कनाडा-अमेरिका में जम जाएगी धरती, मिटेगा इंसानों का नामोनिशान, अटलांटिक में बजा तबाही का अलार्म
गल्फ स्ट्रीम, उत्तरी अटलांटिक महासागर में प्रवाहित होने वाली गर्म पानी की एक प्रमुख महासागरीय जलधारा है, जो लगातार कमजोर हो रहा है और जिसका असर पूरी दुनिया पर दिखने लगा है।
नई दिल्ली, अगस्त 06: विश्व के टॉप मौसम वैज्ञानिकों ने पूरी दुनिया के लिए महाचेतावनी जारी करते हुए कहा है कि दुनिया के दूसरे सबसे बड़े अटलांटिक महासागर में ऐसा परिवर्तन होने जा रहा है, जिसकी वजह से पूरे विश्व में उथल-पुथल मच सकता है। खासकर अमेरिका और कनाडा जैसे देशों में महातबाही मच जाएगी। वैज्ञानिकों ने नये सबूत जारी करते हुए कहा है कि अटलांटिक महासागर में गल्फ धारा का प्रवाह टूट सकता है, जिसकी वजह से गल्फ स्ट्रीम पूरी तरह से टूट जाएगा और पूरी दुनिया में तबाही ही तबाही होगी। वैज्ञानिकों ने कहा है कि करोड़ों लोगों पर इसका सीधा असर पड़ेगा।
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महाविनाश की महाचेतावनी
नेचर क्लाइमेट चेंज नामक पत्रिका में प्रकाशित एक नए रिसर्च पेपर में विश्व के टॉप साइंटिस्ट ने यह चेतावनी जारी की है, जिसके बाद पूरी दुनिया में सनसनी मच गई है। रिसर्च में कहा गया है कि पिछली शताब्दी के दौरान गल्फ स्ट्रीम के "स्थिरता" खोने के प्रमाण मिले हैं। जिसको लेकर वैज्ञानिकों ने आशंका जताई है कि, जो स्थिति बन रही है, उससे पता चलता है कि गल्फ स्ट्रीम पूरी तरह से टूट जाएगा और इसका सीधा असर वैश्विक जलवायु पर पड़ेगा और पूरी दुनिया का मौसम चक्र हमेशा के लिए बदल जाएगा। रिसर्च के लेखक ने "वैश्विक जलवायु प्रणाली पर गंभीर प्रभाव" की चेतावनी दी है''। रिपोर्ट में कहा गया है गल्फ स्ट्रीम काफी कमजोर हो रहा है और आने वाले सालों में धरती पर इससे लाखों लोग मारे जाएंगे।

क्या होता है गल्फ स्ट्रीम ?
गल्फ स्ट्रीम, उत्तरी अटलांटिक महासागर में प्रवाहित होने वाली गर्म पानी की एक प्रमुख महासागरीय जलधारा है। गल्फ स्ट्रीम, मेक्सिको की खाड़ी से उत्पन्न होकर उत्तर पूर्वी दिशा की तरफ बहत हुए पश्चिमी युरोप के पश्चमी तट तक समुद्र के अंदर से प्रवाहित होती है। लिहाजा, लोगों को ये दिखता नहीं है, लेकिन मौसम पर सबसे ज्यादा इसी का असर पड़ता है। मेक्सिको की खाड़ी में उत्पन्न होने की वजह से इसे खाड़ी की धारा यानि गल्फ स्ट्रीम कहा जाता है। गल्फ स्ट्रीम उत्तर अमेरिका के पूर्वी तट और यूरोप के पश्चिमी तट के तापमान को बढ़ा देती है। इसी जलधारा की वजह से पश्चिमी युरोप को गर्मी मिलती है। गल्फ स्ट्रीम को महासागरीय धाराओं में सबसे ज्यादा ताकतवर जलधारा माना जाता है, जो विश्व के मौसम चक्र को सबसे ज्यादा प्रभावित करता है। यह स्थानीय तूफानों को भी प्रभावित करता है। वैश्विक जलवायु में होने वाले परिवर्तन पर सबसे ज्यादा प्रभाव होने की वजह से वैज्ञानिक सबसे ज्यादा नजर गल्फ स्ट्रीम पर रखते हैं और अब सबसे बड़ी चेतावनी जारी की गई है।

