7 साल बाद पुरानी भूल सुधारने जा रहा नेपाल, यूपी-बिहार के लाखों लोगों के घरों में लौटेंगी खुशियां
काठमांडू, 11 जुलाईः नेपाल सरकार एक नया नागरिकता विधेयक लाने जा रही है जिसमें उस प्रावधान को जारी रखने का प्रस्ताव रखा गया है जिसके तहत अब किसी नेपाली नागरिक से विवाह करने वाली महिला तुरंत नेपाल की नागरिकता हासिल करने की प्रक्रिया शुरू कर सकेगी। इससे देश में नागरिकता के सवाल पर जारी विवाद अब दूर हो जाने की संभावना है। जाहिर है नेपाल सरकार ने देश के मधेसी समुदाय की सात साल से चल रही मांग मान ली है।

खत्म होगा पुराना प्रावधान
इससे पहले पेश किए गए बिल में प्रावधान था कि ऐसी प्रक्रिया विवाह के सात साल बाद ही शुरू की जा सकेगी। पिछले हफ्ते नेपाल सरकार ने कई वर्षों में संसद में लंबित पड़े उस बिल को वापस ले लिया था। अब प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा के नेतृत्व वाली नेपाल की गठबंधन सरकार ने नया नागरिकता विधेयक तैयार कर लिया है। उसे पारित कराने के लिए संसद में पंजीकृत करवा दिया गया है। हालांकि कम्युनिस्ट पार्टियों से संबंधित हाउस पैनल के सदस्यों ने सात साल की प्रतीक्षा अवधि का समर्थन किया था, जबकि नेपाली कांग्रेस और मधेस-आधारित दलों के सदस्यों ने प्रस्ताव का विरोध किया था।

7 साल करना पड़ता था इंतजार
2015 में विवाह के बाद नागरिकता पाने के लिए सात साल तक इंतजार की शर्त के खिलाफ देश के खास कर मधेसी बहुल इलाकों में विरोध भड़क उठा था। मधेसी समुदाय के लोगों के नेपाल की सीमा से लगे भारत के उत्तर प्रदेश और बिहार सहित उत्तर पूर्व के राज्यों से पारंपरिक रिश्ता है। दोनों तरफ के लोगों के बीच अक्सर वैवाहिक संबंध बनते रहते हैं।

जन्म के आधार पर नागरिकता
नए तैयार किए गए बिल में बच्चों को नेपाल में जन्म के आधार पर नागरिकता देने का प्रावधान भी किया गया है। इसमें कहा गया है कि नेपाली महिला से जन्म लेने वाले बच्चे/बच्ची को नेपाल की नागरिकता हासिल करने का हक होगा, भले उसके पिता के बारे में जानकारी उपलब्ध ना हो। बच्चा अगर नेपाल में रह रहा हो, तो उसे नागरिकता प्रदान की जाएगी। हालांकि इसमें यह प्रावधान भी जोड़ दिया गया है कि अगर बाद में यह पता चला कि बच्चे का पिता विदेशी है, तो बच्चे की नागरिकता रद्द कर दी जाएगी। उस स्थिति में बच्चे को उस शर्त के आधार पर नागरिकता प्राप्त करने की अर्जी देनी होगी, जो नेपाल की नागरिकता चाहने वाले विदेशियों के लिए तय है।

अनिवासी दर्जा का भी प्रावधान
इस बिल में दक्षिण एशिया सहयोग संगठन (सार्क) के किसी सदस्य देश की नागरिकता ले चुके नेपाली को अनिवासी नेपाली का दर्जा देने का प्रावधान किया गया है। अनिवासी नेपाली को नेपाल में वहां के नागरिक की तरह ही आर्थिक, सामाजिक, और सांस्कृतिक अधिकार मिलेंगे। लेकिन उसे राजनीतिक अधिकार यानी कि चुनाव लड़ने या वोट देने का अधिकार नहीं मिलेगा।

जल्द ही बिल होगा पास
ऐसी संभावना जताई जा रही है कि इस बिल को संसद के मौजूदा सत्र में ही पास कराया जाएगा। एक अनुमान के मुताबिक इस बिल के पारित होने पर लाखों बच्चों को नेपाल की नागरिकता मिलने का रास्ता साफ हो जाएगा, जो अभी नागरिक ना होने की वजह से संवैधानिक अधिकारों से वंचित हैं। इसी तरह हजारों महिलाओं को भी तुरंत नागरिकता मिल सकेगी।

कम्यूनिस्ट पार्टी कर रही थी विरोध
इस प्रस्ताव के केंद्र में राजनीतिक फायदा भी शामिल है। इस बिल के पास होने पर नेपाली कांग्रेस को अगले आम चुनाव में मधेस इलाके में बड़ा फायदा हो सकता है। वहीं, चीन समर्थक कम्युनिस्ट पार्टियों ने इससे पहले विवाह करने वाली विदेशी महिलाओं को तुरंत नागरिकता देने का विरोध किया था। विश्लेषकों का कहना है कि अगर कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (माओइस्ट सेंटर) अपने पुराने रुख पर कायम रही, तो उससे सत्ताधारी गठबंधन में विवाद खड़ा हो सकता है। माओइस्ट सेंटर नेपाली कांग्रेस के नेतृत्व वाले सत्ताधारी गठबंधन में शामिल है।
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