ग्राउंड रिपोर्ट: एक मुलाक़ात पर 100 करोड़ ख़र्च कर सिंगापुर को क्या मिला

किम जोंग-उन के साथ सिंगापुर के प्रधानमंत्री ली शियेन लूंग
AFP/Getty Images
किम जोंग-उन के साथ सिंगापुर के प्रधानमंत्री ली शियेन लूंग

सिंगापुर ने अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप और उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग-उन के बीच ऐतिहासिक शिखर सम्मलेन के आयोजन में बड़ी कामयाबी हासिल की.

दोनों नेताओं की मुलाक़ात ख़त्म हुई लेकिन एक सवाल जिसका जवाब देने से सिंगापुर वाले बच रहे हैं वो ये है कि इस सम्मलेन के आयोजन से सिंगापुर क्या फ़ायदा हुआ?

जो जवाब आ रहे हैं वो एक जैसे और घिसे-पिटे लगते हैं. कोई इसका खुलासा इस तरह से करता है कि ये एक निष्पक्ष देश है जिसकी दोस्ती अमरीका और उत्तर कोरिया दोनों से ही है. कोई कहता है कि सिंगापुर सुरक्षा के हिसाब से बहुत महफूज़ है.

किसी का कहना है कि सिंगापुर के पास शिखर सम्मलेन कराने का अनुभव है क्योंकि इसने 2015 में चीन और ताइवान के नेताओं के बीच एक कामयाब सम्मलेन कराया था.


डोनल्ड ट्रंप और किम जोंग-उन
EPA/kcna
डोनल्ड ट्रंप और किम जोंग-उन

तो क्या सिंगापुर ब्रांड बन गया है?

कुछ ऐसे भी लोग मिले जिन्होंने सच बोलने की कोशिश की. उनका कहना था कि "ब्रांड सिंगापुर" मज़बूत होगा और इस मुलाक़ात कराने के बदले इसे फ्री पब्लिसिटी मिलेगी. ये लोग मानते हैं कि सिंगापुर एक ब्रांड है, जो बिकता है.

हो सकता है कि ये सारे जवाब सही हों. लेकिन इन जवाबों से संतुष्टि नहीं होती. सुनकर ऐसा लगता है कि ये एक ऐसा फ़ार्मूला है जिसे सब ने रट लिया है.

आख़िर सोचिए कोई भी देश अपने देश में किसी दो अलग देशों के बीच मुलाक़ात कराने के लिए 100 करोड़ रुपये क्यों खर्च करेगा?

अंग्रेजी में एक कहावत है कि 'देयर इज़ नो सच थिंग ऐज़ ए फ्री लंच' यानी 'फ्री का लंच कोई नहीं खिलाता'. ख़ास तौर से पूंजीवादी व्यवस्था में 'एक हाथ ले और दूसरे हाथ दे वाला' ही फ़ार्मूला चलता है

तो इस सम्मलेन से सिंगापुर को क्या मिला? वर्तमान में ढेर सारा गुडविल.

राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप और कोरिया के चेयरमैन किम जोंग-उन दोनों ने सिंगापुर का समिट कराने के लिए सिंगापुर का अलग-अलग शुक्रिया अदा किया.

ट्रंप और कम का इंतज़ार करते सिंगापुर के नागरिक
EPA
ट्रंप और कम का इंतज़ार करते सिंगापुर के नागरिक

सिंगापुर को बाद में मिलेगा फ़ायदा

इस सम्मलेन को कवर करने के लिए क़रीब 2500 मीडिया वाले दुनिया भर से आये थे. उन में से कई ने कहा कि वो सिंगापुर से काफ़ी खुश हैं. नील साइमन एक नामचीन ऑस्ट्रलियाई पत्रकार हैं. उन्होंने कहा कि सिंगापुर ने उन पर एक अच्छा असर छोड़ा है.

इंडोनेशिया से आए पत्रकारों की एक टीम ने कहा उन्हें सिंगापुर और समिट के लिए इंतज़ाम अच्छा था. इन बयानात से साफ़ ज़ाहिर होता है कि सिंगापुर को गुडविल तो मिला ही साथ ही सम्मलेन के सफल आयोजन का लाभांश भी.

लेकिन सिंगापुर को इससे एक फ़ायदा हो सकता है यानी उसे "लॉन्ग टर्म बेनिफिट" की आशा है.

इंडियन चैम्बर ऑफ़ कॉमर्स सिंगापुर के चेयरमैन और तमिल समुदाय के एक प्रमुख व्यापारी टी चंद्रू इस पर सही से रोशनी डालते हैं, "हम हमेशा लॉन्ग टर्म लाभ देखते हैं."

