तालिबान के अंदर सरकार को लेकर दो फाड़, हक्कानी ग्रुप ने अब्दुल गनी बरादर को गोली मारी, चरम पर विवाद
तालिबान अब्दुल गनी बरादर को अफगानिस्तान का राष्ट्रपति बनाना चाहता है, लेकिन हक्कानी ने बरादर के नाम पर असहमति जता दी है। वहीं, रिपोर्ट है कि हक्कानी को पाकिस्तान का समर्थन हासिल है।
काबुल, सितंबर 05: अफगानिस्तान पर तालिबान का कब्जा तो हो गया है, लेकिन सरकार बनाने के लिए तालिबान के अंदर भारी सिर-फुटौव्वल शुरू हो गया है। सरकार बनाने से पहले तालिबान के अंदर अलग अलग गुटों के बीच भारी कलह शुरू हो गई है और अफगानिस्तान से आ रही रिपोर्ट के मुताबिक, तालिबान का संस्थापक अब्दुल गनी बरादर को गोली मार दी गई है, जिसमें वो गंभीर रूप से घायल हो गया है।
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तालिबान के अंदर छिड़ी लड़ाई
अफगानिस्तान से आ रही रिपोर्ट के मुताबिक, तालिबान के अंदर सरकार बनाने को लेकर कई फाड़ हो चुके हैं और अलग अलग ग्रुप्स के भीतर संघर्ष शुरू हो चुका है। रिपोर्ट के मुताबिक, हक्कानी नेटवर्क के नेता अनस हक्कानी और खलील हक्कानी के साथ तालिबान के संस्थापक मुल्ला बरादर और मुल्ला याकूब के बीच जोरदार झड़प हुई है। रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि हक्कानी नेटवर्क की तरफ से गोली चलाई गई है, जिसमें तालिबान के संस्थापक मुल्ला बरादर गंभीर घायल हो गया है। तालिबान मुल्ला बरादर को अफगानिस्तान का नया राष्ट्रपति बनाना चाहता है, जबकि हक्कानी नेटवर्क राष्ट्रपति का पद अपने पास रखना चाहता है। पाकिस्तान हक्कानी नेटवर्क को समर्थन कर रहा है।

तालिबान में सरकार पर संघर्ष
अफगानिस्तान से आ रही रिपोर्ट के मुताबिक, तालिबान का नेता अब्दुल गनी बरादर चाहता है कि अफगानिस्तान में जिस सरकार का निर्माण हो, उसमें अल्पसंख्यक समुदाय के नेताओं को भी शामिल किया जाए। लेकिन, हक्कानी नेटवर्क किसी भी कीमत पर अफगानिस्तान की सत्ता में किसी को भी हिस्सेदारी नहीं देना चाहता है। वहीं, पाकिस्तान का समर्थन हक्कानी नेटवर्क को है और पाकिस्तान भी मुल्ला बरादर को राष्ट्रपति बनाना नहीं चाहता है। हक्कानी नेटवर्क अफगानिस्तान में शुद्ध इस्लामिक विचारधारा के साथ सरकार बनाना चाहता है और अफगानिस्तान में काफी सख्त शरिया कानून लागू करना चाहता है, जबकि तालिबान का कहना है कि वो शरिया कानून में रियायत देने के लिए तैयार है और वो महिलाओं को भी थोड़ी आजादी देने के पक्ष में है, जिसको लेकर हक्कानी नेटवर्क और तालिबान के बीच विवाद काफी बढ़ चुकी है।

