Google की 'सीक्रेट रेसिपी' पर छिड़ी बहस, सुंदर पिचाई ने कोर्ट में कहा-हमें भी नहीं मिली हर मोर्चे पर सफलता'
Google: बड़ी टेक कंपनियों की ताकत पर लगाम लगाने की कोशिशें अब कानूनी लड़ाई का रूप ले चुकी हैं, और इस बार सबसे बड़े सर्च इंजन गूगल के खिलाफ जंग छिड़ गई है। अमेरिका की एक कोर्ट में चल रही इस बहुचर्चित सुनवाई में खुद गूगल के CEO सुंदर पिचाई मैदान में उतर आए हैं। लेकिन यह लड़ाई सिर्फ एक कंपनी या एक व्यक्ति की नहीं है, बल्कि यह बहस उस भविष्य को लेकर है जहां टेक्नोलॉजी की ताकत बंटेगी या फिर कुछ ही हाथों में सिमटी रह जाएगी।
अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) का आरोप है कि गूगल ने वर्षों से अपनी बादशाहत बनाए रखने के लिए ऐसे रास्ते अपनाए, जिससे दूसरे प्रतियोगियों के लिए बाजार में जगह बनाना मुश्किल हो गया। अब जब DOJ ने कोर्ट में यह साबित कर दिया कि गूगल ने गलत तरीके अपनाए, तो बहस इस बात पर हो रही है कि इसका हल क्या निकाला जाए। और यहीं से कहानी में ड्रामा, रणनीति और गूगल की "गुप्त रेसिपी" की चर्चा शुरू होती है।

क्या है पूरा मामला?
अमेरिका के न्याय विभाग ने गूगल पर यह आरोप लगाया है कि उसने प्रतिस्पर्धा खत्म करने के लिए अनुचित रणनीतियों का इस्तेमाल किया। कोर्ट में DOJ यह साबित कर चुका है कि गूगल ने मार्केट में बने रहने के लिए अनुचित तरीके अपनाए, जैसे मोबाइल कंपनियों और ब्राउज़र्स के साथ डील कर अपने सर्च इंजन को डिफॉल्ट बनवाना।
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अब मुकदमे का दूसरा चरण चल रहा है, जिसमें कोर्ट यह तय करेगा कि इस समस्या को कैसे सुलझाया जाए। और यहीं से कहानी और गंभीर हो जाती है।
अपना सर्च डेटा दूसरों को दे गूगल
DOJ ने कोर्ट में सुझाव दिया है कि गूगल को अपनी सर्च डेटा और वेब इंडेक्स को दूसरी छोटी कंपनियों के साथ शेयर करना चाहिए, ताकि वे भी अपना खुद का सर्च इंजन बना सकें और मुकाबले में आ सकें। सरकार का मानना है कि इससे टेक्नोलॉजी सेक्टर में समान अवसर पैदा होंगे।
'ये हमारे बिजनेस का दिल निकालने जैसा है'
सुंदर पिचाई ने कोर्ट में इस प्रस्ताव का जोरदार विरोध किया। उन्होंने कहा कि DOJ का सुझाव गूगल के "सीक्रेट सॉस" को लीक करने जैसा है - यानी वह तकनीक और डेटा, जिसने गूगल को गूगल बनाया है। पिचाई ने कहा, "ये एक तरह से हमारे सर्च बिजनेस को बिना नाम लिए तोड़ने जैसा है।"
उन्होंने यह भी कहा कि DOJ की मांगें इतनी व्यापक और असाधारण हैं कि अगर ये लागू कर दी गईं, तो गूगल जैसी इनोवेटिव कंपनी के लिए आगे बढ़ना मुश्किल हो जाएगा।
क्रोम को अलग करने की बात पर भी आपत्ति
DOJ ने यह सुझाव भी दिया कि गूगल के पॉपुलर ब्राउजर 'Chrome' को कंपनी से अलग कर दिया जाए। DOJ का मानना है कि इससे गूगल अपने सर्च इंजन को Chrome के जरिए प्रमोट नहीं कर पाएगा। लेकिन पिचाई ने तर्क दिया कि ऐसा करने से इंटरनेट की सुरक्षा को खतरा हो सकता है और ओपन वेब का ढांचा भी प्रभावित होगा।
'गूगल को हर मोर्चे पर नहीं मिली सफलता'
पिचाई ने कोर्ट में यह भी कहा कि गूगल को हर मोर्चे पर सफलता नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि Google Plus और Buzz जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म बुरी तरह फेल हो गए। इससे उन्होंने साबित करने की कोशिश की कि गूगल अजेय नहीं है, और टेक्नोलॉजी में असफलता का भी सामना करता है।
कंपनी की कमाई अब भी जबरदस्त
भले ही कोर्ट में विवाद चल रहा हो, लेकिन गूगल की कमाई में कोई असर नहीं पड़ा है। हाल ही में कंपनी ने एक तिमाही में 90 अरब डॉलर से ज्यादा की आय की है।
अगस्त में आएगा बड़ा फैसला
अब सबकी निगाहें अगस्त 2025 पर टिकी हैं, जब कोर्ट इस मामले पर अपना अंतिम फैसला सुनाएगा। अगर कोर्ट DOJ के पक्ष में फैसला देता है, तो यह टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री के लिए एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है।
गूगल का भविष्य अब अमेरिका की कोर्ट के हाथ में है। सवाल यह है - क्या गूगल को उसकी ताकत बांटनी होगी? या फिर सुंदर पिचाई की दलीलें कंपनी को बचा पाएंगी?
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