वो आगे कहते हैं, "समिट की कामयाबी के बाद इसके परिणाम सकारात्मक होंगे. क्षेत्र में शान्ति और सियासी स्थिरता मज़बूत होगी. उत्तर कोरिया की अर्थव्यवस्था का पुनर्णिर्माण होगा. सिंगापुर को इन सब का लाभ मिलेगा."


सिंगापुर की पुलिस, किम ट्रंप समिट
EPA
सिंगापुर की पुलिस, किम ट्रंप समिट

इस क्षेत्र का सिंगापुर सबसे बड़ा ट्रेडिंग केंद्र है. ये दुनिया के चंद गिने-चुने बड़े वित्तीय केंद्रों में से भी एक है. अगर आप सिंगापुर की अर्थव्यवस्था के मॉडल पर ग़ौर करें तो समझ में आएगा कि ये बिचौलिए से पैसे अधिक कमाती है.

वस्तुओं के हिसाब से सिंगापुर का एक्सपोर्ट कुछ अधिक नहीं है लेकिन इसने सर्विसेज उद्योग में अपना सिक्का जमा लिया है. ये बड़े-बड़े कामों में और बड़े प्रोजेक्ट्स में सुविधाएं देने में आगे है.

उदाहरण के तौर पर सिंगापुर की कंपनियों का एक संघ यानी कॉन्सोर्शियम फिलहाल आँध्र प्रदेश की नई राजधानी अमरावती बनाने में लगा है. सिंगापुर की कंपनियां पैसे भी निवेश कर रही हैं और एक नए शहर को बसाने में भी लगा है.

देश और इसकी ज़रूरत समझती है सरकार

सिंगापुर वालों की दूरअंदेशी के कारण ही आज उनका छोटा-सा देश, जिसकी आबादी हैदराबाद से भी काफ़ी कम है, विकसित देशों में शामिल है और यहां प्रति व्यक्ति आय सालाना 80,000 डॉलर से अधिक है जो कई विकसित देशों भी बेहतर है.

छोटे से 55 लाख वाली आबादी वाला ये देश सही मायने में एक शहर है जिसे हम अंग्रेजी में सिटी-स्टेट कहते हैं.

सिंगापुर का मरीना बे होटल
Getty Images
सिंगापुर का मरीना बे होटल

व्यापारी थिरूनल करासु कहते हैं कि देश की सरकार इस बात को पूरी तरह से समझती है कि देश की अर्थव्यवस्था सर्विस उद्योग पर ही निर्भर है. "इसीलिए सरकार नागरिकों को नई स्किल और नए क्षमता बढ़ाने में मदद करती है. हम किसी उम्र में सरकार की मदद से नए स्किल्स सीख सकते हैं."

वो कहते हैं कि सिंगापुर की इस मानसिकता को जो कोई भी समझता है वो ये सवाल नहीं करेगा कि ट्रंप-किम सम्मलेन की मेज़बानी से सिंगापुर को क्या मिलेगा.

और इसीलिए टी चंद्रू लॉन्ग टर्म बेनिफ़िट की बात करते हैं. वो कहते हैं, "अगर उत्तर कोरिया की इकॉनमी खुली तो सिंगापुर की कंपनियों को वहां काफ़ी काम मिलेगा."

सिंगापुर शहर
BBC
सिंगापुर शहर

ये भी संभव है कि अधिकतर कंपनियां सिंगापुर के रास्ते उत्तर कोरिया निवेश करने जाएँ. उत्तर कोरिया के पुनर्निर्मान में शामिल अधिकतर दुनिया के देश सिंगापुर आकर अपने दफ़्तर खोलना भी पसंद कर सकती हैं. सिंगापुर सरकार विदेशी कंपनियों को वहां अपने मुख्यालय खोलने पर आयकर के फ़ायदे देती है इसके अलावा कई और तरह की छूट देती है.

ट्रंप और किम के बीच शिखर सम्मलेन हुआ. सम्मलेन बिना किसी रुकावट और बिना किसी मुश्किलों के ख़त्म हुआ. ये बातें सब को याद रहेंगी.

यही कारण है कि सिंगापुर ने मेज़बानी करने के इस ऐतिहासिक मौक़े का भरपूर फ़ायदा उठाया. साथ ही अपनी दूरअंदेशी से उसने अपने लिए आने वाले समय में व्यवसाय की दुनिया में एक महत्वपूर्ण भूमिका बना सकने का रास्ता भी खोल दिया है.

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+