फ्रांस भुगत रहा अपनी गलती की सजा.. इस्लामिक नेता ने कहा, कट्टर मुसलमानों को देश में भरने से यही होगा

फ्रांस में ट्रैफिक नियम तोड़ने पर 17 वर्षीय किशोर की पुलिस कार्रवाई में मौत के बाद से गृह युद्ध जैसा माहौल बना हुआ है। देशभर में दंगों से निपटने के लिए 45 हजार से ज्यादा सुरक्षाकर्मियों को सड़कों पर उतारा गया है।

अब तक 3300 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इस बीच सोशल मीडिया पर इस्लामी मौलाना मोहम्मद ताहिदी का एक पुराना वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है।

old video of Islamic cleric Imam

इस वीडिये में मौलाना तौहीद चेतावनी देते नजर आ रहे हैं कि किस तरह किसी देश में इस्लामी प्रवासियों को जगह देना खतरनाक हो सकता है। मौलाना तौहीद का यह वीडियो सितंबर 2022 का है।

उग्रवाद, इस्लामवाद और राजनीतिक इस्लाम से मुकाबले पर बोलते हुए तौहीद ने कहा कि आतंकवाद को दो तरह से अंजाम दिया जा रहा है। पहला, यह मुस्लिम दुनिया के भीतर किया जाता है और दूसरा, मुस्लिम दुनिया के बाहर किया जाता है।

इस वीडियो में उन्होंने बताया है कि किस तरह मुस्लिम देश ही इस्लामी कट्टरपंथियों को अपने यहां जगह नहीं देते, मगर उन्हीं कट्टरपंथियों का पश्चिमी देश हाथ खोलकर स्वागत करते हैं और बाद में उन्हें अंजाम भुगतना पड़ता है।

एक ट्वीट में मौलाना ने कहा कि फ्रांस के लिए शांति प्राप्त करने का एकमात्र तरीका सच्चाई और तथ्य से वाकिफ होना है। झूठ और असत्य शांति की नींव नहीं हो सकते। सच तो यह है कि फ्रांस ने अपनी समस्याएं आयातित की हैं। आपने वोट और सस्ते श्रम के लिए अपने यहां उन समस्याओं को आने दिया।

लेकिन आपको कुछ मिला ही नहीं। मिली तो बर्बादी। वे काम करना ही नहीं चाहते। इमाम तौहीद ने कहा, "वे मुफ्त की सुविधाएं चाहते हैं। वे सुनहरी बालों और नीली आंखों वाली फ्रांसीसी महिलाओं से शादी करना चाहते हैं। उनके पास काम करने का वक्त ही नहीं है।

मौलाना ने कहा, पोलैंड को देखो। वे इस्लामी चरमपंथ के बारे में शिकायत नहीं करते। पोलैंड में एक भी आतंकवादी हमला नहीं होता क्योंकि जैसे ही उन्हें पता चलता है कि कोई समस्या है, वे उस पर टूट पड़ते हैं। पोलिश नीति सुंदर है।

फ्रांस में हो रही हिंसा को लेकर मौलाना ताहिदी ने कहा कि पुलिस की बर्बरता की हमेशा निंदा की जानी चाहिए और उसे रोका जाना चाहिए लेकिन आप इसे दंगों और देश को जलाने से हासिल नहीं कर सकते।

मौलाना तौहीद ने कहा कि लोग रोजाना सामान का उपभोग करते हैं और कुछ कचरा पैदा होता है। फिर घरवाले उस कूड़े को दूर रख देते हैं, जिसे बाद में नगर निगम एकत्र करता है। उस कूड़े को घर में नहीं रखना चाहिए क्योंकि इससे बीमारी और बैक्टीरिया पैदा होंगे।

मौलाना तौहीद ने कहा कि समाज में भी कूड़ा-कचरा पाए जाते हैं। समाज में हत्यारे और अपराधी हैं, इसके अलावा एक गंदी विचारधारा है जिसमें कोई कहता है कि आप एक महिला हो इसलिए आपको घरों में कैद रहना चाहिए या कोई कहता है कि आपको अपने पूरे शरीर को ढंकने की जरूरत है। ऐसी विचारधारा से निपटने की जरूरत है। ये गंदी विचारधारा है और इसका सम्मान नहीं किया जा सकता।

मौलाना ने कहा कि राष्ट्रपति मैक्रॉन ने इस्लाम में सुधार का आह्वान करते हुए फ्रांस की समस्याओं के लिए बड़े मुस्लिम जगत को जिम्मेदार ठहराने की कोशिश की है। मेरे ख्याल से ये उनका भ्रम हैं। दुबई, यूएई, कुवैत, ओमान, बहरीन आदि के मुसलमानों का फ्रांस के संकट से क्या लेना-देना है? बिल्कुल कुछ भी नहीं। ये चरमपंथी क्या बाकी देशों के हैं...? ये तो फ्रांस के हैं।

मौलाना ने कहा कि इस्लामिक दुनिया में कोई संकट नहीं है। मुस्लिम देश तो अच्छा कर रहे हैं। कुछ ही ऐसे मुस्लिम देश हैं जहां दिक्कत है। संकट में तो आप हैं। आप मुस्लिम देशों में गए, और आपने वह कचरा आयात किया जेसे मुस्लिम देश जेल में डालना चाहते थे या समाज से अलग करना चाहते थे।

पीस ऑफ इमान के नाम से मशहूर मौलान तौहीद ने कहा कि कैसे स्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स मुस्लिम देशों में काम नहीं कर सकती है लेकिन यूके, यूएस, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में स्वतंत्र रूप से काम कर सकती है। उन्होंने इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) का उदाहरण देते हुए कहा कि वे टोरंटो में स्वतंत्र रूप से अपना झंडा लहरा सकते हैं, मगर किसी मुस्लिम देश में नहीं।

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