Fuel Price Hike: यूरोप में हवाई सफर पर लगने वाला है 'ताला'? लुफ्थांसा की 20 हजार फ्लाइट्स कैंसिल

Fuel Price Hike: ईरान संकट और ईंधन की बढ़ती कीमतों ने विमानन जगत (Aviation Industry) में उथल-पुथल मचा दी है। जर्मनी की मशहूर एयरलाइन लुफ्थांसा ने अपने परिचालन में बड़ी कटौती करते हुए मई से अक्टूबर के बीच करीब 20 हजार उड़ानें रद्द करने का फैसला लिया है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव के कारण यूरोप में जेट फ्यूल के दाम लगभग दोगुने हो गए हैं, जिससे एयरलाइंस पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है। यह संकट सिर्फ जर्मनी तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया की एयरलाइंस अब अपने रूट कम करने और टिकटों के दाम बढ़ाने पर मजबूर हैं।

Fuel Price Hike

Iran war impact on Aviation: लुफ्थांसा का बड़ा फैसला और कटौती

ईंधन बचाने के लिए लुफ्थांसा हर दिन करीब 120 उड़ानें कम कर रही है। कंपनी का लक्ष्य 40 हजार टन जेट फ्यूल बचाना है। फ्रैंकफर्ट और म्यूनिख जैसे बड़े शहरों से घाटे वाले रूट बंद किए जा रहे हैं, जबकि ज्यूरिख और वियना जैसे केंद्रों से उड़ानें बढ़ाई जा रही हैं। इसके अलावा, कंपनी अपने बेड़े से पुराने और ज्यादा ईंधन खर्च करने वाले 6 बड़े विमानों को भी हटा रही है, ताकि बढ़ते खर्चों पर लगाम लगाई जा सके।

यूरोप में ईंधन का गहराता संकट

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) की चेतावनी ने यूरोप की चिंता बढ़ा दी है। फिलहाल यूरोप के पास केवल 6 हफ्तों का जेट फ्यूल बचा है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से तेल की सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई है। इस कमी से निपटने के लिए यूरोपीय देश अब अमेरिका से ईंधन मंगाने और विमानों में बाहर से ही ज्यादा तेल भरवाकर लाने (Tankering) जैसे विकल्पों पर विचार कर रहे हैं, ताकि गर्मियों के दौरान विमान सेवा पूरी तरह ठप न हो।

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वैश्विक एयरलाइंस पर बुरा असर

ईंधन संकट का असर पूरी दुनिया में दिख रहा है। अमेरिका की डेल्टा एयरलाइंस ने अपना नेटवर्क 3.5% घटा दिया है, वहीं कैथे पैसिफिक और एयर एशिया जैसी कंपनियां भी अपने रूट कम कर रही हैं। ब्रिटिश एयरवेज और वर्जिन अटलांटिक जैसी बड़ी कंपनियों ने माना है कि ईंधन महंगा होने से इस साल मुनाफा कमाना नामुमकिन जैसा है। ज्यादातर कंपनियों ने अब फ्यूल सरचार्ज लगा दिया है, जिससे एयरलाइन इंडस्ट्री को भारी वित्तीय नुकसान होने की आशंका है।

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यात्रियों की जेब और सफर पर प्रभाव

विमानों के टिकट महंगे होने का सीधा असर आम यात्रियों पर पड़ रहा है। चूंकि एयरलाइंस की कुल लागत में 40% तक हिस्सा ईंधन का होता है, इसलिए कीमतें बढ़ते ही सफर महंगा हो गया है। कई सीधी उड़ानें (Direct Flights) बंद होने से यात्रियों को अब कनेक्टिंग फ्लाइट्स लेनी पड़ेंगी, जिससे यात्रा में समय ज्यादा लगेगा और परेशानी बढ़ेगी। कम उड़ानें होने के कारण पीक सीजन में टिकट मिलना भी अब पहले के मुकाबले काफी मुश्किल हो जाएगा।

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