मोदी ने अडानी को परियोजना देने के लिए राजपक्षे पर दबाव डाला, अधिकारी का दावा, फिर मांगी माफी
श्रीलंका में एक अडानी परियोजना एक बार फिर से विवाद के केंद्र में है।
कोलंबो, 12 जूनः श्रीलंका में एक अडानी परियोजना एक बार फिर से विवाद के केंद्र में है। सीलोन बिजली बोर्ड (सीईबी) के एक शीर्ष अधिकारी ने एक संसदीय पैनल को बताया कि उद्योगपति गौतम अडानी को एक 500 मेगावाट की पवन ऊर्जा परियोजना देने के लिए भारत के नरेंद्र मोदी ने श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे पर दबाव डाला था। यह बात उन्हें स्वंय गोटाबाया राजपक्षे ने बताया था। वहीं, राजपक्षे ने इस दावे को लेकर किसी भी संस्थान को परियोजना देने के लिए कहने से इनकार किया। अब इसे लेकर अधिकारी ने माफी मांगी है।

बयान लिया वापस
सीलोन इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड के अध्यक्ष एम.सी.सी फर्डिनेंडो ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर दिए एक बयान के लिए बिना शर्त माफी मांग ली है। एक बयान जारी कर उन्होंने कहा है कि संसदीय पैनल की मीटिंग में वह भावुक हो गए थे, जिस कारण उन्होंने झूठ बोल दिया। अपने सनसनीखेज दावे के दो दिन बाद दिए गए नए बयान में उन्होंने कहा कि पीएम मोदी को लेकर उन्होंने जो कहा है वह उसे वापस ले रहे हैं।

मोदी के कारण मिला प्रोजेक्ट!
10 जून को सीलोन इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड के अध्यक्ष एम.सी.सी फर्डिनेंडो ने दावा किया था कि पवन ऊर्जा का एक टेंडर अडानी ग्रुप को पीएम मोदी के जोर देने पर मिला। फर्डिनेंडो ने कहा था कि राष्ट्रपति ने उन्हें 24 नवंबर 2021 को एक बैठक में बुलाया। इस दौरान प्रेसीडेंट ने उनसे कहा कि नरेंद्र मोदी मुझपर अडानी को एक परियोजना सौंपने के लिए दबाव बना रहे हैं। इसके 2 दिन बाद फर्डिनेंडो ने यू टर्न मारते हुए कहा कि उन्होंने गलती से ऐसी टिप्पणी कर दी थी। बताते चलें कि गौतम अडानी ने अक्टूबर 2021 में श्रीलंका का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे और तत्कालीन प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे से मुलाकात भी की थी।

अडानी के कारण कानून में बदलाव
श्रीलंकाई संसद में विद्युत संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान विपक्ष और कुछ ट्रेड यूनियनों की ओर से अडानी ग्रुप का विरोध देखने को मिला। विपक्ष का आरोप है कि अडानी ग्रुप के सहयोग से उत्तरी तट पर 500 मेगावॉट का पवन बिजली संयंत्र लगाने के लिए सरकार से सरकार के बीच करार 1989 के कानून में संशोधन की अहम वजह है।

कानून में संशोधन
बताते चलें कि इससे पहले गुरुवार को संसद में विपक्ष ने आरोप लगाया कि अडानी समूह का सहयोग करने के लिए सरकार ने उत्तरी तट पर 500 मेगावॉट का पवन बिजली संयंत्र लगाने के लिए 1989 के कानून में संशोधन किया है। इस विधेयक का सार्वजनिक क्षेत्र की सिलोन इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड (सीईबी) के व्यापार संगठनों द्वारा कड़ा विरोध किया जा रहा है। सीईबी के इंजीनियरों ने चेतावनी दी है कि अगर ये संशोधन कानून में बदलते हैं तो वे हड़ताल पर चले जाएंगे।












Click it and Unblock the Notifications