस्त 2021 में अफ़ग़ानिस्तान में सत्ता छीनने से कई महीने पहले उन्होंने अमेरिका से फ्रेरिच की रिहाई के बदले नूरज़ई को छोड़ने की मांग की थी.
हालाँकि तब अमेरिका की ओर से ऐसे कोई संकेत नहीं मिले थे कि वह तालिबान के इस प्रस्ताव को लेकर गंभीर है.
नूरज़ई के अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल लौटने पर उनका ज़ोरदार स्वागत किया गया. सोशल मीडिया पर जारी कुछ वीडियो में दिख रहा है कि बड़ी संख्या में तालिबान फूल मालाओं से नूरज़ई का स्वागत कर रहे हैं.
बाद में एक संवाददाता सम्मेलन में नूरज़ई ने कहा, "अमेरिका की इच्छा से मेरी रिहाई दोनों देशों के बीच शांति स्थापित करेगी."
नूरज़ई तालिबान के संस्थापक मुल्ला उमर के क़रीबी थे और 1990 के दशक में बनी तालिबान सरकार को उन्होंने आर्थिक मदद की थी.
अफ़ग़ानिस्तान सरकार के प्रवक्ता ज़बीहुल्लाह मुजाहिद ने सोमवार को समाचार एजेंसी एएफ़पी को बताया- नूरज़ई के पास तालिबान का कोई आधिकारिक पद नहीं था, लेकिन उन्होंने हथियार और दूसरे तरीक़ों से हमारी मदद ज़रूर की थी.
नूरज़ई को हेरोइन तस्करी के मामले में अमेरिकी अदालत ने दोषी ठहराया था. उन्होंने 17 साल जेल में गुज़ारे. आरोप था कि नूरज़ई कंधार प्रांत में बड़े पैमाने पर अफ़ीम का कारोबार करता है. उस वक़्त कंधार तालिबान का मज़बूत ठिकाना था.
2005 में जब नूरज़ई को गिरफ़्तार किया गया था तो उनकी गिनती दुनिया के सबसे बड़ी ड्रग तस्करों में होती थी. अफ़ग़ानिस्तान के क़बायली नेता नूरज़ई को न्यूयॉर्क की अदालत ने 5 करोड़ डॉलर की ड्रग तस्करी के मामले में आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई थी.
अमेरिकी अधिकारियों का कहना था कि नूरज़ई ने बड़े पैमाने पर अफ़ीम की खेती तो करवाई ही थी, साथ ही अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान में ऐसी लैब भी बनाई थी जिनमें अफ़ीम को प्रोसेस कर हेरोइन बनाया जाता था.
हालाँकि तब नूरज़ई के वकील ने कहा था कि नूरज़ई को इंसाफ़ नहीं मिला है. उन्होंने ये भी दावा किया था कि नूरज़ई पर लगे आरोप ग़लत हैं और अमेरिकी अधिकारियों ने उन्हें भरोसा दिया था कि नूरज़ई को गिरफ़्तार नहीं किया जाएगा.
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