कोर्ट ने कहा मुस्लिम लड़कियों को नहीं दी जा सकती छूट, लड़कों संग तैराकी में लेने होगा भाग

11 साल की छात्रा ने इस्लाम में लिबास को लेकर बनाए गए नियमों का हवाला देते हुए जर्मन कोर्ट से मांगी थी तैराकी की कक्षाओं से छूट।

बर्लिन। जर्मनी की संवैधानिक अदालत ने अपने एक फैसले में कहा है कि धर्म के आधार पर छात्रों को विशेष छूट नहीं दी जा सकती। एक मुस्लिम लड़की के तैराकी की कक्षा से छूट मांगे जाने के लिए की गई अपील पर कोर्ट ने ये बातें कहीं।

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जर्मनी की एक अदालत ने कहा है कि मुस्लिम लड़कियों को भी अपनी स्कूल की तैराकी की कक्षाओं में लड़कों और दूसरी लड़कियों के साथ भाग लेना चाहिए।

अदालत ने कहा कि अगर बिकनी पहनने में दिक्कत है तो बुर्कीनी (पूरे शरीर को ढकने वाला कपड़ा, जो तैराकी के लिए महिलाएं पहनती हैं) पहन कर कक्षाओं में हिस्सा लिया जाए।

अदालत ने कहा कि बुर्कीनी में उन्हें नहीं लगता कि किसी धर्म के लिए कोई दिक्कत होना चाहिए या फिर इस पर किसी को आपत्ति होनी चाहिए। अदालत ने कहा कि साथ में सभी क्रिया-कलापों में भाग लेने से बच्चों के बीच मिलाप बढ़ता है।

अदालत ने ये बातें 11 साल की एक मुसलमान छात्रा के परिवार की ओर से दायर एक मामले की सुनवाई के दौरान कही गईं। परिवार ने कहा था कि मुसलमान लड़कियों को तैराकी की कक्षाओं से छूट दी जाए क्योंकि जो ड्रैस तैराकी के लिए पहननी होती है, वो इस्लाम में जायज नहीं ठहराई जा सकती।

जर्मनी में हालिया दिनों में बुर्के को लेकर भी बहस छिड़ी हुई है। जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल ने हाल ही में कहा है कि उनके देश में पूरी तरह से चेहरा ढकने का कोई रिवाज नहीं है।

एंजेला ने कहा कि जर्मनी में अगर मुस्‍लिम महिलाएं बुर्का पहनती हैं तो इस पर विचार किया जाएगा। माना जा रहा है कि जर्मनी में बुर्के पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है।

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