करीब करीब डिफॉल्ट हो गया पाकिस्तान, FITCH ने रेटिंग को कंगाली के स्तर तक किया डाउनग्रेड, जानें मायने

पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार 3 अरब डॉलर से नीचे जा चुका है और आईएमएफ के साथ पाकिस्तान की बातचीत आगे नहीं बढ़ पा रही है। वहीं, दोस्त देशों ने भी मदद देने से मना कर दिया है।

Fitch downgrades Pakistans Rating

Fitch downgrades Pakistan's Rating: पाकिस्तान करीब करीब डिफॉल्ट कर गया है और अंतर्राष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी फिच ने अपनी ताजा रेटिंग में पाकिस्तान को डाउनग्रेड करते हुए वो रेटिंग दिया है, जो डिफॉल्ट हो चुके देशों की रेटिंग होती है। पाकिस्तान के लिए ये एक बहुत बड़ा झटका है, क्योंकि इसके बाद पाकिस्तान को किसी और देश से कर्ज मिलना और भी ज्यादा मुश्किल हो जाएगा और इस रेटिंग का मतलब ये है, कि पाकिस्तान की कर्ज चुकाने की विश्वसनीयता लगभग खत्म हो गई है। यानि, अगर कोई देश या कोई संस्थान पाकिस्तान को कर्ज देता है, को उस कर्ज की वापसी की संभावना नहीं के बराबर है।

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    पाकिस्तान की रेटिंग डाउनग्रेड

    पाकिस्तान की रेटिंग डाउनग्रेड

    रेटिंग एजेंसी फिच के एक बयान में मंगलवार को कहा गया है, कि फिच रेटिंग्स ने पाकिस्तान की Long-Term Foreign-Currency Issuer Default Rating (आईडीआर) को "CCC+" से घटाकर "CCC-" कर दिया है। रेटिंग में डाउनग्रेड, देश की बाहरी तरलता और फंडिंग की स्थिति में और तेज गिरावट और विदेशी मुद्रा भंडार के गंभीर रूप से निम्न स्तर तक पहुंचने को दर्शाता है। आपको बता दें, कि पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार अब गिरकर 3 अरब डॉलर के नीचे चला गया है और देश के पास विदेशी सामान खरीदने की क्षमता करीब करीब खत्म हो चुकी है। हालांकि, रेटिंग एजेंसी फिच ने इस बात की उम्मीद जताई है, कि आईएमएफ के साथ पाकिस्तान की कर्ज की किश्त को लेकर डील सफल होगी, लेकिन ये इस बात पर निर्भर करता है, कि क्या पाकिस्तान आईएमएफ की शर्तों को मानता है या नहीं?

    राष्ट्रपति से शहबाज सरकार को झटका

    राष्ट्रपति से शहबाज सरकार को झटका

    वहीं, आईएमएफ की शर्तों को मानने के लिए शहबाज सरकार के मिनी बजट के रास्ते में राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने बड़ा रोड़ा अटका दिया है। पाकिस्तान के राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने मंगलवार को शहबाज शरीफ सरकार के उस अध्यादेश को ठुकरा दिया है, जिसमें आईएमएफ की शर्तों को मानने के लिए मिनी बजट पेश किया गया था। इस मिनी बजट में शहबाज सरकार ने 170 अरब रुपये का टैक्स लगाने का भी प्रावधान किया था, लेकिन राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने यह कहते हुए फाइल को वापस लौटा दिया, कि सरकार को संसद को विश्वास में लेकर इस अध्यादेश को मंजूरी लेनी चाहिए।

    इमरान की पार्टी के हैं राष्ट्रपति

    इमरान की पार्टी के हैं राष्ट्रपति

    राष्ट्रपति हाउस ने एक बयान जारी करते हुए कहा है, कि वित्त मंत्री इशाक डार ने राष्ट्रपति से मुलाकात की और उन्हें आईएमएफ के साथ बातचीत में हुई प्रगति और सभी तौर-तरीकों से अवगत कराया, जिन पर सहमति बनी थी। अल्वी ने अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के साथ एक समझौते पर बातचीत करने के लिए सरकार के प्रयासों की सराहना की और आश्वासन दिया, कि पाकिस्तान इस संबंध में सरकार की प्रतिबद्धताओं के साथ खड़ा होगा। शहबाज सरकार के साथ दिक्कत ये है, कि संसद में उसके लिए मिनी बजट को पास करना अत्यंत मुश्किल होगा, क्योंकि सरकार के पास मामूली बहुमत है। आपको बता दें, कि राष्ट्रपति आरिफ अल्वी इमरान खान की तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के नेता हैं और वो इमरान की सलाह के बाद ही कोई काम करते हैं।

    बड़े संकट में फंसा है पाकिस्तान

    बड़े संकट में फंसा है पाकिस्तान

    पाकिस्तान की सरकार के पास अब विदेशी मुद्रा भंडार 3 अरब डॉलर से नीचे जा चुका है, लिहाजा पाकिस्तान सरकार ने डॉलर बचाने के लिए विदेशी सामानों की खरीददारी पर प्रतिबंध लगा दिया है। विदेशी सामान खरीदने के लिए अब स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान की इजाजत लेना जरूरी कर दिया गया है, लिहाजा पाकिस्तान के फैक्ट्री संचालक और दूसरे कारोबारी विदेशी सामान नहीं खरीद पा रहे हैं, जिससे उनका कारोबार बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है। जियो न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, आईएमएफ से बेलऑउट पैकेज पर बातचीत फेल होने के बाद पाकिस्तान सरकार ने सभी आवश्यक खाद्य पदार्थ और दवाओं के आयात पर भी प्रतिबंध लगा दिया है। पाकिस्तान सरकार ने कहा है, कि जब तक आईएमएफ के साथ बातचीत फाइनल नहीं हो जाती है और लोन की किश्त नहीं मिल जाती है, तब तक ये प्रतिबंध लागू रहेंगे।

    पाकिस्तान का मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर तबाह

    पाकिस्तान का मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर तबाह

    पाकिस्तान में मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर भी तबाही के बिल्कुल किनारे खड़ा है। जियो न्यूज के मुताबिक, कच्चे माल की कमी के साथ-साथ बढ़ती महंगाई, बढ़ती ईंधन लागत और गिरते रुपये ने मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर को पस्त कर दिया है। रुके हुए ऋण कार्यक्रम को फिर से शुरू करने के लिए तत्काल वार्ता के बाद आईएमएफ का प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार को पाकिस्तान से चला गया, जिससे व्यापार जगत में भारी अनिश्चितता बनी हुई है। कपड़ा और परिधान उद्योग पाकिस्तान के लगभग 60 प्रतिशत निर्यात को अपने कंधे पर उठाता है और इस सेक्टर से प्रत्यक्ष और परोक्ष तौर पर साढ़े तीन करोड़ लोग जुड़े हुए हैं, लिहाजा इस सेक्टर के बैठने से लाखों लोग एक झटके में सड़क पर आ जाएंगे। ऑल पाकिस्तान टेक्सटाइल एसोसिएशन के महासचिव शाहिद सत्तार ने कहा, कि "कपड़ा उद्योग को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।" उन्होंने कहा, "हम देश के निर्यात का मुख्य आधार हैं। और यदि आपके पास निर्यात ही नहीं है, तो आप अपने विदेशी मुद्रा भंडार को कैसे बढ़ाएंगे? और फिर देश की अर्थव्यवस्था कैसे ठीक होगी?"

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