G20 Summit: विश्वशक्ति बनकर इंडोनेशिया जाएगा भारत, पीएम मोदी से मिलने के लिए क्यों बेताब हैं बाइडेन?

अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन ने शुक्रवार को कहा है कि, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन इस साल जी20 शिखर सम्मेलन में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने के लिए काफी उत्सुक हैं।

G20 Summit 2022: धीरे धीरे भारत, विश्व के उन शक्तिशाली देशों की लिस्ट में शामिल होते जा रहा है, जो जियो पॉलिटिक्स को नियंत्रित करते हैं। 15 और 16 नवंबर को इंडोनेशिया के बाली शहर में होने वाले जी20 शिखर सम्मेलन में भारत इसी हैसियत के साथ शिरकत करने जा रहा है। दुनिया की 80 प्रतिशत अर्थव्यवस्था वाले देशों के संगठन जी20 में हिस्सा लेने के लिए भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी इंडोनेशिया के बाली शहर में जाएंगे, जहां चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ साथ अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन भी मौजूद होंगे। आइये जानते हैं, कि आखिर हम क्यों कह रहे हैं, कि भारत धीरे-धीरे वैश्विक शक्ति बनता जा रहा है।

मोदी से मिलने के लिए व्याकुल बाइडेन

मोदी से मिलने के लिए व्याकुल बाइडेन

अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन ने शुक्रवार को कहा है कि, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन इस साल जी20 शिखर सम्मेलन में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने के लिए काफी उत्सुक हैं। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब जेक सुलिवन से पूछा गया, कि क्या भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व्हाइट हाउस का दौरा भी करेंगे, तो उन्होंने कहा कि, 'निश्चित तौर पर। भारत अगले साल होने वाले जी20 सम्मेलन का अध्यक्ष भी है और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन निश्चित तौर पर जी20 में भागीदार बनने का इरादा रखते हैं।' वहीं, उन्होंने आगे कहा कि, "राष्ट्रपति बाइडेन के पदभार ग्रहण करने के बाद से पीएम मोदी पहले ही व्हाइट हाउस आ चुके हैं"। उन्होंने कहा कि, दोनों नेताओं को "व्यक्तिगत रूप से बात करने और फोन पर बात करने या वीडियो कॉन्फ्रेंस के दौरान जुड़ने और बात करने का कई अवसर मिला है। जब आप यह सब जोड़ते हैं, तो पता चलता है, कि दोनों नेताओं के बीच एक बहुत ही व्यावहारिक और प्रोडक्टिव संबंध है, जो एक कॉमन गोल की तरफ देखते हैं। कई महत्वपूर्ण मुद्दे हैं, और वास्तव में अमेरिका-भारत साझेदारी को मजबूत करने के लिए काम किया गया है।"

दोनों देशों के संबंध अहम

दोनों देशों के संबंध अहम

उन्होंने कहा कि, "राष्ट्रपति बाइडेन इस साल जी20 शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी से मिलने के लिए काफी उत्सुक हैं और साथ ही हम अगले साल की भी यही उम्मीद कर रहे हैं।" इससे पहले अमेरिकी ट्रेजरी सचिव जेनेट येलेन, जो बाइडेन प्रशासन की शीर्ष आर्थिक राजनयिक हैं, उन्होंने जी20 शिखर सम्मेलन से ठीक पहले भारत की यात्रा की है और उन्होंने भारतीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात की है। इस दौरान कहा है, कि रूस और चीन से दुश्मनी के बीच भारत अमेरिका का काफी अहम साझेदार है। वहीं, बाइडेन प्रशासन ने आखिरकार इस बात को मानते हुए अमेरिका को भारत का करीबी सहयोगी बनाने की बात के लिए हामी भर दी है, कि अमेरिका के लिए भारत ही एशिया में सबसे अच्छा विकल्प है। अमेरिका ने अब जाकर ये साफ कर दिया है, कि वह चाहता है कि भारत, अमेरिका के आर्थिक सहयोगियों की कक्षा में हो।

जी20 संगठन क्या है?

जी20 संगठन क्या है?

