G7 Summit 2026: फ्रांस में सजा महाशक्तियों का दरबार, पीएम मोदी पर क्यों टिकी है दुनिया की नजर?
G7 summit 2026: फ्रांस के खूबसूरत शहर एवियन-लेस-बैंस में इस बार G7 शिखर सम्मेलन 2026 चल रहा है। दुनिया की नजरें एक बार फिर भारत पर टिक गई हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्लोवाकिया की यात्रा खत्म करके यहां पहुंचे हैं। यह मौका भारत के लिए इसलिए भी अहम है क्योंकि बतौर पार्टनर देश यह भारत की 13वीं भागीदारी है और पीएम मोदी लगातार सातवीं बार इस मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
फ्रांस की मेजबानी में हो रहे इस शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी के अलावा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की सहित दुनिया के कई प्रभावशाली नेता जुट रहे हैं।

दुनिया के सात सबसे अमीर और ताकतवर लोकतांत्रिक देशों की यह बैठक ऐसे समय में हो रही है, जब यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट का तनाव और आर्थिक संरक्षणवाद (Economic Protectionism) ने पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया है।
G7 के कौन हैं वो स्थायी सदस्य 7 देश?
जी-7 के स्थायी सदस्यों- अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली और जापान के अलावा यूरोपीय संघ भी इस मंच पर मौजूद रहेगा। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन ने इस बार भारत, मिस्र, कतर और यूक्रेन जैसे गैर-जी-7 देशों को विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित कर संवाद के दायरे को और बढ़ाने का प्रयास किया गया है।

पीएम मोदी की किन शीर्ष नेताओं से होगी सीधी बातचीत?
इस दो दिन के दौरे में पीएम मोदी की कई बड़े नेताओं से सीधी बातचीत होने वाली है। इनमें ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी शामिल हैं। इन बैठकों में ट्रेड, सुरक्षा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की स्थिरता जैसे मुद्दों पर बात होने की उम्मीद है।

क्यों चर्चा में मोदी-ट्रंप की मुलाकात?
इस पूरे समिट का सबसे बड़ा आकर्षण पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की संभावित मुलाकात मानी जा रही है। करीब डेढ़ साल बाद दोनों नेताओं के बीच सीधी बातचीत होगी। माना जा रहा है कि इसमें ट्रेड टैरिफ, सुरक्षा और आपसी रिश्तों को फिर से मजबूत करने जैसे मुद्दे उठ सकते हैं। ये वार्ता ऐसे समय हो रही है जब दुनिया कई संकटों से गुजर रही है-युद्ध, ट्रेड वॉर और आर्थिक अस्थिरता है। ऐसे में भारत की भूमिका और ज्यादा अहम हो गई है। G7 जैसे मंच पर भारत की मौजूदगी इसका साफ प्रमाण है।
G7 Summit 2026 की 7 बड़ी बातें
यूक्रेन युद्ध सबसे बड़ा मुद्दा
G7 सम्मेलन में रूस-यूक्रेन युद्ध पर सबसे ज्यादा चर्चा होगी। अमेरिका और यूरोपीय देशों के बीच इसे लेकर अलग-अलग रणनीति देखने को मिल सकती है।समिट में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की भी मौजूद हैं, जिससे रूस-यूक्रेन युद्ध पर चर्चा और तेज हो गई है। हाल के हमलों के बाद शांति की कोशिशों पर फिर से जोर बढ़ा है, लेकिन रूस की गैरमौजूदगी से बातचीत आसान नहीं मानी जा रही।
AI और ग्लोबल इकोनॉमी पर भारत का फोकस
इस समिट में पीएम मोदी AI, आर्थिक विकास और ग्लोबल सहयोग जैसे मुद्दों पर भारत का नजरिया रखेंगे। भारत चाहता है कि टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल सुरक्षित और सभी देशों के फायदे के लिए हो।
ट्रेड टेंशन और ग्लोबल इकोनॉमी की चुनौतियां
G7 बैठक में व्यापारिक तनाव भी साफ दिख रहा है। अमेरिका और यूरोप के बीच डिजिटल टैक्स और टैरिफ को लेकर मतभेद हैं। वहीं चीन के सस्ते निर्यात और ग्लोबल मार्केट पर उसके असर को लेकर भी चर्चा हो रही है।
ट्रंप बनाम यूरोप
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप युद्ध खत्म करने के लिए जल्द बातचीत चाहते हैं, जबकि यूरोपीय देश यूक्रेन को सैन्य और आर्थिक मदद जारी रखने के पक्ष में हैं।
ईरान पर भी होगी अहम चर्चा
अमेरिका-ईरान तनाव और मध्य पूर्व की स्थिति पर नेताओं के बीच मंथन होगा। तेल बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसके असर पर भी बात होगी।
टैरिफ और ट्रेड वॉर पर टकराव
अमेरिका द्वारा कई देशों पर नए टैरिफ लगाने की चेतावनी के बीच व्यापारिक विवाद सम्मेलन का अहम मुद्दा रहेगा। भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर भी नजर रहेगी।
चीन की बढ़ती ताकत पर चिंता
हालांकि चीन सम्मेलन में शामिल नहीं है, लेकिन उसकी आर्थिक नीतियां, सप्लाई चेन और रेयर अर्थ मिनरल्स पर बढ़ते नियंत्रण को लेकर चर्चा होगी।
AI कंपनियों की भी एंट्री
ओपनएआई, गूगल, एंथ्रोपिक और मिस्ट्रल AI जैसी कंपनियों के प्रमुख भी सम्मेलन से जुड़े कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। AI रेगुलेशन और टेक्नोलॉजी सुरक्षा पर विशेष फोकस रहेगा।
क्यों अहम है यह सम्मेलन?
G7 Summit 2026 सिर्फ एक वार्षिक बैठक नहीं, बल्कि यूक्रेन युद्ध, वैश्विक व्यापार, चीन की चुनौती, AI और भारत समेत उभरती अर्थव्यवस्थाओं की भूमिका तय करने वाला बड़ा वैश्विक मंच बन गया है। दुनिया की नजर अब यहां होने वाले फैसलों पर टिकी है। 'मेरी और ट्रंप की राय एक नहीं', अमेरिका-ईरान डील पर क्यों आगबबूला हुए नेतन्याहू?













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