Explainer: इमैनुएल मैक्रों को क्यों बदलने पड़े दो साल में पांच प्रधानमंत्री? छठवें की क्या संभावना?
Explainer: फ्रांसी के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने पद से इस्तीफा देने के कुछ दिनों बाद ही सेबेस्टियन लेकोर्नू को फिर से प्रधानमंत्री नियुक्त कर दिया है। यह कदम फ्रांस को एक और राजनीतिक संकट में धकेलने से बचाने के मैक्रों के प्रयास का हिस्सा है, लेकिन इस फैसले का राजनीतिक हलकों में तीखा विरोध हुआ है।
दोबारा अपोइंटमेंट से हुआ बवाल
लेकोर्नू के इस्तीफे की घोषणा के कुछ ही दिनों बाद यह अचानक हुई दोबारा नियुक्ति प्रमुख राजनीतिक सहयोगियों के साथ-साथ विपक्ष के भी निशाने पर आ गई है। मैक्रों का यह फैसला देश में राजनीतिक स्थिरता लाने की कोशिश माना जा रहा है, लेकिन इस तरह पलटी मारने पर अब मैक्रों की आलोचना हो रही है।

दो साल में 5 प्रधानमंत्री
पिछले दो सालों में, लेकोर्नू पांचवें ऐसे प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने यह पद संभाला है। एलिजाबेथ बॉर्न के इस्तीफे के बाद से फ्रांस का शीर्ष कार्यालय लगातार बदलावों का सामना कर रहा है। लेकोर्नू से पहले, गैब्रियल अटाल, मिशेल बार्नियर और फ्रांकोइस बायरो प्रधानमंत्री रह चुके हैं।
फ्रांस बजट बना चुनौती
लेकोर्नू को सोमवार को 2026 का बजट प्रस्तावित करना है, ताकि साल के अंत तक सामान्य प्रक्रिया के माध्यम से कानून को अपनाया जा सके। यदि ऐसा नहीं होता है, तो सरकार को वित्त पोषित रखने के लिए नेशनल असेंबली को एक आपातकालीन विधेयक पारित करना होगा।
बैलेंस बिठाने की एक और कवायद
लेकोर्नू को एक और मौका देकर, मैक्रों अगले सरकार को गिरने से रोकने के लिए राजनीतिक संतुलन खोजने का प्रयास कर रहे हैं, जिसके बाद मध्यावधि चुनाव जरूरी हो जाएंगे और राजनीतिक अस्थिरता का एक नया दौर शुरू हो जाएगा।
लेकोर्नू की अपील
लेकोर्नू ने शुक्रवार देर रात सोशल मीडिया पर एक बयान में कहा, "हमें इस राजनीतिक संकट को समाप्त करना होगा, जो फ्रांस के लोगों को परेशान कर रहा है, और इस अस्थिरता को भी खत्म करना होगा, जो फ्रांस की छवि और उसके हितों के लिए हानिकारक है।"
छठवां प्रधानमंत्री बनाने की ओर
अगर फ्रांस कैबिनेट बनाने और बजट पारित करने में विफल रहता है, तो मैक्रों को एक बार फिर संसदीय चुनाव बुलाने या एक साल में अपना छठा प्रधानमंत्री चुनने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। राष्ट्रपति पर इस्तीफा देने का भी दबाव हो सकता है, हालांकि मैक्रों ने पहले ही कहा है कि वह पद नहीं छोड़ेंगे।
It's A Bad Joke
मरीन ले पेन की धुर-दक्षिणपंथी नेशनल रैली के नेता जॉर्डन बारडेला ने पुनर्नियुक्ति की घोषणा के बाद सोशल मीडिया पर लिखा कि लेकोर्नू का प्रधानमंत्री के रूप में वापस आना "एक बुरा मजाक" और फ्रांस के लोगों के लिए अपमान है।
बारडेला ने कहा, "नेशनल रैली निश्चित रूप से इस बिना किसी भविष्य वाली टीम को तुरंत खारिज कर देगी, फिलहाल एक ही बात इन्हें रोक रही है वो है जनता का डर।" नेशनल रैली की नेता मरीन ले पेन ने कहा, "सभी राजनीतिक दल जिन्होंने इमैनुएल मैक्रों को इस शर्मनाक हेरफेर को लागू करने के लिए आवश्यक समय दिया, उन्हें अगले चुनावों में इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।"
सोशलिस्ट और ग्रीन पार्टी का विरोध
सोशलिस्ट पार्टी के प्रवक्ता स्टीफन ट्राउसेल ने भी इस पुनर्नियुक्ति को फ्रांसीसी लोगों के लिए 'एक बुरा मजाक' बताया। उन्होंने कहा, "यह एक तमाशा है, जिसमें इमैनुएल मैक्रों मुख्य किरदार हैं। लाखों नागरिकों के लिए एक बुरा मजाक जो बदलाव और भविष्य की उम्मीद करते हैं। वे निश्चिंत रह सकते हैं कि इस राष्ट्रपति का शासन जल्द ही समाप्त होने वाला है।"
मैक्रों के इस कदम का ग्रीन पार्टी की नेता मरीन टोंडेलियर ने भी विरोध किया। उन्होंने कहा, "भरोसा नहीं होता कि मैक्रों ऐसा करने की अनुमति देंगे, अपने एक बहुत करीबी दोस्त को फिर से नियुक्त करेंगे, जबकि यह स्पष्ट है कि उन्हें वामपंथियों और पर्यावरणविदों को मौका देना चाहिए।"
लेकोर्नू का इस्तीफा और राजनीतिक उठापटक
लेकोर्नू ने 6 अक्टूबर को एक नई कैबिनेट का खुलासा होने के 24 घंटे से भी कम समय में प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने अपने अचानक इस्तीफे के लिए नेशनल असेंबली में राजनीतिक उठापटक को जिम्मेदार ठहराया था। अपने इस्तीफे के दिनों बाद, सेबेस्टियन लेकोर्नू ने मध्यावधि चुनावों की संभावना को काफी हल्के में लिया और कहा कि साल के अंत तक फ्रांस के बजट पर एक समझौता हो सकता है।
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