भारत के खिलाफ चीन का सबसे बड़ा कदम, पाकिस्तान को दे सकता है हाइपरसोनिक हथियार, S-400 होगा बेकार?
एस-400 की बहुमुखी प्रतिभा का मतलब है, कि पाकिस्तान ने भारत द्वारा इसके अधिग्रहण को एक खतरा माना है, क्योंकि यह मिसाइस सिस्टम पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र में भी विमानों को मार गिरा सकती है।
बीजिंग, जनवरी 26: भारत के सबसे बड़े दुश्मन ड्रैगन ने भारत के दूसरे सबसे बड़े दुश्मन चीन को महाविध्वंसक मिसाइल देने की योजना बनाई है और रिपोर्ट है कि, चीन पाकिस्तान को हाइपरसोनिक मिसाइल दे सकता है। रिपोर्ट है कि, भारत के एस-400 मिसाइल सिस्टम को बेकार करने के लिए चीन ये कदम उठा सकता है।

चीन की सीमा पर एस-400 की तैनाती
हिंदुस्तान टाइम्स की हालिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि, भारतीय वायुसेना रूस से आयातित एस-400 मिसाइल सिस्टम की तैनाती चीन की सीमा पर करने जा रही है और इसी साल अप्रैल महीने से रूस द्वारा निर्मित एस-400 मिसाइल सिस्टम फंक्शन में आ जाएगा और एस-400 मिसाइल सिस्टम को उन इलाकों में तैनात किया जाएगा, जहां से चीन भारत के खिलाफ संभावित हमला कर सकता है। भारतीय वायु सेना ने पहले वायु रक्षा प्रणाली के उन्नत सेंसर और मिसाइलों की सरणी को देखते हुए एस-400 को 'गेम चेंजर' बताया है। एस-400 चार प्रकार की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों को खत्म करने का काम कर सकता है, जिनकी रेंज 40 किमी से 400 किमी तक हो सकती हैं। एस-400 मिसाइल सिस्टम से कई प्रकार के लक्ष्यों जैसे विमान, क्रूज मिसाइल, बम और कई प्रकार की बैलिस्टिक मिसाइलों को मार गिरा सकती हैं।

पाकिस्तान को हाइपरसोनिक मिसाइल?
एस-400 की बहुमुखी प्रतिभा का मतलब है, कि पाकिस्तान ने भारत द्वारा इसके अधिग्रहण को एक खतरा माना है, क्योंकि यह मिसाइस सिस्टम पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र में भी विमानों को मार गिरा सकती है। लेकिन, अब चीन की तरह से इस बात के संकेत दिए गये हैं, कि चीन पाकिस्तान को हाइपरसोनिक मिसाइल दे सकता है। चीन की सेना के एक विशेषज्ञ ने पिछले हफ्ते डिफेंस न्यूज को बताया कि, चीन, पाकिस्तान को एस-400 का मुकाबला करने के लिए हाइपरसोनिक हथियारों तक पहुंच की अनुमति दे सकता है। अगर चीन पाकिस्तान को हाइपरसोनिक हथियार बेचता है, तो भारत के खिलाफ उसका सबसे बड़ा कदम होगा। हालांकि, एस-400 मिसाइल सिस्टम के पास हाइपरसोनिक मिसाइलों को भी मार गिराने की क्षमता होने का दावा रूस के द्वारा किया गया है, लेकिन अभी तक इसकी टेस्टिंग नहीं की
गई है।

विध्वंसक होते हैं हाइपरसोनिक हथियार
आपको बता दें कि, हाइपरसोनिक हथियार अभी दुनिया के कुछ ही देशों के पास है, जिनमें अमेरिका के अलावा रूस और चीन शामिल हैं। भारत भी हाइपरसोनिक हथियार बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। हाइपरसोनिक हथियारों की स्पीड साउंड की स्पीड से करीब पांस से छह गुना ज्यादा तेज होती हैं और भारत जिस हाइपरसोनिक हथियार का निर्माण कर रहा है, उसकी स्पीड चीनी हाइपरसोनिक हथियार से भी ज्यादा है। लेकिन, डिफेंस एक्सपर्ट्स के मुताबिक, भारत को हाइपरसोनिक हथियार बनाने में अभी करीब 5 से 6 साल का वक्त और लग सकता है। हाइपरसोनिक हथियारों की दूसरी सबसे बड़ी खासियत ये होती है, कि इसे दुनिया में मौजूद ज्यादातर राडार सिस्टम ट्रैक नहीं कर सकते हैं। रिचर्ड डी. फिशर, जो इंटरनेशनल असेसमेंट एंड स्ट्रैटेजी सेंटर में सीनियर फेलो हैं, उन्होंने अमेरिकी कांग्रेस में चीन की सैन्य प्रगति के बारे में गवाही दी है और बीजिंग के सशस्त्र बलों पर विस्तार से लिखा है।

