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France: मस्जिदों पर लगा ताला, घरों की तलाशी, इस बार क्‍यों अलग है इस्‍लाम के खिलाफ नाराजगी

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पेरिस। तुर्की और फ्रांस के बीच तनाव बढ़ रहा है और इन सबसे बेखबर फ्रेंच अथॉरिटीज ने देश में इस्‍लामिक चरमपंथ के खिलाफ कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। उत्‍तर-पूर्वी पेरिस में स्थित मस्जिद पैनटिन को बंद कर दिया गया है। यह पहला इशारा था कि इस बार फ्रांस चुप नहीं बैठने वाला है। यह बिल्डिंग किसी एयरक्राफ्ट के हैंगर सी नजर आती है। अब फिलहाल यह बंदद है और यहां पर एक नोटिस लगा दिया गया है कि 'सरकार की तरफ से इस्‍लामिक गतिविधियों में शामिल होने की वजह से इसे बंद कर दिया गया है।'

यह भी पढ़ें-तुर्की के राष्‍ट्रपति एर्डोगान ने मैंक्रो को बताया मेंटल

16 अक्‍टूबर को बेदर्दी से टीचर की हत्‍या

16 अक्‍टूबर को बेदर्दी से टीचर की हत्‍या

फ्रांस में 16 अक्‍टूबर को इतिहास के एक टीचर सैमुअल पैटी की गला काटकर हत्‍या कर दी गई थी और उस समय ही राष्‍ट्रपति इमैुनएल मैंक्रो की तरफ से वॉर्निंग दी गई थी। मैंक्रो ने कहा था कि अब वो लोग डर के साए में रहेंगे जो फ्रांस की जनता को डराकर रखना चाहते हैं। सरकार ने इसके बाद 120 लोगों के घरों की तलाशी ली, उस संगठन को खत्‍म कर दिया जिस पर इस्‍लामिक गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगा, सरकार अब आतंकियों को मिलने वाली वित्‍तीय सहायता के बारे में जानकारी हासिल कर ली है। फ्रांस साल 2015 से आतंकवाद को झेल रहा है। लेकिन विश्‍लेषकों की मानें तो इस बार जो भी हो रहा है, वह पहले कभी नहीं हुआ।

घर में पनपा आतंकी नेटवर्क बड़ा खतरा

घर में पनपा आतंकी नेटवर्क बड़ा खतरा

जेरोम फॉरक्‍वॉयट फ्रांस के जाने-माने राजनीतिक विश्‍लेषक हैं। वह कहते हैं कि टीचर पर हुआ हमला पिछले सभी घटनाओं से पूरी तरह से अलग है। टीचर को जिस तरह से निशाना बनाया गया और निर्ममता से उन्‍हें मारा गया, उसके बाद सरकार के अंदर कई लोगों में गुस्‍से की भावना है और यह इस बार कहीं ज्‍यादा है। उन्‍होंने कहा, 'अब हम किसी आतंकी संगठनों से नहीं निबट रहे हैं बल्कि ऐसे लोगों का सामना कर रहे हैं जो आतंकियों का वह नेटवर्क है जो देश में ही मौजूद है।' उनकी मानें तो अब सिर्फ कानून से ही इस समस्‍या का समाधान होगा, ऐसा नहीं है। उनका कहना है कि सरकार जो कर रही है, वह उसका अधिकार है। उसे विचारधारा खतरे के अलावा सुरक्षा पर मौजूद खतरों से भी निबटना है।

क्‍या 2022 पर हैं मैंक्रो की नजरें!

क्‍या 2022 पर हैं मैंक्रो की नजरें!

विशेषज्ञों मानते हैं कि मैंक्रो के फैसले इस आग का भड़का रहे हैं। उनका एकमात्र लक्ष्‍य साल 2022 में फिर से राष्‍ट्रपति का चुनाव जीतना है। ऐसे में अब वह अपनी जमीन को मजबूत कर रहे हैं। पिछले हफ्ते हुए एक सर्वे में इस बात का इशारा मिलता है कि फ्रांस की नेता मैरीन ले पेन, जिन पर लोग आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में सबसे ज्‍यादा भरोसा करते हैं, मैंक्रो उन से फिलहाल चार अंक पीछे हैं। अगले एक साल के अंदर दोनों नेता एक-दूसरे को चुनौती देते हुए नजर आएंगे। मैरल ले पेन इस्‍लाम को फ्रांस के राष्‍ट्रीय पहचान पर खतरा मानती हैं। मैंक्रो के फैसले के बाद फ्रांस और तुर्की के बीच विवाद बढ़ता ही जा रहा है।

तुर्की बोला-दिमाग का इलाज करवाएं मैंक्रो

तुर्की बोला-दिमाग का इलाज करवाएं मैंक्रो

तुर्की के राष्‍ट्रपति रेसेप तैयब एर्डोगान ने इस्‍लाम पर टिप्‍पणी के बाद अपने फ्रेंच समकक्ष इमैनुएल मैंको की दिमागी स्थिति की जांच कराने की बात कही है। फ्रांस, एर्डोगान के इस बयान से खफा है और उसने अपने राजदूत को बुलाने का फैसला किया है। फ्रांस के अधिकारियों की मानें तो एर्डोगान का बयान बिल्‍कुल भी स्‍वीकार नहीं किया जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक एर्डोगान ने राष्‍ट्रपति के लिए अभद्र भाषा का प्रयोग किया है। एर्डोगान ने मैंक्रो को याद दिलाया है कि साल 2022 में फ्रांस में चुनाव होने हैं और अगर उनका रवैया ऐसा ही रहा तो फिर उन्‍हें हारने से कोई नहीं रोक सकता है। मैंक्रो के ऑफिस की तरफ से एर्डोगान की टिप्‍पणी को असम्‍मानजनक बताया गया है

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English summary
France gets strict targets radical Islam amid tension with Turkey.
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