गधों का देश बनने के कगार पर पाकिस्तान! इस साल भी रिकॉर्ड संख्या में बढ़े गधे, सरकार खुश
आंकड़ों से पता चला है कि पिछले कुछ वर्षों के दौरान गधों की आबादी लगातार बढ़ रही है क्योंकि 2019-2020 में गधों की संख्या 5.5 मिलियन और 2020-21 में 5.6 मिलियन थी।
इस्लामाबाद, 10 जून : पाकिस्तान में आर्थिक संकट चरम पर है, राजनीतिक अस्थिरता भी जारी है। वहीं, दूसर तरफ खबर मिली है कि, देश में गधों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। जारी आर्थिक सर्वेक्षण (पीईएस) 2021-22 के अनुसार, पिछले वित्त वर्ष के दौरान गधों की आबादी बढ़कर 50 लाख ( 5.7 मिलियन) से अधिक हो गई है। गांवों में 80 लाख से अधिक ग्रामिण परिवार पशुओं से होने वाले आय पर निर्भर हैं। इससे उन्हें आर्थिक सहायता मिल रही है। इस लिहाज से आर्थिक संकट के दौर में पशुधन पाकिस्तान के लिए वरदान साबित हो रहा है।

गधों की आबादी में बढोतरी
आंकड़ों से पता चला है कि पिछले कुछ वर्षों के दौरान गधों की आबादी लगातार बढ़ रही है क्योंकि 2019-2020 में गधों की संख्या 5.5 मिलियन और 2020-21 में 5.6 मिलियन थी। वहीं, पाकिस्तान में मवेशियों की आबादी बढ़कर 53.4 मिलियन, भैंस की 43.7 मिलियन, भेड़ की 31.9 मिलियन और बकरियों की संख्या 31.9 मिलियन हो गई है।
कितने घोड़े और कितने खच्चर हैं यहां
आंकड़ों से पता चलता है कि देश में 1.1 मिलियन ऊंट, 0.4 मिलियन घोड़े और 0.2 मिलियन खच्चर थे। उल्लेखनीय है कि 2017-18 के बाद से इन नंबरों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। 2021 से 22 तक पशुधन ने कृषि मूल्य वर्धित लगभग 61.9% और राष्ट्रीय सकल घरेलू उत्पाद में 14.0% का योगदान दिया।
पशुपालन आय का प्रमुख श्रोत
बता दें कि, आर्थिक दृष्टिकोण से पाकिस्तान का ग्रामिण इलाकों में पशुपालन पर ही निर्भर है। गांवों में 80 लाख से अधिक ग्रामिण परिवार पशुधन को ही व्यापार का साधन बनाए हुए हैं। इसलिए गांव के लोग पशुधन उत्पादन को ही व्यापार का प्रमुख जरिया मानते हैं। बता दें कि, 35 से 40 फीसदी की आय ग्रामिणों को इसी क्षेत्र से प्राप्त होते हैं।
सरकार का समग्र पशुधन विकास रणनीति
पशुधन का सकल मूल्यवर्धन 5,269 अरब रुपये (2020-21) से बढ़कर 5,441 अरब रुपये (2021-22) हो गया है, जो 3.26% की वृद्धि दर्शाता है। दस्तावेज़ में कहा गया है कि सरकार ने देश में आर्थिक विकास, खाद्य सुरक्षा और गरीबी उन्मूलन के लिए इस क्षेत्र पर अपना ध्यान केंद्रित किया है। पाकिस्तान में आर्थिक संकट के बीच पशुधन से आय अर्जन एक बेहतरीन माध्यम बनता जा रहा है। इसके लिए सरकार समग्र पशुधन विकास रणनीति के तहत इस क्षेत्र को बढ़ावा देने का काम कर रही है।
आर्थिक तंगी से छुटकारा मिलेगा!
पशुओं के माध्यम से होने वाले आय से देश के विकास को गति मिल सकती है, इसको देखते हुए नियामक उपायों का उद्देश्य पशु चिकित्सा स्वास्थ्य कवरेज, पशुपालन प्रथाओं, पशु प्रजनन प्रथाओं, कृत्रिम गर्भाधान सेवाओं, पशु आहार के लिए संतुलित राशन के उपयोग और पशुधन रोगों को नियंत्रित करके प्रति इकाई पशु उत्पादकता में वृद्धि करना है।












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