पाकिस्तान में अभी भी टल सकते हैं आम चुनाव, सेना के करीबी मौलाना फजलूर रहमान का दावा, ये देश है या सर्कस?

Pakistan Election: पाकिस्तान में 8 फरवरी को आम चुनाव होने की तारीख तय की गई है और चुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया भी खत्म हो चुकी है, लेकिन जिन्ना के देश में वाकई चुनाव होंगे या नहीं, इसपर सस्पेंस बना हुआ है।

जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम-फजल के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने सोमवार को देश में आम चुनाव कराने के लिए शांतिपूर्ण माहौल सुनिश्चित करने की जरूरत पर जोर दिया, लेकिन उन्होंने कहा, कि पाकिस्तान में तय समय पर चुनाव होंगे या नहीं, ये अभी तय नहीं है और चुनाव टल भी सकते हैं।

pakistan election

मौलाना फजलुर रहमान ने कहा, कि उन्हें नहीं लगता कि 8 फरवरी को चुनाव होंगे, क्योंकि देश की सुरक्षा स्थिति चुनाव के लिए उपयुक्त नहीं है।

मौलाना फजलुर रहमान का यह बयान उस वक्त आया है, जब करीब 24 घंटे पहले ही उनके काफिले पर डेरा इस्माइल खान में हमला किया गया।

आपको बता दें, कि मौलाना फजलुर रहमान पाकिस्तान के बड़े नेता हैं और इमरान खान की जब पाकिस्तान में सरकार थी, तो उन्होंने ही विपक्षी नेताओं को एकजुट कर 'महागठबंधन' का निर्माण किया था, जिसने बाद में इमरान खान को सत्ता से बाहर कर दिया।

पाकिस्तान में चुनाव के बाद जो भी प्रधानमंत्री बनेगा, वो बिना मौलाना फजलुर रहमान की इजाजत के नहीं बन पाएगा। मौलाना फजलुर रहमान के बारे में कहा जाता है, कि वो पाकिस्तानी सेना के प्यादा हैं और किसी सरकार के खिलाफ अगर प्रेशर बनानी हो, तो मौलाना फजलुर रहमान ही भीड़ जुटाने का काम करते हैं।

हमले के बाद उनकी पार्टी ने कहा, कि अनुभवी राजनेता के काफिले पर यारिक इंटरचेंज पर कई तरफ से गोलीबारी की गई, लेकिन यह भी कहा, कि सौभाग्य से, जेयूआई-एफ अमीर उस समय वाहनों में मौजूद नहीं थे।

हालांकि, चुनाव को आगे बढ़ाने की मौलाना फजल की बार-बार की गई मांग के जवाब में, पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के प्रवक्ता फैसल करीम कुंडी ने कहा, कि जेयूआई-एफ प्रमुख चुनाव से "भागना" चाह रहे हैं।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान फजल ने कहा, कि उनकी पार्टी के नेतृत्व पर वजीरिस्तान और टैंक में भी हमला हुआ है, उन्होंने बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा (केपी) में सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है।

फज़ल लगातार अंतरिम सरकार और पाकिस्तान चुनाव आयोग (ईसीपी) से कानून और व्यवस्था की स्थिति सुनिश्चित करने के लिए कह रहे हैं और इस बात पर भी जोर देते रहे हैं कि यह चुनाव कराने का सही समय नहीं है।

पूर्व सांसद ने सोमवार को डीआई खान में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, "कल (रविवार) की घटना सुरक्षा स्थिति पर सवाल उठाती है।" उन्होंने कहा, "अगर चुनाव में कुछ दिनों की देरी होती है तो यह कोई बड़ा मुद्दा नहीं होगा।"

आतंकवादियों का अखाड़ा बना पाकिस्तान

आपको बता दें, कि आंतरिक राजनीतिक संघर्षों, सामाजिक आर्थिक असमानताओं, क्षेत्रीय अस्थिरता और अफगानिस्तान से सटे सीमावर्ती क्षेत्रों में सक्रिय आतंकवादी समूहों के साथ बढ़ते तनाव के बीच, पाकिस्तान वर्ष 2023 में आतंकवाद और हिंसा का अखाड़ा बना रहा।

हालांकि, जेयूआई-एफ को छोड़कर कोई भी प्रमुख राजनीतिक दल चुनाव में देरी की मांग नहीं कर रहा है। पीपीपी और पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) रैलियां कर रहे हैं और अपने घोषणापत्र की घोषणा करने के लिए भी तैयार हैं।

लेकिन, ऐसा कहा जा रहा है, कि मौलाना फजलुर रहमान, चुनाव में देरी होने की बात सेना की चाल के मुताबिक ही कर रहे हैं, ताकि हर राजनीतिक पार्टी को संदेश दिया जा सके, कि देश में चुनाव को अभी भी रोका जा सकता है। कई मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है, कि पाकिस्तान में सेना की नजर फिर से सत्ता पर कब्जा करने की है और इसके लिए कानून व्यवस्था, आतंकवाद और आर्थिक संकट को मुद्दा बनाया जा सकता है।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+