भारत के खिलाफ चीन का कदम
रिचर्ड डी. फिशर ने डिफेंस न्यूज को बताया कि, इस बात की बहुत संभावना है, कि चीन ने उत्तर कोरिया को हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल यानि एचजीवी मिसाइल वारहेड बनाने में काफी मदद की है और चीन की मदद से ही उत्तर कोरिया एचजीवी बनाने में कामयाब हो पाया है और अब इस बात की काफी ज्यादा संभावना है, कि चीन अब पाकिस्तान को भी एचजीवी की सहायता दे सकता है, या शायद दे रहा होगा। उन्होंने कहा कि, हो सकता है अभी चीन सिर्फ पाकिस्तान को डीएफ-17 मिसाइल ही बेच रहा हो। लेकिन, उन्होंने कहा कि, अब बीजिंग के पास उत्तर कोरिया को पाकिस्तान के हाथों एचजीवी बेचने की इजाजत देने का भी विकल्प है। आपको बता दें कि, हाइपरसोनिक ग्लाइड वाहन यानि एटजीवी एक प्रकार का हाइपरसोनिक हथियार है, जो एक बैलिस्टिक मिसाइल पर लगाया जाता है और ऊपरी वायुमंडल में छोड़ा जाता है, जिसके बाद यह अपने लक्ष्य पर अटैक करता है।

डीएफ-17 की क्षमता को जानिए
अमेरिकी खुफिया अनुमानों के अनुसार चीन के डीएफ-17 मिसाइल की मारक क्षमता लगभग 2,500 किमी है और यह ध्वनि की गति से पांच से 10 गुना अधिक गति से चलती है। माना जाता है कि चीनी सेना ने डीएफ-17 को सेवा में शामिल कर लिया है। वहीं, पाकिस्तानी विश्लेषकों ने भी पहले एस-400 की तैनाती का मुकाबला करने के लिए हाइपरसोनिक हथियार विकसित करने के पक्ष में तर्क दिया है। इसके साथ ही फिशर ने डिफेंस न्यूज को बताया कि, इस मिसाइल के अलावा भी चीन अपनी हाई टेक्नोलॉजी सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें पाकिस्तान को देकर उसकी मदद कर सकता है, जो भारतीय वायु सेना को आक्रामक अभियान चलाने से रोक सकता है।

चीन के पास हैं एस-400 मिसाइल सिस्टम
आपको बता दें कि, भारत ने अब टीन से एस-400 मिसाइल सिस्टम खरीदा है, लेकिन चीन पहले ही रूस से एस-400 और एस-300 मिसाइल प्रणाली खरीद चुका है। चीन ने सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों का एचक्यू-9 की फैमिली माने जाने वाले एस-300 के स्वदेशी संस्करण को विकसित कर लिया है, जिन्हें पहले ही पाकिस्तान को बेचा जा चुका है। डिफेंस एक्सपर्ट फिशर ने डिफेंस न्यूज को बताया कि, "चीन द्वारा अधिग्रहित एस-300 परिवार के बाद के अगले वेरिएंट की तरह एचक्यू-9 में हार्ड-टू-जैम चरणबद्ध सरणी मार्गदर्शन और ट्रैकिंग रडार दिखाया गया है, और इसकी मिसाइल टर्मिनल नेविगेशन के लिए एक एक्टिव रडार का उपयोग करती है।"

क्या कहते हैं पाकिस्तानी डिफेंस एक्सपर्ट?
पाकिस्तान स्थित थिंक टैंक सेंटर फॉर इंटरनेशनल स्ट्रैटेजिक स्टडीज के सीनियर फेलो मंसूर अहमद ने डिफेंस न्यूज को बताया कि, पाकिस्तान एस-400 का इस्तेमाल करने वाले अपने दो सहयोगियों की मदद भी ले सकता है। अहमद का इशारा चीन के साथ साथ तुर्की भी है। तुर्की ने भी रूस से एस-400 मिसाइल सिस्टम खरीदा हुआ है और मंसूर अहमद के मुताबिक, "पाकिस्तान कम से कम परोक्ष रूप से भारतीय एस -400 सिस्टम को दबाने और हराने के अवसरों की खोज के लिए अपनी [एस -400 की] ताकत और कमजोरियों की पहचान करने में मदद मिल सकती है"। उन्होंने कहा कि, अगर तुर्की या चीन पाकिस्तान को एस-400 मिसाइल सिस्टम तक पहुंचने की इजाजत देता है, तो पाकिस्तान एस-400 मिसाइल सिस्टम के रडार को चकमा देने के लिए इलेक्ट्रॉनिक काउंटरमेशर्स विकसित कर सकता है, और एस-400 मिसाइस सिस्टम की मारक क्षमता को बहुत हद तक कम कर सकता है।
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