फ़्रांसः धमकी के बाद प्रदर्शनकारी बातचीत से हटे
फ़्रांस में तेल पर टैक्स बढ़ाने को लेकर विरोध करनेवाले प्रदर्शनकारियों ने इस बारे में प्रधानमंत्री के साथ मंगलवार को होनेवाली बातचीत से हाथ खींच लिया है.
'येलो वेस्ट' या पीली कुर्ती नाम के इस समूह के कुछ सदस्यों का कहना है कि उन्हें दूसरे कट्टर प्रदर्शनकारियों ने जाने से मारने की धमकी देते हुए सरकार के साथ बातचीत से दूर रहने के लिए कहा था.
पेट्रोल-डीज़ल पर एक विवादास्पद टैक्स को लेकर फ्रांस में नवंबर से देश के अलग-अलग हिस्सों में प्रदर्शन हो रहे हैं.
पर पिछले कुछ दिनों से इस विरोध ने काफ़ी आक्रामक रूप ले लिया है जिसमें अब तक तीन लोगों की जान जा चुकी है और काफ़ी तोड़-फोड़ हुई है.
फ्रांस के गृहमंत्री का कहना है कि बीते रविवार को हुए इन प्रदर्शनों में करीब एक लाख 36 हज़ार लोगों ने भाग लिया.
इस आंदोलन को सोशल मीडिया पर काफ़ी हवा मिली, जिसके बाद राष्ट्रपति मैक्रों की आर्थिक नीतियों की आलोचना बढ़ती गई और विरोध प्रदर्शन की धार तेज़ होती गई.
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने पेरिस में हुए प्रदर्शनों को अनुचित बताया है. और उन्होंने अपने राजनीतिक विरोधियों को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया है.
विपक्षी नेता मारिन ला पेन बैठक में मौजूद थे जिन्होंने कहा कि मैक्रों 50 साल में पहले नेता होंगे जिन्होंने अपने ही लोगों पर गोली चलाने के आदेश दिए.
फ्रांस के वित्त मंत्री ब्रुनो ले मायर ने पिछले हफ्ते बिजनेस में होने वाले नुकसान की जानकारी के लिए बिजनेस प्रतिनिधियों से बात की. मायर का कहना है कि सरकार सार्वजनिक ख़र्चों में कटौती के लिए प्रतिबद्ध है.
विरोध रोकने के संकेत
विरोध प्रदर्शन सोमवार को भी देखे गए. लगभग 50 प्रदर्शकारियों ने मार्से शहर के पास एक बंदरगाह के प्रमुख ईंधन डिपो को ब्लॉक कर दिया था जिसके वजह से देश के अन्य पेट्रोल पंप पर इसका असर दिखा.
देश भर में लगभग 100 माध्यमिक विद्यालयों के छात्रों ने शैक्षणिक और परीक्षा में होने वाले रिफॉर्म के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया.
साथ ही सोमवार को प्राइवेट एंबुलेंस के ड्राइवर ने सोशल सिक्योरिटी और हेल्थकेयर में सुधार की एक श्रृंखला के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किए, जिनका कहना था कि इसकी वजह से उनकी सेवा प्रभावित हो सकती है.
फ्रांस में पेट्रोल-डीज़ल पर लगने वाले टैक्स में हुई बढ़ोत्तरी से आम लोगों में काफी नाराज़गी है. जिसके चलते लोग सड़कों पर उतर आए हैं.
फ़्रांस में डीज़ल कारों में इस्तेमाल होने वाला सबसे प्रमुख ईंधन है. पिछले 12 महीनों में डीज़ल की क़ीमत में 23 फ़ीसदी की बढ़ोतरी हुई है. मैक्रों सरकार ने इस साल प्रति लीटर डीज़ल पर 7.6 फ़ीसदी हाइड्रोकार्बन टैक्स लगा दिया था.












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