भारत पर फिर गहराया बड़ा शरणार्थी संकट, रामेश्वरम पहुंचा पहला जत्था, श्रीलंका में भूख से हाहाकार
रामेश्वरम (तमिलनाडु), 23 मार्च: श्रीलंका की हालत दिनों-दिन बेकाबू होती जा रही है। वह बहुत बड़े आर्थिक और मानवीय संकट की ओर बढ़ता जा रहा है। चारों ओर हाहाकार मचा हुआ है। चावल की कीमतें 500 रुपये प्रति किलो (स्थानीय करेंसी) तक पहुंचने वाली हैं। बच्चों के मुंह से दूध छिन चुका है, क्योंकि तीन ही दिन में कीमतें कई गुना बढ़ गई हैं। लेकिन, खामियाजा भारत को भी भुगतना पड़ सकता है। ऐसी नौबत आ चुकी है। श्रीलंका से तमिल शरणार्थियों का जत्था तमिलनाडु के तटों पर पहुंचना शुरू हो चुका है। एक्सपर्ट बता रहे हैं कि अगले कुछ हफ्तों में इनकी संख्या में बेतहाशा वृद्धि हो सकती है।

भारत पर फिर गहराया बड़ा शरणार्थी संकट
मंगलवार को 16 श्रीलंकाई नागरिकों का जत्था दो बैच में तमिलनाडु के रामेश्वरम तट पर पहुंचा है । ये सारे शरणार्थी तमिल हैं और उत्तरी श्रीलंका के जाफना और मन्नार क्षेत्र से आए हैं। पहला बैच एक द्वीप के पास फंस गया था, जिन्हें भारतीय कोस्ट गार्ड ने रेस्क्यू किया है। दूसरे बैच में 10 लोग हैं, जो देर रात लाए गए हैं। इंडियन एक्सप्रेस की एक खबर के मुताबिक तमिलनाडु पुलिस के सूत्र ने बताया है कि ये श्रीलंका में बेरोजगारी और खाने-पीने की चीजों की कमी के चलते भागे हैं। संकट की बात तो ये है कि उत्तरी श्रीलंका के तमिल-बहुल इलाकों से जो जानकारी मिल रही है, उससे लगता है कि भारत के लिए यह नए शरणार्थी समस्या की शुरुआत भर है। तमिलनाडु के इंटेलिजेंस अधिकारियों को सूचना मिली है कि आने वाले कुछ हफ्तों में 'करीब 2,000 शरणार्थी' भारत आने के लिए तैयार बैठे हैं।

भारतीय कोस्ट गार्ड ने किया है रेस्क्यू
एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि, 'पहले ग्रुप में जो 6 शरणार्थी आए हैं, उन्होंने पुलिस को बताया कि कई हफ्तों तक भोजने के लिए संघर्ष करने के बाद उन्हें भागने के लिए मजबूर कर दिया गया। उन्होंने दावा किया है कि मछुआरों को 50,000 रुपये दिए हैं, तब जाकर इन्हें भारतीय समुद्री इलाके के अरिचल मुनाई के चौथे द्वीप पर लाकर छोड़ा है। उनके मुताबिक कई और परिवार भोजन और तेल की किल्लत और आमदनी खत्म होने के चलते भारत भागने के रास्ते तलाश रहे हैं।' पहले बैच में एक युवा जोड़ा और उसका चार महीने का बेटा और एक महिला अपने दो बच्चों के साथ भारत आकर शरण ली है। दूसरे ग्रुप में तीन महिलाएं और पांच बच्चे शामिल हैं।

रामेश्वरम के पास शरणार्थी कैंप में रखे गए हैं
स्थानीय अधिकारी ने कहा कि 'पुलिस को सौंपने से पहले उन्हें एक होवरक्राफ्ट से रेस्क्यू किया गया और कोस्ट गार्ड कैंप में लाकर भोजन दिया गया। पुलिस ने कहा है कि उन सबक को रामेश्वरम के पास मंडपम शरणार्थी कैंप में शिफ्ट कर दिया गया है।' इसने बताया कि 'दूसरा ग्रुप एक फाइबर बोट पर पहुंचा है। वे पिछली रात मन्नार तट से निकले थे और दावा किया है कि यात्रा के लिए कुल 3 लाख रुपये खर्च किए हैं। रास्ते में बोट में एक तकनीकी खराबी आ गई थी और उन्हें लगभग पूरा दिन बीच में ही उसे ठीक करते हुए गुजारना पड़ा। बाद में वे रात 9 बजे के करीब रामेश्वरम के पास पमबन ब्रिज पहुंचे। '

श्रीलंका में कागज की भी किल्लत, रद्द हुई परीक्षाएं
मन्नार के रहने वाले ऐक्टिविस्ट वीएस सिवाकरण ने हालात की गंभीरता पर चेताया है कि यह पलायन की एक शुरुआत भर हो सकती है। वे बोले, 'कई सारे लोग जिन्हें मैं जानता हूं वह श्रीलंका छोड़ने की योजना बना रहे हैं, कुछ के रिश्तेदार भारतीय कैंपों में हैं, कुछ का तमिलनाडु में संपर्क है। कल क्या होगा इसको लेकर एक घबराहट और चिंता है। यह लगभग तय है कि एक हफ्ते में चावल की कीमत 500 रुपये (श्रीलंका के) किलो तक पहुंच जाएगी। आज चावल 290 रुपये किलो है, चीनी भी 290 रुपये किलो है और 400 ग्राम के दूध का पाउडर 790 रुपये में मिल रहा है।' उन्होंने कहा कि दूध के पाउडर का दाम तो तीन दिन में ही 250 रुपये बढ़ गया है। उन्होंने बताया कि कागज नहीं हैं, इसलिए श्रीलंका सरकार ने स्कूली परीक्षाएं अनिश्चितकाल के लिए रद्द कर दी हैं।

भारत के लिए दूरगामी हो सकती है समस्या
भारत पहले से ही रोहिंग्या मुसलमानों के भयानक शरणार्थी संकट को झेल रहा है। इससे आंतरिक सुरक्षा को चुनौती मिल रही है, वह एक अलग समस्या है। ऊपर से जहां तक श्रीलंकाई शरणार्थियों का मामला है तो यह पहली बार नहीं है। 1980 के दशक में श्रीलंकाई गृह युद्ध के दौरान भारत इसमें अपना हाथ भी जला चुका है। एक्सपर्ट के मुताबिक हालांकि, 2009 के बाद से वहां शांति स्थापित होने के बाद से पलायन लगभग रुक चुका था। उसके बाद इक्का-दुक्का ही श्रीलंकाई तमिल मछली पकड़ने के नाव से भारत आते रहे हैं। इस बार श्रीलंका बहुत ही बड़ा आर्थिक संकट झेल रहा है। भारत ने उसे पिछले 17 मार्च को 1 बिलियन डॉलर का ऋण भी उपलब्ध करवाया है। भारत के लिए लंबे समय की चिंता यह भी है कि चीन लगातार इस पड़ोसी मुल्क पर हावी होना चाह रहा है। मौजूदा हालात उसके लिए और भी माकूल बनते जा रहे हैं और यह भारत के लिए गंभीर समस्या की जड़ बन सकता है। (पहली तीन तस्वीर सौजन्य-@Kavinthans ट्विटर वीडियो से, चौथी-प्रतीकात्मक और अंतिम कोलंबो में हुए विरोध प्रदर्शन की)












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