ऑस्ट्रेलिया के पूर्व पीएम ने मोदी की शान में पढ़े कसीदे, चीन के खिलाफ भारत को बताया एकमात्र जवाब
ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री के तौर पर टोनी एबॉट ने चीन के साथ एक द्विपक्षीय फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को लागू किया था, जो 2015 में प्रभावी हुआ था, लेकिन माना जाता है कि चीन ने उनके साथ बहुत बड़ा धोखा किया था।
नई दिल्ली/कैनबरा, अगस्त 10: ऑस्ट्रेलिया के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी एबॉट ने कहा है कि चीन के बारे में जितने भी सवाल उठ रहे हैं, उन सभी सवालों के जवाब सिर्फ और सिर्फ भारत के पास है। ऑस्ट्रेलिया के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी एबॉट ने ऑस्ट्रेलियन अखबार में लिखे एक लेख में कहा है कि ''चीन के बारे में जितने भी सवाल हैं, उन सवालों का जवाब भारत है''। इसके साथ ही ऑस्ट्रेलिया के पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को चाहिए कि जल्द से जल्द वो वैश्विक बाजार में अपनी दावेदारी को मजबूत करे। ऑस्ट्रेलिया के पूर्व पीएम ने कहा कि पीएम मोदी के कार्यकाल में भारत और ऑस्ट्रेलिया के संबंध में अभूतपूर्व सुधार आया है।

टोनी एबॉट ने क्या कहा?
2015 तक ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री रहे टोनी एबॉट ने कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच ''मुक्त व्यापार समझौता'' चीन के खिलाफ जा रहे ''लोकतांत्रित'' देशों के लिए बेहद महत्वपूर्ण संकेत होगा। ऑस्ट्रेलिया के स्पेशल व्यापार दूत टोनी एबॉट ने सोमवार को ऑस्ट्रेलियन अखबार में लिखे एक आर्टिकिल में कहा है कि ''चीन को लेकर करीब करीब जो भी सवाल हैं, उन सभी सवालों का जवाब भारत है''। पिछले हफ्ते भारत की यात्रा पर आए एबॉट ने लिखा है कि, "दुनिया की दूसरी उभरती महाशक्तियां लगभग दिन-ब-दिन और अधिक जुझारू होती जा रही है, यह सभी के हित में है कि भारत जल्द से जल्द ऐसे देशों के बीच अपना सही स्थान ले ले।" ऑस्ट्रेलिया के पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि ''चूंकी व्यापार सौदे राजनीति के साथ साथ अर्थशास्त्र को लेकर भी होते हैं और भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच एक त्वरित मुक्त व्यापार सौदा चीन के खिलाफ एक साथ आ रहे लोकतांत्रिक देशों के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत होगा, साथ ही भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच दीर्धकालिक समृद्धि को बढ़ावा देगा''

एबॉट को चीन से मिल चुका है झटका
आपको बता दें कि ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री के तौर पर टोनी एबॉट ने चीन के साथ एक द्विपक्षीय फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को लागू किया था, जो 2015 में प्रभावी हुआ था। इसके साथ ही फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के एक साल पहले चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की राजकीय यात्रा की भी मेजबानी टोनी एबॉट ने की थी और उस दौरान ऑस्ट्रेलिया और चीन के संबंध काफी मजबूत दिखाई दे रहे थे। लेकिन, उसके बाद चीन पर आरोप लगने लगे कि चीन की कम्यूनिस्ट पार्टी ने ऑस्ट्रेलिया के कई नेताओं की 'आर्थिक मदद' की है, और फिर बाद में जाकर टोनी एबॉट को अपने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। इसके साथ ही कोरोना काल में चीन और ऑस्ट्रेलिया के संबंध काफी खराब हो गये। वहीं, चीन ने ऑस्ट्रेलिया पर बैलिस्टिक मिसाइस से हमला करने की भी धमकी दी थी।

चीन से काफी दूर जाए ऑस्ट्रेलिया
ऑस्ट्रेलिया के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी एबॉट ने जोर देकर कहा कि ऑस्ट्रेलिया को बीजिंग से दूर जाने की अत्यधिक आवश्यकता है और उन्होंने तर्क दिया कि, भारत उनके देश के लिए एक "स्वाभाविक भागीदार" है। उन्होंने अपने लेख में लिखा है कि "भारत और ऑस्ट्रेलिया समान विचारधारा वाले लोकतंत्र हैं जिनके संबंध अब तक अविकसित थे, कम से कम तब तक, जब तक नरेंद्र मोदी भारत के प्रधान मंत्री नहीं बने थे। लेकिन, पीएम मोदी ने अपने कार्यकाल के दौरान क्वाड को फिर से पुनर्जीवित किया है और अब भारत-ऑस्ट्रेलिया के संबंध काफी अच्छे हुए हैं, जिसे और करीब आने की जरूरत है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तारीफ
ऑस्ट्रेलिया के पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि पीएम मोदी के कार्यकाल के दौरान भारत ने ऑस्ट्रेलिया को वार्षिक मालाबार नौसैनिक अभ्यास में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है, जिसमें जल्द ही भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया और रॉयल नेवी हिस्सा लेने वाली है। यह एक स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत के प्रति लोकतंत्र की प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करते हुए वैश्विक ताकतों का एक प्रभावशाली प्रदर्शन होगा।" इसके साथ ही उन्होंने कहा कि ''चीन ने पश्चिमी देशों की नैतिकता का गलत फायदा उठाया है और उनकी नीतियों का शोषण किया है, उनकी टेक्नोलॉजी का फायदा उठाया है और खुद को मजबूत किया है, लिहाजा अब समय आ गया है कि वैश्विक शक्तियों के बीच भारत अपनी मजबूत दावेदारी पेश करे।












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