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असली प्रोफेसर एन जॉन कैम कौन हैं? योगी आदित्यनाथ को फ्रांस भेजने की मांग करने वाले ट्वीट की पड़ताल

Who Is Real Professor N John Camm: फ्रांस में 17 साल के मुस्लिम लड़के की हत्या के बाद भीषण हिंसा हो रही है और अभी तक 1300 से ज्यादा दंगाइयों को गिरफ्तार किया गया है। फ्रांस में हिंसा करने वाले मुस्लिम समुदाय के लोग हैं, लिहाजा भारत में फ्रांस में लगी आग की तपिश का पहुंचना स्वाभाविक ही था।

लेकिन, आज सुबह से सोशल मीडिया पर 'प्रोफेसर एन जॉन कैम' के नाम से एक ट्वीट काफी वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने कहा है, कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ फ्रांस की आग को बुझाने की काबिलियत रखते हैं। 'प्रोफेसर एन जॉन कैम' के ट्वीट को योगी आदित्यनाथ के दफ्तर ने भी रीट्विट किया है, लिहाजा कई लोग सोच रहे हैं, कि ये ट्वीटर अकाउंट असली है।

Professor N John Camm

लेकिन सोशल मीडिया पर एक तबका प्रोफेसर एन जॉन कैम को ही फर्जी कह रहा है, लिहाजा जानना जरूरी हो जाता है, कि प्रोफेसर एन जॉन कैम कौन हैं, क्या प्रोफेसर एन जॉन कैम असली हैं, या उनका ये अकाउंट फर्जी हैं, उनके लेकर कई तरह के दावे किए जा रहे हैं, लिहाजा आइये फैक्ट चेक करते हैं।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा ट्वीट

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यालय ने शनिवार को उस ट्वीट पर प्रतिक्रिया जारी की है, जो वायरल हो रहा है और जिसमें सुझाव दिया गया था, कि योगी आदित्यनाथ को 24 घंटे की समय सीमा के भीतर चल रहे दंगों को संभालने के लिए फ्रांस भेजा जाना चाहिए।

अपने आधिकारिक ट्वीट में, योगी आदित्यनाथ के कार्यालय के सत्यापित ट्वीटर हैंडल ने कानून और व्यवस्था स्थापित करने में "योगी मॉडल" की प्रभावशीलता पर प्रकाश डाला, जिसमें कहा गया, कि जब भी दुनिया में कहीं भी चरमपंथ दंगों और अराजकता को बढ़ावा मिलता है, तो लोग "योगी मॉडल" को याद करते हैं और योगी मॉडल को लागू करने की मांग करते हैं।

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असली प्रोफेसर एन जॉन कैम कौन हैं?

योगी आदित्यनाथ के हस्तक्षेप की मांग करने वाला ट्वीट प्रोफेसर एन जॉन कैम नाम के एक अकाउंट से आया है, जिसमें उनको लेकर एक वरिष्ठ इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट होने का दावा किया गया है। हालांकि, सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं के बीच खाताधारक की असली पहचान को लेकर संदेह सामने आया है और पड़ताल में तमाम सबूत यही इशाला करते हैं, कि असल में ये अकाउंट प्रोफेसर एन जॉन कैम के नाम से फर्जी बनाया गया है और शायद असली प्रोफेसर एन जॉन कैम को इस ट्वीट के बारे में कोई जानकारी भी नहीं होगी।

ऐसी अटकलें लगाई गईं हैं, कि यह हैंडल वास्तव में डॉ. नरेंद्र विक्रमादित्य यादव का है, जिन्हें पहले धोखाधड़ी के एक मामले में गिरफ्तारी का सामना करना पड़ा था।

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वहीं, डॉ. रोहिन फ्रांसिस, जो प्रोफेसर एन जॉन कैम के साथ काम कर चुके हैं, उन्होंने इस मामले में कुछ खुलासा करने की बात कही है।

सलाहकार हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. रोहिन फ्रांसिस ने ट्विटर पर एन जॉन कैम के संबंध में अपनी टिप्पणियों और निष्कर्षों को साझा करते हुए इस मामले पर कुछ खुलासा किया है। फ्रांसिस ने कार्डियोलॉजी हलकों में एन जॉन कैम को पहचानने की बात कही है।

डॉ. रोहिन फ्रांसिस ने प्रोफेसर एन जॉन कैम की पहचान एक ऐसे शख्स के तौर पर की है, जो कार्डियोलॉडी डिपार्टमेंट के डॉक्टर हैं, और जो अकसर एलजीबीटीक्यू विरोधी ट्वीट्स करते रहते हैं। डॉ. रोहिन फ्रांसिस ने प्रोफेसर एन जॉन कैम को नस्लवादी मानसिकता से प्रेरित बताया है। हालांकि, डॉ. रोहिन फ्रांसिस के दावों में कितना दम है, इसकी हम पुष्टि नहीं कर रहे हैं।

डॉ. रोहिन फ्रांसिस की जांच में दावा किया गया है, कि असली प्रोफेसर जॉन कैम लंदन के सेंट जॉर्ज अस्पताल में कार्डियोलॉजी डिपार्टमेंट में काम कर चुके हैं।

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डॉ. रोहिन फ्रांसिस ने अपनी जांच के बाद कहा है, कि भारत में जिस शख्स का ट्वीट वायरल हो रहा है, असल में वो वास्तविक प्रोफेसर एन जॉन कैम नहीं हैं और उनकी तस्वीर को फोटोशॉप किया गया है और फर्जी ट्वीटर अकाउंट तैयार किया गया है।

वहीं, प्रोफेसर एन जॉन कैम के नाम से बनाए गये फर्जी ट्वीटर अकाउंट में एक बैनर लगाया गया है, जिसमें दावा किया गया है, कि राजस्थान में प्रोफेसर एन जॉन कैम इंस्टीट्यूट साल 2027 में खोला जाएगा और एक बिल्डिंग कॉम्पैक्स की फोटो दिखाई गई है, लेकिन पड़ताल में पता चला है, कि वो एक बिल्डिंग कॉम्प्लैक्स का स्टॉक इमेज है, जिसका अस्पताल की वास्तविकता से कोई लेना देना नहीं है।

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जांच में तब दिलचस्प मोड़ आ गया, जब डॉ. फ्रांसिस ने पाया कि प्रोफेसर के नाम से खोले गये इस अकाउंट को चलाने वाला का असली नाम नरेंद्र विक्रमादित्य यादव मालुम होता है। इसके अलावा, डॉक्टर को पता चला, कि असली नरेंद्र विक्रमादित्य यादव, जिन्हें पहले एन जॉन कैम के नाम से जाना जाता था, वो कई सालों तक सस्पेंड रह चुके हैं और उसी वजह से उन्होंने अपना नाम बदल लिया। उन्हें यहां तक कि अपहरण सहित कई अन्य आरोपों में भी भारत में गिरफ्तार किया गया था।

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