साल 2015 में पाकिस्तान से भारत लाई गईं गीता को अब जाकर मिला अपना असली परिवार

पाकिस्तान में फंसीं गीता जिन्हें भारत सरकार के प्रयासों से साल 2015 में भारत वापस लाया गया था, को पूरे 5 साल बाद अपना परिवार मिल गया है।

इस्लामाबाद। पाकिस्तान में फंसीं गीता जिन्हें भारत सरकार के प्रयासों से साल 2015 में भारत वापस लाया गया था, को पूरे 5 साल बाद अपना परिवार मिल गया है। पाकिस्तान के प्रसिद्ध अखबार 'द डॉन' ने एक ट्रस्ट का हवाला देकर इस बात की पुष्टि की है। दरअसल गीता एक भारतीय महिला हैं, जो बोलने और सुनने में असमर्थ हैं। वह बचपन में पाकिस्तान में फंस गई थीं और लाख कोशिशों के बावजूद भारत नहीं लौट सकीं। साल 2015 में सुषमा स्वराज के विदेश मंत्री रहते हुए उन्हें 12 साल बाद पाकिस्तान से भारत लाया गया था।

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गीता को लेकर पाकिस्तान के अखबार ने ईधी नामक ट्रस्ट के हवाले से खबर दी है कि उन्हें महाराष्ट्र में अपना परिवार मिल चुका है और अब वह अपने परिवार के साथ रह रही हैं।

द डॉन ने लिखा कि गीता भारत जाने के बाद से लगातार पाकिस्तान के 'ईधी' नामक कल्याणकारी संगठन के संपर्क में थीं और उन्होंने हाल ही में संगठन को बताया कि उन्हें भारत जाने के 5 साल बाद अपना परिवार मिल गया है।

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अखबार लिखता है कि स्वर्गीय अब्दुल सत्तार ईधी की पत्नी बिलकीस ईधी इस विश्व प्रसिद्ध 'ईधी वेलफेयर ट्रस्ट' को चलाती हैं। उनके गीता से अच्छे संबंध थे। उन्होंने ही अखबार को बताया कि गीता को उनका असली परिवार मिल गया है और वह महाराष्ट्र में अपनी असली मां के साथ रह रही हैं। बिलकीस ने अखबार को बताया, 'वह (गीता) मेरे संपर्क में थी और इसी सप्ताह उन्होंने अपनी असली मां से मिलने की अच्छी खबर सुनाई।'

जब पीटीआई ने बीलकीस से संपर्क किया तो उन्होंने बताया कि गीता की असली मां का नाम राधा वाघमारे है और वह महाराष्ट्र के नायगांव में रहती हैं। मालूम हो की गीता बचपन में पाकिस्तान में फंस गई थीं और फिर भारत वापस नहीं आ पाई थीं। बीलकीस ने उन्हें कराची के रेलवे स्टेशन पर पाया और 12 साल तक उन्हें अपने पास रखा। वह ईधी नाम के इस ट्रस्ट में रहीं जहां उन्हें फातिमा नाम दिया गया। बीलकीस ने कहा, कि जब उन्हें पता चला कि वह हिंदु हैं तो उन्होंने उसका ना गीता रख दिया। वह बोलने और सुनने में असमर्थ थी तो हम उसे सांकेतिक भाषा में बात करते थे।

साल 2015 में उनकी कहानी भारत की तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को पता चली और वह गीता को पाकिस्तान से वापस भारत लाईं, लेकिन लाख प्रयासों के बाद भी गीता को अबतक अपना असली परिवार नहीं मिला था। लेकिन बीलकीस के मुताबिक अब जाकर गीता को अपना असली परिवार मिल गया है।

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