Green Comet: पाषण युग वाली घटना का कैसे होगा दीदार? जानिए कहां है 50,000 साल बाद आने वाला धूमकेतु?

पृथ्वी एक बार फिर एक ऐसी खगोलीय घटना की साक्षी बनने जा रही है जिसे हजारों साल हमारे पूर्वजों ने देखी थी। साइंटिस्ट्स ने पिछले साल इसकी खोज की थी।

Green Comet

मानव जाति एक एक बार फिर से एक ऐसी खगोलीय घटना की साक्षी बनने जा रही है जिसे हजारों साल हमारे पूर्वजों ने देखी थी । हालांकि ये बात एक कहानी जैसी बात जरूर लगती है, लेकिन जो घटना हमारी आंखों के सामने हो रही तो उस पर यकीन करने के लिए किसी अन्य प्रमाण क्या आवश्यकता हो सकती है। दरअसल एक हरा धूमकेतु लंबे समय बाद पृथ्वी के नजदीक से गुजरने वाला है। ये एक ऐसी घटना है, जो कई हजार साल बाद होती है। आइए जानते हैं इसका दीदार हम सभी कैसे कर पाएंगे?

हरे रंग का धूमकेतु

हरे रंग का धूमकेतु

इस विशेष धूमकेतु को C/2022 E3 (ZTF) कहा जाता है। मार्च 2022 में इसकी खोज खगोलविदों ने की थी। साइंटिस्ट्स ने इसे कैलिफोर्निया में Zwicky Transient Facility में खोजा था। इसकी चमक हरे रंग की होती है। जिसके कारण इसे ग्रीन धूमकेतु (Green Comet) उपनाम दिया गया है। माना जाता है कि ये धूमकेतु स्पेस के बर्फीले पिंडों से बना है, जो सौर मंडल में पृथ्वी से सबसे दूर वाले हिस्से में मौजूद है।

26 मिलियन मील दूर था

26 मिलियन मील दूर था

स्पेस साइंटिस्ट्स ने मार्च 2022 में इसे खोजा तो वक्त इसकी दूरी 26 मिलियन मील थी। ये धूमकेतु सूर्य की परिक्रमा करने में एक लंबा समय लेता है। साइंटिस्ट्स के मुताबिक ग्रीन कॉमेट अपनी कक्षा में परिक्रमा पूरी करने की हजारों वर्षों का समय लेता है। हालांकि अपनी कक्षा में ये नियमित गति से चल रहा है। लेकिन गति काफी धीमी होने कारण अपनी कक्षा में एक पूरा चक्कर लगाने में करीब 50,000 वर्ष का समय लेता है। माना जाता है कि ये धूमकेतु स्पेस के बर्फीले पिंडों से बना है, जो सौर मंडल में पृथ्वी से सबसे दूर वाले हिस्से में मौजूद है। साइंटिस्ट्स के अनुमान के मुताबिक, करीब पचास हजार साल पहले पृथ्वी के नजदीक से गुजरने का अनुमान लगाया है। उस वक्त पाषाण युग था, जब धरती पर निअंडथल मौजूद थे।

पृथ्वी से कैसे दिखेगी घटना?

पृथ्वी से कैसे दिखेगी घटना?

धूमकेतु के स्पष्ट रूप से देखने के लिए दूरबीन की जरूरत होती है। क्योंकि इसे बिना किसी माध्यम का प्रयोग किए सीधे आंखों से नहीं देखा जा सकता। लेकिन C/2022 E3 (ZTF) को लेकर रिपोर्ट्स के मुताबिक चंद्रमा के अस्त होने के बाद बिना किसी उपकरण के प्रयोग के इसे देखा जा सकता है। उम्मीद है कि ये बुधवार गुरुवार के बीच पृथ्वी के सबसे करीब पहुंचेगा। ये धूमकेतु पृथ्वी से 0.28 AU यानी 26 मिलियन मील दूर से गुजरेगा। हरे धूमकेतु को स्पष्ट देखने के लिए बुधवार की रात ऐसी जगह पहुंचना होगा जहां पूरी तरह अंधेरा हो। यानी इस अनोखी घटना को देखने के लिए हमें शहर की चकाचौंध से दूर होना पड़ेगा।

धूमकेतु की मौजूदा स्थिति

धूमकेतु की मौजूदा स्थिति

खगोलशास्त्रियों के मुताबिक इस वक्त धूमकेतु हमारे स्पेस में पृथ्वी की उत्तर में है स्थित है। वो पोलारिस के करीब है। धूमकेतु के उत्तर दिशा में सीधे ध्रुव तारा है। रॉयल ऑब्जर्वेटरी के स्पेस साइंटिस्ट जेक फोस्टर ने कहा, "धूमकेतु को आधी रात के बाद सबसे अच्छा देखा जाता है, जब आकाश में उसकी चमक अपनी पीक पर होगी। इसके बाद ये धीरे- धीरे अगले हफ्ते में वृष राशि के नक्षत्र की ओर बढ़ेगा।

धूमकेतु का रंग हरा क्यों?

धूमकेतु का रंग हरा क्यों?

साइंटिस्ट्स के मुताबित धूमकेतु की चमक हरे रंग की होना कोई आश्चर्य वाली बात नहीं है। हालांकि ये दिलचस्प जरूर है। माना जाता है कि यह घटना सूर्य से प्रकाश और डायटोमिक कार्बन के बीच परस्पर क्रिया से उत्पन्न होती है। डायटोमिक कार्बन तत्व गैसीय अवस्था में है, जो अस्थिर है। इसमें कार्बन परमाणु युग्म में बंधे होते हैं। जब ये धूमकेतु सूर्य के प्रकाश में होता है तो बड़े कार्बन वाले पदार्थों को विघटन होता है। ऐसे में जब धूमकेतु डायटोमिक कार्बन पराबैंगनी किरणों से उत्तेजित होकर प्रकाश छोड़ता है। इस रासायनिक घटना के कारण धूमकेतु के नाभिक के चारों ओर हरे रंग की चमक देखी जाती है।

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