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GE-F414 Engine: इंडिया-US में होगी जेट इंजन निर्माण की डील, इंडियन लड़ाकू विमानों की कैसे बढ़ेगी ताकत, समझिए

GE-F414 Engine Deal: जेट इंजन के भारत में निर्माण की कल्पना करना ही अभी तक असंभव था, लेकिन अब से कुछ सालों के बाद भारत, दुनिया का पांचवा देश बन जाएगा, जो लड़ाकू विमानों के इंजन का निर्माण करेगा। ये एक असंभव कल्पना थी, जो अब सच साबित हो रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संयुक्त राज्य अमेरिका की चल रही आधिकारिक यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच कम से कम 11 महत्वपूर्ण जेट इंजन टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की सुविधा के लिए एक ऐतिहासिक समझौते की घोषणा होने की पूरी संभावना है। दोनों देशों के बीच ये डील पहले ही हो चुकी है, अब बस बाइडेन और मोदी मिलकर आधिकारिक तौर पर इसका ऐलान करेंगे।

GE-F414 Engine

भारत में बनेंगे जेट इंजन

दोनों देशों के बीच इस जेट इंजन डील होने के बाद बाद भारत के स्वदेशी लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एलसीए) तेजस एमके2 के लिए जनरल इंजन के एफ414 इंजन के भारत में निर्माण का रास्ता खुल जाएगा। अमेरिका से लाइसेंस लेकर भारत अपने इन विमानों के इंजन का निर्माण भारत में ही कर पाएगा। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका की जनरल इलेक्ट्रिक (जीई) और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) के बीच इस सौदे की घोषणा की जाएगी।

रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों देशों के बीच जेट इंजन के भारत में निर्माण को लेकर डील होने के बाद भारत में प्लांट लगाने का काम शुरू हो जाएगा। हालांकि, प्लांट लगाने का काम कब शुरू होगा, फिलहाल इसकी जानकारी नहीं दी गई है। लेकिन, अभी तक की जानकारी के मुताबिक, डील के बाद हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड को जेट इंजन बनाने की टेक्नोलॉजी दे दी जाएगी और उसके बाद इंजन खरीदने के लिए हिन्दुस्तान को दुनिया के किसी भी देश के सामने हाथ फैलाने की जरूरत नहीं होगी।

HAL को टेक्नोलॉजी देगा अमेरिका

रॉयटर्स के मुताबिक, अमेरिका की हथियार कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक (जीई) ने एचएएल को टेक्नोलॉजी ट्रांसफर करने की पेशकश की है, जो इंजनों के लिए एक लाइसेंस प्राप्त निर्माता के रूप में कार्य करेगा। इस संबंध में जानकारी रखन वाले एक व्यक्ति के मुताबिक, भारत ने ज्यादा से ज्यादा टेक्नोलॉजी ट्रांसफर करने की मांग की है। वहीं, भारत स्वदेशी विमान इंजन उत्पादन के लिए आवश्यक टेक्नोलॉजी प्राप्त करने के लिए उत्सुक है।

फिलहाल, भारत के पास लड़ाकू विमानों को घरेलू स्तर पर बनाने की क्षमता है, लेकिन उन्हें चलाने के लिए आवश्यक इंजनों का उत्पादन करने की क्षमता का अभाव है। वहीं, एचएएल भारतीय वायु सेना के लिए 83 हल्के लड़ाकू विमानों के उत्पादन के लिए हल्के जीई इंजन का उपयोग कर रहा है। हालांकि, भारत अगले 20 सालों में अपनी वायु सेना और नौसेना के लिए 350 से ज्यादा लड़ाकू जेट विमानों का निर्माण करने की योजना बना रहा है, जिसमें संभावित रूप से जीई 414 इंजन का उपयोग किया जाएगा।

GE-F414 Engine क्या है?

GE-F414 Engine अपनी दमदार क्षमता के लिए पूरी दुनिया में जानी जाती है और अमेरिका की वायुसेना के साथ साथ अमेरिका की नौसेना भी GE-F414 Engine का इस्तेमाल पिछले 30 सालों से ज्यादा वक्त से कर रही है। GE-F414 Engine, जनरल इलेक्ट्रिक कंपनी के फाइटर जेट इंजन के सुइट का हिस्सा है।

जनरल इलेक्ट्रिक कंपनी की वेबसाइट के मुताबिक, पिछले 30 सालों इस कंपनी ने करीब 1600 GE-F414 Engines की डिलीवरी की है। वहीं, इस इंजन की विश्वसनीयता और ताकत का अंदाजा इसी बात से लगा सकते हैं, ये इंजन जिन फाइटर जेट्स में लगे हैं, उनमें से हर एक फाइटर जेट, 50 लाख घंटे से ज्यादा की उड़ान भर चुकी है।

भारत समेत इस वक्त दुनिया के 8 देश हैं, जहां GE-F414 इंजन का इस्तेमाल किया जाता है। इस इंजन को बनाने वाली कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक का दावा है, कि ये इंजन नये कोरियन प्लेटफॉर्म KF-X को भी पावर दे सकता है।

वहीं, भारत के संदर्भ में बात करें, तो जेट इंजन का इस्तेमाल भारत अपनी नौसेना और वायुसेना के लिए कर सकती है और इनके लिए फाइटर जेट्स बनाना काफी आसान हो जाएगा। एलसीए तेजस-एमके2 से लेकर AMCA फाइटर जेट्स के इंजन का भी निर्माण अब भारत में संभव होगा।

फिलहाल दुनिया के सिर्फ चार ही देश अमेरिका, रूस, चीन और इंग्लैंड हैं, जो फाइटर जेट्स की इंजन बनाने की क्षमता रखते हैं, लेकिन इस डील के बाद भारत भी इस इलिट क्लब में शामिल हो जाएगा। हालाकि, भारत पहले ही स्वदेशी टेक्नोलॉजी के साथ क्रायोजेनिक इंजन का निर्माण कर चुका है, लेकिन अभी तक किसी फाइटर जेट में उसका इस्तेमाल नहीं किया गया है।

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