भारत-अमेरिका संबंधों पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बोलीं- 'दोस्त चुन सकते हैं, पड़ोसी नहीं...'
भारत-अमेरिका संबंधों पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बोलीं- 'दोस्त चुन सकते हैं, पड़ोसी नहीं...'
वाशिंगटन (यूएस), 23 अप्रैल : केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इस हफ्ते संयुक्त राज्य अमेरिका के दौरे पर हैं। शुक्रवार (22 अप्रैल) वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारत के भूगोल के संदर्भ में भारत और अमेरिकी संबंधों पर चर्चा की। इस दौरान निर्मला सीतारमण ने कहा, "एक दोस्त कमजोर नहीं हो सकता।'' वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा, "आप अपना दोस्त चुन सकते हैं, लेकिन पड़ोसी नहीं।" इस दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से यूक्रेन युद्ध को लेकर वैश्विक प्रतिबंधों का सामना कर रहे रूस से भारत द्वारा हथियारों और तेल की खरीद से जुड़े सवाल भी किए गए।

'एक दोस्त को किसी भी कारण से कमजोर नहीं किया जा सकता...'
समाचार एजेंसी एएनआई द्वारा ट्वीट किए गए एक वीडियो में एक सवाल का जवाब देते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण कहती हैं, ''अमेरिका के साथ संबंधों की हर बेहतरी, एक मान्यता है कि वह एक दोस्त है लेकिन दोस्त की भौगोलिक स्थिति है। ये उन्हें समझना होगा और एक दोस्त को किसी भी कारण से कमजोर नहीं किया जा सकता है। हमें भौगोलिक स्थिति को समझना होगा। उत्तरी सीमाएं तनाव में हैं ... पश्चिमी सीमाएं बाधाओं पर हैं ... और वहां अफगानिस्तान है ... यह है ऐसा नहीं है कि भारत के पास स्थानांतरित करने का विकल्प है।"

'आप अपना पड़ोसी नहीं चुन सकते, दोस्त चुन सकते हैं...'
पूर्व प्रधानमंत्री और भाजपा के दिग्गज नेता अटल बिहारी वाजपेयी का जिक्र करते हुए निर्मला सीतारमण ने कहा, "आप अपना पड़ोसी नहीं चुन सकते ... आप अपना दोस्त चुन सकते हैं। आपका पड़ोस वही है जो आपके पास है। अगर अमेरिका एक दोस्त चाहता है, तो वह नहीं चाहेगा एक कमजोर दोस्त मिले। इसलिए, हम फैसला ले रहे हैं क्योंकि भौगोलिक स्थानों को देखते हुए हमें यह जानने की जरूरत है कि हम कहां हैं।"

'लोग जानते हैं कि भारत-अमेरिका के रिश्ते गहरे हैं...'
निर्मला सीतारमण ने कहा, "एक समझ है कि संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ भारत के संबंध वास्तव में आगे बढ रहे हैं। यह और गहरा हो गया है। इस पर सवाल उठाने वाला कोई नहीं है। लेकिन एक समझ यह भी है कि केवल रूस पर भारत रक्षा उपकरणों की विरासत के लिए निर्भर नहीं है। भारत और रूस की भी कई दशकों से अधिक पुराने रिश्ते हैं। और अगर कुछ भी हो, तो मैं थोड़े विश्वास के साथ कह सकती हूं कि एक सकारात्मक समझ है। यह एक नकारात्मक समझ नहीं है।''












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