ISIS-K में शामिल हो रहे पूर्व अफगान सरकार के जासूस और सैनिक, अमेरिका में मची खलबली

पूर्व अफगान जासूस अपनी आय को फिर से शुरू करने के लिए आईएसआईएस-के में शामिल हो रहे हैं क्योंकि सरकार के पतन के बाद उन्हें तालिबान से लड़ने और मरने के लिए अकेला छोड़ दिया गया था।

काबुल, नवंबर 01: अफगानिस्तान के ऊपर तालिबान राज की स्थापना हो चुकी है, लेकिन अफगानिस्तान से एक और बेहद खतरनाक खबर निकलकर सामने आ रही है। एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि, पूर्व अफगान सरकार में शामिल कई अधिकारियों ने एक और बेहद खतरनाक आतंकवादी संगठन आईएसआईएस-खोरासन ज्वाइन कर लिया है। इस रिपोर्ट के आने के बाद अमेरिका में खलबली मच गई है, क्योंकि आईएसआईएस-खोरासन के हिट-लिस्ट पर अगर कोई देश सबसे ज्यादा है, तो वो अमेरिका है।

आईएसआईएस में शामिल पूर्व अफगान जासूस

आईएसआईएस में शामिल पूर्व अफगान जासूस

वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट का हवाला देते हुए खामा प्रेस ने कहा है कि, यह संकेत दिया गया है कि अफगानिस्तान में पिछली सरकार के खुफिया निकाय के सदस्य अब तालिबान से बचने और उसका विरोध करने के लिए आईएसआईएस में शामिल हो रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, आईएसआईएस में शामिल होने वाले ज्यादातर अधिकारी पूर्व सुरक्षाकर्मी, अमेरिका के द्वारा ट्रेनिंग दिए हुए जासूस हैं, जो उत्तरी अफगानिस्तान में एक्टिव है। अफगानिस्तान पर कब्जे के बाद तालिबान को सिर्फ अभी तक पूर्व उपराष्ट्रपति अमरूल्ला सालेह द्वारा समर्थित पंजशीर घाटी से प्रतिरोध का सामना करना पड़ रहा था, जिसपर आखिरकार तालिबान कब्जा नहीं कर पाया है, लेकिन इस रिपोर्ट के बाद अमेरिका की सरकार में सनसनी मच गई है।

पैसों के लिए आईएसआईएस के साथ

पैसों के लिए आईएसआईएस के साथ

खामा प्रेस के अनुसार वाल स्ट्रीट जर्नल ने लिखा है कि, कि पूर्व अफगान जासूस अपनी आय को फिर से शुरू करने के लिए आईएसआईएस-के में शामिल हो रहे हैं क्योंकि सरकार के पतन के बाद उन्हें तालिबान से लड़ने और मरने के लिए अकेला छोड़ दिया गया था और अब उनके पास लड़कर जान बचाने के अलावा कोई और विकल्प नहीं बचा है। पिछले कुछ दिनों से अफगानिस्तान में टार्गेटेड बम विस्फोटों में काफी तेजी देखी जा रही है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, नंगरहार प्रांत को सबसे ज्यादा आईएसआईएस के आतंकी निशाना बना रहे हैं, खासकर निशाने पर शिया समुदाय के लोग होते हैं। वहीं, अब आईएसआईएस ने सीधे तौर पर तालिबान को भी निशाना बनाना शुरू कर दिया है।

तालिबान को चुनौती

तालिबान को चुनौती

पिछले महीने इस्लामिक स्टेट से जुड़े 65 आतंकवादियों ने तालिबान के नेतृत्व वाले अधिकारियों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था, ऐसा तालिबान ने दावा किया था। वहीं, तालिबान ने ये भी दावा किया था कि, राजधानी काबुल में दाएश के ठिकाने को ध्वस्त कर दिया गया है। लेकिन तालिबान के दावे कितने सही हैं, इसकी पुष्टि स्वतंत्र सूत्रों से अब तक नहीं हो पाई है। वहीं, आईएसआईएस के एक सीनियर आतंकी ने पिछले हफ्ते बयान जारी करते हुए कहा था कि, तालिबान जिस इस्लामी कानून और शरिया कानून की बात करके सत्ता में आया था और जिस मकसद के लिए आईएसआईएस ने तालिबान का समर्थन किया था, उस मकसद को पूरा करने में तालिबान नाकाम हो गया है।

अफगानिस्तान में भीषण हमले

अफगानिस्तान में भीषण हमले

अनादोलु न्यूज एजेंसी के अनुसार, आईएसआईएस ने कंधार में बड़े पैमाने पर आत्मघाती बमबारी का दावा किया है। इसके अलावा नंगरहार और परवान प्रांतों में टार्गेटेज हत्याओं के साथ-साथ उत्तरी कुंदुज प्रांत में एक शिया समुदाय की मस्जिद में बड़े पैमाने पर आत्मघाती बम विस्फोट किया, जिसमें 100 से अधिक लोग मारे गए। ऐसी रिपोर्ट है कि, तालिबान में आईएसआईएस-खोरासन के जो आतंकवादी पहले शामिल हुए थे, उन्हें तालिबान ने अपने संगठन से निकाल दिया है, लेकिन ये काफी ज्यादा खतरनाक अब तालिबान के लिए ही हो चुके हैं और उसी तरह से तालिबान के लोगों पर हमला कर रहे हैं, जिस तरह से तालिबान के लड़ाके अमेरिकी फौज पर या अफगानिस्तान की पूर्ववर्ती सरकार पर हमले करती थी।

दुनिया फतह करने का बताया प्लान

दुनिया फतह करने का बताया प्लान

रिपोर्ट के मुताबिक, नजीफुल्लाह नाम का एक आतंकवादी, जो आईएसआईएस-खोरासन का उच्च सदस्य है, उसने पूरी दुनिया पर फतह हासिल करने का प्लान भी बताया है और उसने अपने खतरनाक मंसूबों को दुनिया पर लादने का प्लान बताया है। रिपोर्ट के मुताबिक, उसने कहा है कि, ''आईएसआईएस-के का पहला लक्ष्य पाकिस्तान को नष्ट करना है, क्योंकि अफगानिस्तान में हर चीज का मुख्य कारण पाकिस्तान ही है। जब तालिबान यहां थे (पिछली सरकार के शासन के वक्त में), वे कह रहे थे कि हम देश के 80 प्रतिशत हिस्से को नियंत्रित करते हैं, लेकिन अब, जब वो पूरे देश पर शासन कर रहे हैं, फिर भी वो देश में इस्लामिक शासन को लागू नहीं कर रहे हैं। इसलिए हम इस क्षेत्र में सख्त शरिया कानून को लागू कर चुके हैं।

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