जॉर्जिया से भावनात्मक बंधन में बंधा भारत, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने दिया 'अनमोल' तोहफा
भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने जॉर्जिया के लोगों को सेंट क्वीन केतेवन का अवशेष सौंपकर एक अनमोल तोहफा दिया है।
त्बिलिसी, जुलाई 10: रूस की यात्रा खत्म करके जॉर्जिया के दौरे पर गये भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने दोनों देशों को एक भावनात्मक बंधन में जोड़ दिया है। रूस के दुश्मन देश जॉर्जिया में पहुंचकर भारतीय विदेश मंत्री ने पाकिस्तान के पाले में झुकते रूस को ना सिर्फ उसी की भाषा में जवाब दी है, बल्कि भारत के दूसरे विदेश मंत्री बने हैं, जो जॉर्जिया के दौरे पर पहुंचे हैं। लेकिन, पहले ही दौरे पर भारत और जॉर्जिया के बीच भावनात्मक संबंध स्थापित हो गया है।

जॉर्जिया को 'अनमोल' तोहफा
जॉर्जिया पहुंचे भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने एक समारोह के दौरान सेंट क्वीन केतेवन के पवित्र अवशेष जॉर्जिया के लोगों के हवाले कर दिया है। जिसके साथ जॉर्जिया के लोगों का बेहद गहरा भावनात्मक रिश्ता जुड़ा हुआ है और जॉर्जिया के लिए पवित्र क्वीन केतेवन का अवशेष एक अनमोल तोहफा कहा जा रहा है। जॉर्जिया के लोग लंबे वक्त से भारत सरकार के क्वीन केतेवन का अवशेष मांग रहे थे, जिसे पहुंचाने खुद भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर जॉर्जिया पहुंचे। इस दौरान उन्होंने तहा कि क्वीन केतेवन के पवित्र अवशेष को जॉर्जिया के लोगों को सौंपना उनके लिए सौभाग्य की बात है।

कौन थीं सेंट क्वीन केतेवन?
सेंट क्वीन केतेवन 17वीं शताब्दी में जॉर्जिया की रानी हुआ करती थीं और 1624 में मुस्लिम शासकों ने उनकी हत्या कर दी थी। दरअसल, सेंट क्वीन केतेवन के ऊपर ईरान के मुस्लिम शासकों ने इस्लाम कबूलने का काफी दवाब बनाया था, लेकिन सेंट क्वीन केतेवन ने इस्लाम मानने से साफ इनकार कर दिया था, जिसके बाद ईरान के क्रूर और वहशी शासकों ने रानी सेंट क्वीन केतेवन की हत्या कर दी थी। जिसके बाद उनका अवशेष 2005 में गोवा में एक चर्च में पाया गया था। चर्च में रखा अवशेष सेंट क्वीन केतेवन का ही है या नहीं, इसे जानने के लिए अवशेष का डीएनए टेस्ट भारत के सीएसआईआर सेंटर फॉर सेल्यूलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलजी, हैदराबाद में किया गया था और डीएनए टेस्ट भारत के आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया ने करवाया था। डीएनए टेस्ट के दौरान ये साबित हो गया कि जो अवशेष मिले हैं, वो सेंट क्वीन केतेवन के ही हैं। ऐसी रिपोर्ट है कि 1627 ईस्वी में उनकी हत्या के बाद उनका कोई सहयोगी भारत भागकर आ गया था और साथ में रानी का पवित्र अवशेष लेकर आया था।

390 सालों बाद अवशेष पहुंचा स्वदेश
करीब 390 सालों के बाद रानी केतेवन का पवित्र अवशेष आखिरकार अपने घर पहुंच ही गया, जिसे देखने के लिए जॉर्जिया में काफी भीड़ जुट गई थी और लोग अपने रानी की पवित्र अवशेष को चूम कर उन्हें याद कर रहे थे। इससे पहले सितंबर 2017 में क्वीन केतेवन का अवशेष एक साल के लिए जॉर्जिया भेजे गये थे और फिर 2018 में उसे वापस मंगा लिया गया था। पिछली बार किसी भारतीय विदेश मंत्री ने देश का दौरा 40 साल पहले किया था। 1978 में भारत के तत्कालीन विदेश मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने जॉर्जिया का दौरा किया था। उसके बाद जॉर्जियाई विदेश मंत्री इराकली मेनागारिशविली और विदेश मंत्री जसवंत सिंह ने 11 मई 2000 को नई दिल्ली में मुलाकात की थी।
जॉर्जिया को तोहफा
भारत सरकार की तरफ से कहा गया है कि "पवित्र अवशेषों को हमेशा के लिए जॉर्जिया को सौंप देने की मांग काफी लंबे वक्त से जॉर्जिया के लोग और जॉर्जिया की सरकार कर रही थी। भारत सरकार ने महसूस किया कि जॉर्जिया के लोग सेंट क्वीन केतेवन से जुड़ी ऐतिहासिक, धार्मिक और आध्यात्मिक भावनाओं से कितने जुड़े हुए हैं, लिहाजा अवशेष का एक हिस्सा हमेशा के लिए जॉर्जिया को उपहार स्वरूप सौंपने का फैसला लिया गया है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत और जॉर्जिया भावनात्मक तौर पर दोस्ती को मजबूत करेगा।












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