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Biofuel alliance: 3 साल में 500 अरब डॉलर का अवसर, G20 देशों के लिए IBA का अनुमान

G20 summit: बायोफ्यूल एलायंस (Biofuel alliance) अगले तीन वर्षों में 500 अरब अमेरिकी डॉलर के अवसर पैदा कर सकता है। यह अनुमान भारतीय बायोगैस एसोसिएशन (IBA) ने जाहिर किए हैं।

आईबीए के मुताबिक ग्लोबल बायोफ्यूल एलायंस जी20 देशों और पर्यावरण दोनों के लिए फायदेमंद वाली स्थिति हो सकती है। इसने एक शोध के आधार पर बताया है कि इसके माध्यम से जी20 देशों को आने वाले तीन वर्षों में 500 अरब डॉलर की संभावनाएं पैदा करने के मौके मिल सकते हैं।

g20 biofuel alliance opportunity

तीन वर्षों में 500 अरब डॉलर के अवसर की संभावनाएं-आईबीए
नई दिल्ली में हुए दो दिवसीय जी20 लीडर्स समिट को देखते हुए आईबीए के इस शोध की अहमियत बढ़ गढ़ गई है। इसमें कहा गया है कि ऊर्जा उत्पादन के अन्य विकल्पों की तुलना में कम निवेश की आवश्यकता और कच्चे माल की आसानी से उपलब्धता को देखते हुए अकेले बायोगैस से 200 अरब डॉलर के अवसर पैदा हो सकते हैं।

2016 में ही जी20 ने बनाई थी कार्य योजना
इसमें यह भी बताया गया है कि सिद्धांत रूप से बायोएनर्जी/बायोगैस में जीवाश्म ईंधन को पूरी तरह से बदलने की क्षमता है, खासकर परिवहन क्षेत्र को कार्बन से मुक्त करने की। 2016 में, जी20 ने रिन्यूएबल एनर्जी पर एक स्वैच्छिक कार्य योजना अपनाई थी, जिसमें सदस्यों ने अपने ऊर्जा मिश्रण में रिन्यूएबल एनर्जी की हिस्सेदारी बढ़ाने के प्रति प्रतिबद्धता जाहिर की थी।

भारत इस दिशा में बड़ी जिम्मेदारी निभा रहा है
भारत ने अपने कुल एनर्जी मिक्स में रिन्यूएबल एनर्जी का हिस्सा महत्वपूर्ण ढंग से बढ़ाया है और पिछले साल कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR)के हिसाब से यह मोटे तौर पर 22% की रफ्तार से बढ़ा था।

एक दशक में देश में 20 गुना बढ़ा है सौर ऊर्जा का उत्पादन
पिछले एक दशक में भारत ने सौर्य ऊर्जा का उत्पादन 20 गुना बढ़ाया है और अंतरराष्ट्रीय सोलर एलायंस की भी अगुवाई भारत ने ही की है। इस अवधि में सौर्य ऊर्जा और वायु ऊर्जा में मोटे तौर पर CAGR के आधार पर क्रमश: 38% और 30% बढ़ोतरी दर्ज की गई।

शुरू में 100 अरब डॉलर के निवेश की वकालत
इसमें यह भी कहा गया है कि इसके लिए शुरू में 100 अरब डॉलर के शुरुआती निवेश की आवश्यकता होगी ताकि बायोफ्यूल उद्योग को बढ़ावा मिले। अगले तीन वर्षों में प्रत्येक जी20 भागीदार को 5 अरब डॉलर। इसने बायोफ्यूल एलायंस की सफलता के लिए सदस्य देशों के बीच अनुकूल माहौल और तकनीकी साझेदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है।

बायोफ्यूल के फायदे
इसके फायदों का जिक्र करते हुए कहा गया है कि इससे ऊर्जा सुरक्ष बढ़ेगी और प्रत्येक देशों में रोजगार सृजन के अवसर पैदा होंगे। साथ ही साथ हवा की गुणवत्ता बेहतर होगी, जिससे स्वास्थ्य देखभाल पर खर्च होने वाले अरबों डॉलर की बचत हो सकती है। इसने कहा है कि जी20 एक शक्तिशाली फोरम है, जो बायो एनर्जी को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण रोल निभा सकता है।

भारत के लिए काफी संभावनाएं
भारत के नजरिए से इसमें और भी सकारात्मक अनुमान जताए गए हैं। इसके अनुसार नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के मुताबिक देश में बायोगैस और सीबीजी (कंप्रेस्ट बायो गैस) का मौजूदा उत्पादन 1151 मीट्रिक टन रोजाना है। लेकिन, अगर इस क्षेत्र को अगले कुछ वर्षों तक बढ़ावा दिया जाता है तो किसी भी सूरत में 2025 तक ही यह बढ़कर 1750 मीट्रिक टन प्रतिदिन हो सकता है।

इसमें कहा गया है कि देश में बायोमास की उपलब्धता के पूर्ण दोहन से कच्चे तेल का एक-तिहाई आयात कम करने की क्षमता है। एक बायोगैस प्लांट पर औसतन 42.5 लाख डॉलर की लागत आती है। सरकार का लक्ष्य 5,000 बायोगैस प्लांट बनाने का है। ऐसे में 200 अरब अमेरिकी डॉलर देश के लिए एक बड़ा अवसर साबित हो सकता है। (इनपुट-पीटीआई)

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