बस्तर के दुर्गम जंगलों में 'विकास' की नई इबारत: कोंडापल्ली बेली ब्रिज ने बदली ग्रामीणों की किस्मत

बस्तर के घने जंगलों और दुर्गम पहाड़ियों के बीच विकास की एक नई इबारत लिखी जा रही है। जिन इलाकों में कभी नक्सली प्रभाव और कठिन रास्तों की वजह से पहुंचना नामुमकिन था, वहां अब बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी के जरिए तेजी से बदलाव आ रहा है।

Kondapalli Bailey Bridge Boosts Bastar Connectivity

इस बदलाव की सबसे बड़ी मिसाल छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के कोंडापल्ली में बना नया 'बेली ब्रिज' है। राज्यव्यापी 'सुशासन तिहार' अभियान के तहत मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस पुल का निरीक्षण किया। उन्होंने इसे विकास, विश्वास और सुशासन को बस्तर के दूरदराज इलाकों तक पहुंचाने वाली एक मजबूत कड़ी बताया।

यह पुल उन हजारों ग्रामीणों के लिए लाइफलाइन बन गया है, जो भौगोलिक चुनौतियों और सुरक्षा कारणों से सालों तक मुख्यधारा से कटे रहे। मानसून के दौरान कई गांवों का सड़क संपर्क पूरी तरह टूट जाता था, जिससे अस्पताल, स्कूल और जरूरी सेवाओं तक पहुंचना बेहद मुश्किल हो जाता था। अधिकारियों का कहना है कि क्षेत्र में सड़कों और पुलों के जाल बिछने से अब स्थिति तेजी से बदल रही है।

बेली ब्रिज तकनीक का विकास दूसरे विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश इंजीनियर डोनाल्ड बेली ने किया था। यह तकनीक दुर्गम इलाकों में तेजी से पुल बनाने के लिए दुनिया भर में मशहूर है। इस मॉड्यूलर प्रीफैब्रिकेटेड ट्रस ब्रिज सिस्टम की खासियत यह है कि इसे बहुत कम समय और कम लागत में तैयार किया जा सकता है।

सीमा सड़क संगठन (BRO) द्वारा निर्मित कोंडापल्ली बेली ब्रिज को आधुनिक इंजीनियरिंग और विकास का एक सफल उदाहरण माना जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, पारंपरिक पुलों की तुलना में ये पुल लगभग पांचवें हिस्से की लागत में बन जाते हैं और महज एक महीने के भीतर तैयार हो सकते हैं। यही वजह है कि पहुंच से बाहर वाले इलाकों में विकास कार्यों को रफ्तार देने के लिए ये बेहद कारगर साबित हो रहे हैं।

बीजापुर जिले में बने 21 बेली ब्रिज

प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि बीजापुर जिले में अब तक कुल 21 बेली ब्रिज बनाए जा चुके हैं। इन पुलों ने दूरदराज के गांवों और नजदीकी शहरों के बीच सड़क संपर्क को काफी मजबूत कर दिया है, जिससे अब साल भर आवाजाही आसान हो गई है।

बेहतर कनेक्टिविटी की वजह से ग्रामीणों को अब अस्पतालों, स्कूलों, बाजारों और सरकारी योजनाओं का लाभ आसानी से मिल रहा है। भारी बारिश के दौरान जो इलाके महीनों तक दुनिया से कटे रहते थे, वे अब धीरे-धीरे मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं।

सड़क और पुल ला रहे हैं नए अवसर: मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता विकास को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है। दौरे के दौरान उन्होंने कहा, "सड़कें और पुल सिर्फ कंक्रीट के ढांचे नहीं हैं, बल्कि ये शिक्षा, स्वास्थ्य और बेहतर भविष्य के रास्ते खोलते हैं।"

मुख्यमंत्री ने इस प्रोजेक्ट से जुड़े इंजीनियरों और मजदूरों की भी सराहना की और उन्हें राज्य की विकास यात्रा का अहम हिस्सा बताया। उन्होंने मौके पर मौजूद श्रमिकों से बातचीत की और कठिन परिस्थितियों में काम करने के उनके अनुभवों को भी सुना।

बस्तर की बदलती पहचान

कोंडापल्ली बेली ब्रिज को अब सिर्फ एक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। यह बस्तर की बदलती पहचान का प्रतीक है, जहां विकास अब घने जंगलों और सुदूर गांवों तक पहुंच रहा है।

अधिकारियों और स्थानीय लोगों का मानना है कि यह पुल न केवल सड़क के दो छोरों को जोड़ रहा है, बल्कि अलग-थलग पड़े इलाकों में रहने वाले लोगों की भौगोलिक, सामाजिक और आर्थिक दूरियों को भी कम कर रहा है।

कभी डर और पिछड़ेपन के लिए पहचाने जाने वाला बस्तर अब बेहतर बुनियादी ढांचे, बेहतर सार्वजनिक सेवाओं और स्थानीय समुदायों के बढ़ते भरोसे का गवाह बन रहा है। कोंडापल्ली बेली ब्रिज इस बड़े बदलाव की सबसे सशक्त तस्वीरों में से एक है।

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