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अडानी ने इजरायली पोर्ट को खरीदने के लिए पानी की तरह पैसा क्यों बहाया? ये खास वजह जान लीजिए

नई दिल्ली, 20 जुलाईः दुनिया के चौथे सबसे अमीर शख्स गौतम अडानी ने हाल ही में इजराल के दूसरे सबसे बड़े बंदरगाह हाइफा को खरीद लिया है। हाइफा पोर्ट का सौदा 1.18 अरब डॉलर में हुआ है। भारतीय रुपये में यह राशि करीब 94 अरब डॉलर है। अडानी ग्रुप ने इजरायल की एक कंपनी गैडोट ग्रुप के साथ मिलकर यह अधिग्रहण किया है। इसमें अडानी ग्रुप की हिस्सेदारी 70 फीसदी वहीं गैडोट ग्रुप की हिस्सेदारी 30 फीसदी है।

लगायी भारी भरकम बोली

लगायी भारी भरकम बोली

गौतम अडानी का इस बंदरगाह के अधिग्रहण में कितनी अधिक दिलचस्पी थी इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अडानी ग्रुप ने इस इसे पाने के लिए इतनी भारी भरकम बोली लगाई कि कीमत सुनकर कई कंपनियां पहले ही साइड हो गईं। कंपनी में बोली लगाने वाली अडानी ग्रुप और दूसरी निकटतम कंपनी की बोली में भारी अंतर देख समझा जा सकता है कि इस पोर्ट को हासिल करने के लिए अडानी के लिए पैसा मायने नहीं रखता था।

लोगों ने कहा- इतने पैसे खर्च करना पागलपन

लोगों ने कहा- इतने पैसे खर्च करना पागलपन

अडानी ग्रुप को इस पोर्ट के बिड जीतने के बाद प्रतिस्पर्धा करने वाले अन्य समूहों में से एक के वरिष्ठ सदस्य ने इतनी राशि खर्च करने को 'पागलपन' करार दिया। वरिष्ठ सदस्य का कहना था कि मैंने सपने में भी नहीं सोचा था कि इस पोर्ट की बोली इतनी ऊंची जा सकती है। इतनी भारी कीमत में इस पोर्ट को खरीदना... यह सचमुच पागलपन है। इसे सुन ऐसा लगता है जैसे अडानी, नीलामी में मौजूद कंपनियों को इशारों में कह रहे हों कि दूर हट जाओ, इस पर सिर्फ मेरा हक है। यह रणनीतिक सौदा है और इसे हासिल करने के लिए हम पैसों की परवाह नहीं करने वाले हैं।

इजरायली मीडिया भी हैरान

इजरायली मीडिया भी हैरान

हाइफा पोर्ट के लिए अडानी ग्रुप की ओर से बोली लगाने पर एक इजरायली मीडिया ने भी लिखा है कि अडानी ग्रुप ने इस पोर्ट के लिए इजरायली सरकार की ओर से लगाए गए आकलन से भी अधिक बोली लगाई है। इजरायली मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पोर्ट को खरीदने के लिए स्थानीय समूहों ने भी बोली लगाई थी लेकिन जब वे अडानी पोर्ट्स द्वारा पेशकश की गई राशि के बारे में जान गए वे खुद पीछे हट गए।

यूरोप के लिए खुलेगा रास्ता

यूरोप के लिए खुलेगा रास्ता

रिपोर्ट में आगे कहा गया कि अडानी ग्रुप भारत में 13 समुद्री टर्मिनल्स का संचालन करती है और भारत के समुद्री वाणिज्य के 24 प्रतिशत को नियंत्रित करती है। वहीं, पश्तिमी देशों में अडानी ग्रुप के पास कोई टर्मिनल नहीं है। ऐसे में इजराइल का हाइफा पोर्ट अडानी ग्रुप के लिए काफी महत्वपूर्ण साबित होने वाला है। इजरायल की स्थिति ऐसी है कि यह देश यूरोप और एशिया को जोड़ता है। हाइफा के अधिग्रहण के बाद अडानी के लिए यूरोप का रास्ता खुल गया है। आने वाले वक्त अडानी ग्रुप हाइफा पोर्ट को भूमध्य सागर में एक हब के रूप में विकसित करने की योजना बना सकता है।

अमेरिका ने भी बनाया दबाव

अमेरिका ने भी बनाया दबाव

अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन ने कहा कि स्थानीय इजराइली साझेदार के साथ हाइफा पोर्ट के अधिग्रहण से कंपनी के भारतीय बंदरगाहों के साथ व्यापार लेन को बढ़ावा मिलेगा। यह पोर्ट लंबी अवधि में यूरोप और मध्य पूर्व को बेहतर ढंग से जोड़ सकता है। अखबार द डेली के मुताबिक अडानी ग्रुप को यह पोर्ट हासिल हो इसके बाद भारी दबाव बनाया गया था। अमेरिका द्वारा चीनी कंपनियों पर बोली जमा नहीं करने के लिए दबाव बनाया गया। वहीं, अंतिम समय में अमीरात की एक कंपनी भी पीछ हट गयी।

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