आपको बता दें कि, दुनिया की शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं के नेता अगले सप्ताह इंडोनेशिया के बाली द्वीप पर एक G20 शिखर सम्मेलन के लिए इकट्ठा हो रहे हैं, जिसमें यूक्रेन संकट सबसे अहम मुद्दा रहने वाला है। 1990 के दशक में पूरी दुनिया आर्थिक मंदी में फंस गई थी और फिर जी20 का गठन करने की मांग दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देशों के बीच उठी और साल 1999 में जी20 का गठन कर दिया गया, जिसकी पृष्टभूमि पूरी तरह से आने वाले वक्त में वैश्विक वित्तीय संकट में फंसने से बचने और अगर फंसे, तो जल्द निकलने के लिए प्लानिंग तैयार करना था। आर्थिक संकट ने खासकर पूर्वी एशिया और दक्षिण पूर्व एशिया को ज्यादा प्रभावित किया था, लिहाजा, इसका उद्देश्य मध्यम आय वाले देशों को शामिल करके वैश्विक वित्तीय स्थिरता को सुरक्षित बनाना तय किया गया। साथ में, G20 देशों में दुनिया की 60 प्रतिशत आबादी, वैश्विक जीडीपी का 80 प्रतिशत और वैश्विक व्यापार का 75 प्रतिशत शामिल है।

कौन कौन हैं जी20 के सदस्य?

कौन कौन हैं जी20 के सदस्य?

इसके प्रमुख सदस्य हैं, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, चीन, फ्रांस, जर्मनी, भारत, जापान, कोरिया गणराज्य, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, तुर्की, यूके, अमेरिका और यूरोपीय संघ शामिल हैं। वहीं, स्पेन को स्थायी अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया है। जी20 की अध्यक्षता हर साल अलग अलग देशों को मिलती रहती है और अगला अध्यक्ष भारत बनने वाला देश, पुराने अध्यक्ष और अगले अध्यक्ष के साथ मिलकर जी20 का एजेंडा तय तय करता है, ताकि उसकी निरंतरता बनी रहे, जिसे 'ट्रोइका' कहा जाता है और इस वक्त इटली, इंडोनेशिया और भारत ट्रोइका देश हैं। ऐसा पहली बार हो रहा है, जब भारत जी20 देशों की अध्यक्षता करेगा, लिहाजा भारत के लिए इस बार का जी20 शिखर सम्मेलन काफी ज्यादा अहम होने वाला है। भारत को जी20 शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता मिली है, जो इस बात को साफ तौर पर जाहिर करता है, कि अब भारत वैश्विक शक्तियों की लिस्ट में शामिल हो चुका है।

भारत में जी20 सम्मेलन पर विवाद

भारत में जी20 सम्मेलन पर विवाद

आपको बता दें कि, बतौर अध्यक्ष देश भारत ने अगला जी20 शिखर सम्मेलन कश्मीर में करवाने का फैसला किया है और भारत के इस कदम से पाकिस्तान बौखला गया है। भारत की कोशिश कश्मीर में जी20 शिखर सम्मेलन करवाकर कश्मीर से जुड़े तमाम विवादों को एक ही बार में खत्म करने की है और पाकिस्तान जानता है, कि सफल जी20 शिखर सम्मेलन करवाने के साथ ही उसके हाथ से कश्मीर का मुद्दा हमेशा के लिए निकल जाएगा, लिहाजा पहले पाकिस्तान ने भारत के इस फैसले का विरोध किया और बाद में चीन ने पाकिस्तान के सुर में सुर मिलाना शुरू कर दिया। लेकिन, इसके बाद भी भारत ने अपना इरादा नहीं बदला है और कश्मीर में ही शिखर सम्मेलन का आयोजन कराने के फैसले पर अडिग है। वहीं, अमेरिकी एनएसए ने साफ तौर पर कहा है, कि अगले साल भी जो बाइडेन जी20 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे, लिहाजा जो बाइडेन भी कश्मीर जाएंगे। इसके साथ ही भारत से स्पेशल रिश्ता होने के चलते रूसी राष्ट्रपति पुतिन भी भारत का दौरा कर सकते हैं।

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