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कैंसर से नहीं जहर देकर हुई पाब्लो नेरूदा की हत्या? 50 साल बाद वैज्ञानिकों ने सबसे बड़े रहस्य का किया खुलासा

23 सितंबर 1973 को जब पाब्लो नेरूदा की मौत हुई तब ये दावा किया गया कि उनकी मौत प्रोस्टेट कैंसर और कुपोषण से हुई है। हालांकि अब 50 साल बाद शोधकर्ताओं ने इस दावे पर सवाल खड़े किए हैं।

Pablo Neruda death

आधुनिक चिली के इतिहास में सबसे चर्चित रहस्यों में से एक रहस्य को फोरेंसिक विशेषज्ञों ने सुलझाने का दावा किया है। इंटरनेशनल फॉरेंसिक एक्पर्ट्स ने दावा किया है कि 1973 में नोबेल पुरस्कार विजेता चिली के कवि पाब्लो नेरूदा की मौत जहर देने से हुई थी। शोधकर्ताओं ने कहा कि इस नतीजे पर पहुंचने के लिए उन्होंने लगभग 10 सालों तक जांच की है। ये रिपोर्ट चिली के जज को सौंपी गई है। पाब्लो नेरूदा को लैटिन अमेरिका के महानतम कवियों में से एक माना जाता है।

50 साल बाद भी रहस्य बरकरार

पाब्लो नेरूदा चर्चित राजनीतिक हस्ती होने के साथ-साथ एक बहुआयामी कवि थे। उनका वास्तविक नाम नेफ्ताली रिकार्दो रेइस बालोत्सा था। उन्होंने प्रेम, विरह, खामोशी, जीवन के कड़वी हकीकत को बयां करती हुई कई ऐसी कविताएं लिखीं जिन्होंने उन्हें जीते जी अमर बना दिया। उन्हें उनकी लोकप्रिय रचना के लिए साल 1971 में साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिला था। 23 सितंबर 1973 को जब उनकी मौत हुई तब ये दावा किया गया कि उनकी मौत प्रोस्टेट कैंसर और कुपोषण से हुई है। हालांकि अब 50 साल बाद शोधकर्ताओं ने इस दावे पर सवाल खड़े किए हैं।

मौत के बाद ही उठे थे सवाल

हालांकि नेरूदा की मौत के बाद उनके कई नजदीकी लोगों ने इसे किसी बीमारी से हुई मौत मानने से इंकार कर दिया था। नेरूदा के भतीजे रोडोल्फो रेयेस सहित कई लोगों का दावा था कि उनकी मौत ऑगस्टो पिनोशे की तत्कालीन तानाशाही का विरोध करने की वजह से हुई थी। नेरूदा के अवशेषों के नमूने विश्लेषण के लिए चार देशों में फोरेंसिक प्रयोगशालाओं में भेजे गए थे, और 2015 में चिली सरकार ने कहा कि यह अत्यधिक संभव है कि कोई तीसरा पक्ष उनकी मौत के लिए जिम्मेदार था। दो साल बाद, अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों की एक टीम ने कहा कि वे 100 फीसदी आश्वस्त थे कि कवि प्रोस्टेट कैंसर से नहीं मरे थे।

तानाशाही सरकार ने कराई हत्या

नेरूदा के भतीजे रेयेस ने स्पेनिश समाचार एजेंसी एफे को बताया, "अब हम जानते हैं कि उनकी दातों में क्लोस्ट्रीडियम बोटुलिनम नामक जहर यूं ही नहीं पाया गया था। इसका क्या मतलब है? इसका मतलब है कि 1973 में तानाशाही सरकार के एजेंटों ने उनकी हत्या कर दी।" रेयेस ने एफे से कहा, "हमें वह गोली मिली है जिससे नेरूदा की मौत हुई थी और यह उनके शरीर में थी। इसे किसने निकाल दिया? हम जल्द ही इसका पता लगा लेंगे, लेकिन इसमें कोई संदेह नहीं है कि नेरूदा को किसी तीसरे पक्ष के सीधे हस्तक्षेप से मार दिया गया था।"

चिली जज को सौंपी गई रिपोर्ट

द गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक नेरूदा के मौत की रिपोर्ट चिली के जज को सौंप दी गई है। अब न्यायाधीश पाओला प्लाजा रिपोर्ट का अध्ययन करेंगे ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि वामपंथी नेता नेरूदा को पूर्व सैन्य तानाशाह ऑगस्टो पिनोशे के एजेंटों द्वारा जहर दिया गया था या नहीं। प्लाजा ने कहा कि उन्हें अभी तक इस रिपोर्ट के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। उन्होंने कहा कि प्रेस में जो प्रसारित हो रहा है उसकी वह जिम्मेदारी नहीं लेते हैं। उन्हें जो रिपोर्ट सौंपी गई है वो काफी लंबी है और उनके लिए इतनी जल्दी उसे पढ़ना मुमकिन नहीं है। जब उनसे पूछा गया कि क्या रिपोर्ट के बाद पाब्लो नेरूदा की मौत का केस फिर से ओपन किया जाएगा। तो उन्होंने जवाब देने से इनकार कर दिया।

देश छोड़ने वाले थे पाब्लो नेरूदा

आपको बता दें कि नेरूदा की मौत के कारणों की जांच पहली बार 2011 में तब शुरू हुई जब उनके निजी सहायक मैनुअल अराया ने ये दावा किया कि मरने से पहले कवि की छाती में एक रहस्यमय इंजेक्शन दिया गया था। आपको बता दें कि 1973 में जब चिली में तख्तापलट हुआ उस समय पाब्लो नेरूदा अस्पताल में भर्ती थे। उन्होंने उस दिन अपने ड्राइवर को कहा था कि वो देश छोड़कर मैक्सिको जाना चाहते हैं। नेरूदा ने यह कहकर ड्राइवर को घर से उनका सामान लाने के लिए भेज दिया। लेकिन देश छोड़ने से 5 घंटे पहले ही उनकी मौत हो गई।

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