अमेरिका मेहरबान, पाकिस्तान पहलवान! IMF के बाद FATF जीता, और कितनी मदद देंगे बाइडेन?
अध्यक्ष केटी राजा ने पाकिस्तान को इस लिस्ट से बाहर निकालने का ऐलान करते हुए कहा कि पाकिस्तान को ग्रे सूची से हटा दिया गया है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान की ओर से अभी भी काम किया जाना बाकी है।
वर्ष 2018 से लगातार FATF की ग्रे सूची की जंजीर में जकड़ा पाकिस्तान आखिरकार 4 साल बाद इससे निकलने में कामयाब रहा। आतंकी फंडिंग व मनी लान्ड्रिंग मामलों पर नजर रखने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (FATF) की पेरिस में हुई बैठक में पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में रहने देने या इससे बाहर निकालने का फैसला हुआ। अध्यक्ष केटी राजा ने पाकिस्तान को इस लिस्ट से बाहर निकालने का ऐलान करते हुए कहा कि पाकिस्तान को ग्रे सूची से हटा दिया गया है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान की ओर से अभी भी काम किया जाना बाकी है।

अमेरिका मेहरबान, पाकिस्तान पहलवान
पाकिस्तान को FATF की सूची से बाहर होने में सबसे बड़ा हाथ अमेरिका का बताया जा रहा है। अमेरिका और पाकिस्तान के बीच के संबंध पिछले कुछ समय से बेहद खराब चल रहे थे, विशेषकर इमरान खान के दौर में जब पाक, चीन और रूस संग नजदीकियां बढ़ाने में जुट गया था। लेकिन अब पाकिस्तान में सत्ता परिवर्तन होने के बाद से अमेरिका, पाकिस्तान पर कुछ अधिक मेहरबान होने लगा है। पिछले कई वर्षों से भारत के संग अच्छे संबंध बनाने का हिमायती रहा अमेरिका अब धीरे-धीरे पाकिस्तान के साथ प्यार की पींगे बढ़ाने लगा है।

अल-जवाहिरी की मौत के बाद रिश्ते हुए बेहतर
लंबे वक्त से अंतराष्ट्रीय स्तर पर मदद को तरस रहे पाकिस्तान पर अमेरिका की मेहरबानी थमने का नाम ही नहीं ले रही है। यह सभी जानते हैं FATF में अमेरिका की दादागिरी चलती है। अमेरिका पहले भी इसकी मदद से पाकिस्तान पर अंकुश लगाता रहा है। फिलहाल पाकिस्तान को FATF की सूची से निकालने से पहले भी अमेरिका, पाकिस्तान के लिए काफी कुछ कर चुका है। अमेरिका द्वारा पाकिस्तान की मदद करने की शुरुआत आतंकवादी अयमान अल-जवाहिरी के अमेरिकी ड्रोन हमले में मारे जाने के बाद शुरू हुई। ऐसा माना जाता है कि अल-जवाहिरी के मरने में पाकिस्तान ने अमेरिका की मदद जिसके बाद दोनों देशों के बीच रिश्तो में जमी बर्फ पिघलनी शुरू हुई।

आईएमएफ से पाकिस्तान का समझौता
जवाहिरी की मौत का अहसान अमेरिका ने चुकाया भी। जवाहिरी के मारे जाने के ठीक एक महीने के बाद अगस्त में अचानक आईएमएफ और पाकिस्तान के बीच 1.6 अरब डॉलर के लोन को लेकर समझौता हो गया और आईएमएफ पाकिस्तान को राहत पैकेज देने के लिए तैयार हो गया। आश्चर्य कि बात ये है कि इसी आईएमएफ ने इमरान खान की सरकार से बातचीत तक बंद कर दी थी। इसका फायदा ये हुआ कि दिवालिया होने की कगार पर खड़े पाकिस्तान को फिर से जीवनदान मिल गया। वर्ना लगातार घट रहे विदेशी मुद्रा भंडार और गोल्ड रिजर्व के कारण पाकिस्तान के लिए कर्ज की किस्तें चुकाना भी बहुत बड़ी चुनौती साबित हो रहा था।

एफ-16 विमान की मरम्मत के लिए 37 अरब की मदद
अमेरिका पाकिस्तान की मदद करने यही तक नहीं रुका। अमेरिकी विदेश विभाग ने सितंबर महीने में पाकिस्तान को 450 मिलियन डॉलर का एफ-16 विमान के मरम्मत के लिए पैकेज जारी कर दिया। भारत की आपत्तियों के बावजूद, सीनेट यानी अमेरीकी कांग्रेस के उच्च सदन में इसे लेकर 30 दिनों के अंदर कोई आपत्ति नहीं जताई गई। दरअसल एफ-16 विमान का इस्तेमाल पाकिस्तान 2019 के भारत-पाकिस्तान संघर्ष में कर चुका है। भारत के विरोध जताने के बाद अमेरिका ने कहा कि उसके लिए भारत और पाकिस्तान दोनों अलग अलग रणनीतिक महत्व रखते हैं। खैर आईएमएफ से लोन, एफ-16 के नाम पर 37 अरब की मदद के बाद अब अमेरिका का पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट बाहर निकालना यह साबित करता है कि इस्लामाबाद अभी भी वाशिंगटन का उपयोग करना जानता है।
पाकिस्तान में 6 गधे गिरफ्तार, पुलिस की नाक में कर रखा था दम, अब लगाना होगा कोर्ट का चक्कर












Click it and Unblock the Notifications