मुल्ला बरादर पर विवाद
रिपोर्ट के मुताबिक, हक्कानी नेटवर्क को मुल्ला बरादर के नाम पर सख्त एतराज है और हक्कानी नेटवर्क ने मुल्ला बरादर को पीछे हटने के लिए कहा है। हक्कानी नेटवर्क का कहना है कि काबुल को उसने जीता है और अफगानिस्तान की राजधानी पर हक्कानी नेटवर्क का नियंत्रण स्थापित है। वहीं, मुल्ला याकूब अभी भी कंधार में है, लिहाजा सरकार बनाने को लेकर काफी विवाद की स्थिति पैदा हो गई है। वहीं, रिपोर्ट के मुताबिक, तालिबान ने हक्कानी नेटवर्क की बात मानने से इनकार कर दिया है।
अब्दुल गनी बरादर घायल
पंजशीर ऑब्जर्वर और एनआरएफ की रिपोर्ट में अब्दुल गनी बरादर के घायल होने का दावा किया गया है। हालांकि, ना ही तालिबान और ना ही हक्कानी नेटवर्क ने इसकी पुष्टि की है। लेकिन, जिस तरह से पाकिस्तान आईएसआई चीफ फैज हमीद कल अचानक काबुल पहुंचे, उसके बाद ये साफ हो गया था कि तालिबान के अंदर फूट पड़ गई है और उसी दरार को भड़ने के लिए आईएसआई चीफ काबुल पहुंचे है। काबुल में आईएसआई चीफ ने एक बयान में सब ठीक होने की बात कही है, जिसका मतलब ये निकाला गया है कि तालिबान में सबकुछ ठीक नहीं है। रिपोर्ट में कहा गया है कि घायल बरादर को आनन-फानन में इलाज कराने के लिए पाकिस्तान भेजा गया है और उसी वजह से अफगानिस्तान में नई सरकार का गठन टाला गया है।

आईएसआई चीफ कराएंगे समझौता
पाकिस्तानी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) के महानिदेशक अभी भी काबुल में हक्कानी नेटवर्क के पक्ष में युद्धरत गुटों के बीच समझौता करने की कोशिश कर रहे हैं। आईएसआई ने अतीत में काबुल में भारतीय दूतावास को निशाना बनाने और पाकिस्तान से जुड़ी दिशा में सुन्नी पश्तून बल को चलाने के लिए हक्कानी नेटवर्क का इस्तेमाल किया है। जनरल हमीद के काबुल में होने का एक अन्य कारण पंजशीर घाटी में कमांडर अमरुल्ला सालेह के नेतृत्व में एंटी तालिबान फोर्स के खिलाफ तालिबान की कार्रवाई की देखरेख करना भी है। ऐसी रिपोर्ट है कि पंजशीर में तालिबान को हारता देख पाकिस्तान की सेना ने अब लड़ाई शुरू कर दी है। हालांकि, इसकी पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है। तालिबान को जहां चीन, रूस और पाकिस्तान का पूरी तरह से समर्थन हासिल है, वहीं पंजशीर के नेता अकेले ही मुकाबला कर रहे हैं। लिहाजा, पंजशीर कितने दिनों तक सुरक्षित रहेगा, ये कहना काफी मुश्किल लग रहा है।

स्थिति और होगी खतरनाक
माना जा रहा है कि तालिबान के अंदर में सत्ता के लिए संघर्ष अब खूनी होने वाला है और हक्कानी नेटवर्क के साथ लड़ाई काफी गंभीर हो सकती है। हक्कानी नेटवर्क ने दोहा में बातचीत के दौरान साफ कहा है कि उसने बंदूक के दम पर काबुल जीता है और वो सरकार में किसी को हिस्सेदार बनाना नहीं चाहता है। वहीं, माना जा रहा है कि हक्कानी नेटवर्क द्वारा कंट्रोल किया गया तालिबान सरकार पाकिस्तान के पक्ष में होगा, लिहाजा पाकिस्तान ने हक्कानी नेटवर्क को पूरा समर्थन दे दिया है और अब माना जा रहा है कि हक्कानी नेटवर्क के जरिए पाकिस्तान भारत में आतंकी वारदातों को अंजाम दे सकता है, जबकि तालिबान ने भारत के साथ संबंधों को सुधारने की बात की थी।












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