कमजोर पड़ रही है गल्फ स्ट्रीम
अटलांटिक मेरिडियनल ओवरटर्निंग सर्कुलेशन (एएमओसी) समुद्री धाराओं की एक बड़ी प्रणाली का हिस्सा है, जिसे गल्फ स्ट्रीम के रूप में जाना जाता है, जो उष्ण कटिबंध से उत्तर की ओर गर्म पानी को उत्तरी अटलांटिक में स्थानांतरित करती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि ग्लोबल वॉर्मिंग की वजह से पूरी दुनिया का औसत तापमान बढ़ रहा है और ग्रीनलैंड के दक्षिण पूर्व में अटलांटिक का एक बड़ा हिस्सा लगातार ठंडा हो रहा है। जिसका असर ये होगा कि अटलांटिक महासागर में तापमान का संतुलन बिगड़ जाएगा और अटलांटिक धारा (गल्फ स्ट्रीम) कमजोर हो जाएगा। जिसका नतीजा ये होगा कि पूरी दुनिया में मौसम का पैटर्न पूरी तरह से बदल जाएगा। मतलब ये कि इसका परिणाम काफी ज्यादा विनाशकारी होगा।

क्या होगा परिणाम ?
वैज्ञानिकों ने कहा है कि गल्फ स्ट्रीम के कमजोर होने से कई देशों में भयानक तूफान, कई जगहों पर समुद्र के जलस्तर में काफी तेजी से इजाफा देखने को मिलेंगे। इसके साथ ही ऐसे जगहों पर बारिश होना करीब करीब बंद हो जाए। यानि, ऐसे जगह, जहां अभी काफी बारिश हो रही है, वो धीरे धीरे रेगिस्तान बन जाएगा और वहां लोगों का रहना असंभव हो जाएगा। जर्मनी के पॉट्सडैम इंस्टीट्यूट फॉर क्लाइमेट इम्पैक्ट रिसर्च से एक प्रेस रिलीज जारी करते हुए कहा है कि पिछले एक हजार साल में पहली बार अटलांटिक की धारा (गल्फ स्ट्रीम) सबसे कमजोर दर्ज की गई है, जिसका असर पूरी मानवजाति पर काफी खतरनाक हो सकता है।

बदल जाएगा मौसम का मिजाज
वैज्ञानिकों ने आशंका जताते हुए कहा है कि आने वाले वक्त में गल्फ स्ट्रीम और कमजोर पड़ेगा। गल्फ स्ट्रीम के उत्तरी भाग और गहरे समुद्री की धाराओं से पता चलता है कि ये आने वाले वक्त में और कमजोर हो जाएगा। वहीं, ओशनोग्राफिक इंस्टीट्यूशन के प्रेसिडेंट और डायरेक्टर पीटर डे मेनोकल ने तो इसे इसी साल मार्च महीने में राक्षसी परिवर्तन करार दिया था। रिपोर्ट में कहा गया था कि अगर गल्फ स्ट्रीम लगातार कमजोर पड़ता गया तो अमेरिका, कनाडा और यूरोप के कई हिस्से पूरी तरह से पानी में डूब जाएंगे। आपको बता दें कि यूरोप में गल्फ स्ट्रीम की धारा को वैज्ञानिकों की भाषा में अटलांटिक मेरिडेशनल ओवरवर्टनिंग सर्कुलेशन यानि एएमओसी के नाम से जाना जाता है।

अमेरिका पर खतरनाक असर दिखना शुरू
इस साल अमेरिका में तापमान बढ़कर 50 डिग्री सेल्सियस सो पार कर गया है, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है। अमेरिका और कनाडा में भीषण गर्मी की वजह से सैकड़ों लोगों की मौत हो गई, वहीं करोड़ों जलीय जीव मारे गये हैं। और माना जा रहा है कि इसकी वजह गल्फ स्ट्रीम का कमजोर होना भी एक कारण है। वहीं, वैज्ञानिकों को डर है कि आगे जाकर गल्फ स्ट्रीम के कमजोर होने की वजह से यूरोपीय देशों का तापमान 15 डिग्री सेल्सियस तक गिर सका है, जिसके बाद उत्तरी अमेरिका और यूरोप में आर्कटिक जैसी बर्फीली स्थिति बन जाएगी और उत्तरी अफ्रीका और उत्तरी-दक्षिणी अमेरिका में बारिश पूरी तरह से बंद हो जाएगी, नतीजा इन इलाकों में भयानक सूखा और अकाल पड़ जाएगा। वैज्ञानिकों ने कहा है कि पिछले कुछ सालों से इन इलाकों में बारिश होना कम होने लगा है, जिसे रिकॉर्ट पर भी लिया गया है।

भारत पर भी पड़ेगा बुरा प्रभाव
आपको बता दें कि गल्फ स्ट्रीम का प्रभाव हिंद महासागर पर भी काफी ज्यादा पड़ता है, लिहाजा गल्फ स्ट्रीम की धारा में अगर परिवर्तन आता है, तो इसका सीधा असर भारत पर भी पड़ेगा। भारत की कृषि व्यवस्था प्राकृतिक बारिश पर ही निर्भर है और मॉनसून की बारिश की वजह से भारत में जुलाई से लेकर सितंबर तक हर तरफ मौसम हरा-भरा रहता है। लिहाजा, अगर गल्फ स्ट्रीम पर असर पड़ता है, तो भारत में भी बारिश पर असर पड़ेगा।
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