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तेजी से पिघल रहे हैं हिमालय के ग्लेशियर, भारत पर आने वाले सबसे बड़े खतरे का बजा अलार्म

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नई दिल्ली, अप्रैल 10: हिमालय के ग्लेशियर पिघलने से साउथ एशिया के ऊपर काफी गंभीर खतरा मंडरा रहा है। हिमालय बार बार खतरे का अलार्म बजाता है लेकिन सरकारों के पास हिमालय को लेकर कोई ठोस उपाय नहीं है। क्योंकि इतना तो साफ है कि अगर हिमालय किसी दिन अपना प्रकोप दिखाना शुरू करेगा तो उसकी तबाही को रोकना इंसानों के वश की बात नहीं होगी। हिमालय से ग्रीनलैंड तक ग्लेशियरों के पिघलने से भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल और भूटान पर काफी गंभीर खतरा मंडरा रहा है।

तेजी से पिघलते ग्लेशियर

पिछले कुछ सालों में उत्तराखंड में आई आपदाओं को देखकर समझा जा सकता है कि हिमालय ने किस तरह की चेतावनी दी जा रही है लेकिन सरकारें इस खतरे से निपटने के लिए कोई कोशिश करती नजर नहीं आ रही है। रिपोर्ट के मुताबिक हिमालय के पेट में दुनिया का तीसरा सबसे ज्यादा बर्फ जमा है, जो काफी तेजी से पिघल रही है। ग्लोबल वार्मिंक की वजह से हिमालय पर बिछी बर्फ की चादर तेजी से पतली हो रही है, जिसकी चपेट में भारत, पाकिस्तान, नेपाल और भूटान के कई शहर डायरेक्ट आ सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक 1975 की तुलना में 2016 तक हिमालय क्षेत्र का टेम्परेचर एक डिग्री बढ़ चुका थी, जिसकी वजह से बर्फ लगातार तेजी से पिघलना शुरू हो गया था। पिछले 40 सालों में हिमालय पर मौजूद ग्लेशियरों ने अपना एक चौथाई घनत्व खो दिया है और हिमालय पर मौजूद बर्फ में लगातार टूट-फूट हो रही है।

बढ़ते तापमान से गंभीर खतरा

जनवरी में कोलंबिया यूनिवर्सिटी द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक साल 1975 से साल 200 तक हिमायल से जितनी बर्फ पिघली है, उतनी बर्फ सिर्फ पिछले दो सालों में पिघल चुकी है। कोलंबिया यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 40 सालों में हिमालय पर मौजूद 650 ग्लेशियर का अध्ययन किया गया है। ये ग्लेशियर हिमालय पर 2 हजार किलोमीटर के दायरे में पश्चिम से पूर्व दिशा की तरफ फैले हुए हैं। इस रिसर्च के बारे में बताते हुए कोलंबिया यूनिवर्सिटी के रिसर्चर जोशुआ मॉरेर ने कहा था कि 'यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि हिमालय ग्लेशियर इतनी तेजी से क्यों पिघल रही है और इसकी रफ्तार के बारे में भी पता नहीं चल पा रहा है, लेकिन इसकी रफ्तार बहुत बड़े खतरे की तरफ इशारे कर रही है। साल 2000 से पहले ग्लेशियर के पिघलने की रफ्तार हर साल 0.25 मीटर था, जो साल 2000 के बाद बढ़कर आधा मीटर हर साल हो गई। और ये काफी बड़ा खतरा है।'

पिघल रहे हैं दुनियाभर के ग्लेशियर

पिघल रहे हैं दुनियाभर के ग्लेशियर

दुनियाभर में करीब 2 लाख से ज्यादा बड़े ग्लेशियर हैं और ग्लोबल वार्मिंग की वजह से करीब करीब हर ग्लेशियर में मौजूद बर्फ ने पिघलना शुरू कर दिया है। ग्लेशियर को ही धरती के लिए मीठे पानी का भंडार कहा जाता है और ग्लेशियर से पिघलने वाली बर्फ से जो पानी मिलता है, उसपर करोड़ों लोगों की जिंदगी निर्भर करती है। लेकिन, पिछले कुछ सालों में धरती पर कार्बन उत्सर्जन, जीवाश्म ईंधनों का बेतहाशा इस्तेमाल हुआ है, जिसकी वजह से ओजोन परत में छेद भी हुआ है और इसका असर सीधे ग्लेशियर पर पड़ता है। जिसको लेकर इंटरगवर्मेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज ने दो महीने पहले रिपोर्ट दी थी कि इस सदी के अंत कर हिमालय के ग्लेशियर अपनी एक तिहाई बर्फ को खो देंगे और अगर दुनिया में प्रदूषण इसी रफ्तार से बढ़ती रही तो साल 2100 तक यूरोप के 80 प्रतिशत ग्लेशियर पूरी तरह से पिघल जाएंगे और लोगों के प्यासे मरने की नौबत आ जाएगी।

मानव जाति के अस्तित्व पर खतरा

मानव जाति के अस्तित्व पर खतरा

क्लाइमेंट चेंज एक्टिविस्ट माइक हुडमा ने 8 मई को एक रिपोर्ट शेयर करते हुए कहा है कि दुनिया में मौजूद ग्लेशियर्स से सिर्फ एक दिन में 11 बिलियन टन ग्लेशियर पिघला है, जो 40 लाख ओलंपिक मैदान जितना स्वीमिंग पूल को भरने के लिए काफी है। उन्होंने कहा कि अब स्थिति ऐसी है कि एक पल भी आप बर्बाद नहीं कर सकते हैं क्योंकि आपके पास रहने के लिए कोई दूसरा प्लानेट नहीं है। उन्होंने कहा कि हवा में प्रदूषण का स्तर इतना ज्यादा बढ़ चुका है कि सिर्फ वायु प्रदूषण से हर साल दुनिया में 70 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हो जा रही है। वहीं, उन्होंने कहा कि अमेरिका में मौजूद ग्लेशियर पहले लगाए गये अनुमान के मुकाबले 100 गुना ज्यादा रफ्तार से पिघल रहे हैं। ग्लेशियर का पिघलना पूरी मानव जाति के अस्तित्व के ऊपर बेहद गंभीर संकट ला सकता है क्योंकि दुनिया की बड़ी आबादी का जीवन सिर्फ और सिर्फ ग्लेशियर की वजह से टिका हुआ है। हिमालय के ग्लेशियर से जो पानी निकलता है, उसपर करीब 2 अरब यानि 200 करोड़ लोग निर्भर हैं। खेती के लिए इन्हीं ग्लेशियर से पानी मिलता है तो पीने का पानी भी कदरत यहीं से देता है और अगर ग्लेशियर से पानी मिलना बंद हो जाए तो साउथ एशिया के तमाम देश, जिसमें भारत, पाकिस्तना, नेपाल, बांग्लादेश और भूटान सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे।

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English summary
The glacier ice present in the Himalayas is melting at a very fast rate, which poses a great danger to India.
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