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हेलीकॉप्टर में कैश भरकर भागने के आरोपों पर पूर्व अफगान राष्ट्रपति अशरफ गनी ने तोड़ी चुप्पी, कही ये बात

काबुल, 8 सितंबर: बीते महीने अमेरिकी फौजों के लौटने के बाद तालिबान ने अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया था। काबुल के तालिबान के कब्जे में आने के बाद उस समय के राष्ट्रपति अशरफ गनी देश छोड़कर फरार हो गए थे। अशरफ गनी के देश छोड़ने के बाद कहा गया था कि वो कई बक्शों में नकदी भरकर अपने हेलीकॉप्टर में ले गए हैं। अशरफ गनी ने अफगानिस्तान छोड़ने के 24 दिन बाद इस पर अपनी सफाई दी है। एक बयान जारी करते हुए उन्होंने कहा कि उन पर लगाए गए लाखों डॉलर लेकर भागने के आरोप बेबुनियाद और मनगढ़ंत हैं।

काबुल छोड़ना था बहुत मुश्किल फैसला

काबुल छोड़ना था बहुत मुश्किल फैसला

बुधवार को जारी अपने बयान में पूर्व अफगान राष्ट्रपति अशरफ गनी ने कहा है कि 15 अगस्त को तालिबान के शहर में दाखिल हो जाने के बाद मैंने काबुल छोड़ दिया था। मुझे लगता है कि ये मेरी जिम्मेदारी है कि इस तरह से काबुल छोड़ने के अपने फैसले के बारे में लोगों को बताऊं। गनी ने कहा, काबुल छोड़ना मेरे जीवन का सबसे मुश्किल फैसला था लेकिन मेरा बंदूकों को चुप रखने और अफगान नागरिकों को बचाने का यही अकेला तरीका था। वहां मेरी जान को भी खतरा था, ऐसे में मैंने शहर छोड़ देना ही मुनासिब समझा।

मेरे नकदी लेकर भागने की बात गलत

मेरे नकदी लेकर भागने की बात गलत

अशरफ गनी ने अपने बयान में आगे रहा है मुझे बहुत सी बातें अफगानिस्तान के लोगों से कहनी हैं लेकिन फिलहाल एक आरोप की सफाई देना बहुत जरूरी है। कई मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि काबुल से निकलते वक्त मैं लाखों डॉलर अपने साथ लाया। ये आरोप पूरी तरह से गलत हैं, मैं अफगान के लोगों का कोई पैसा अपने साथ नहीं लाया। इन बातों में किसी तरह की कोई सच्चाई नहीं है।

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    गनी ने पहले भी जारी किया था वीडियो

    अशरफ गनी ने 15 अगस्त को अफगानिस्तान छोड़ने के दिन बाद संयुक्त अरब अमीरात में शरण ली थी। इसके तीन दिन बाद 18 अगस्त को उन्होंने एक वीडियो जारी किया था। गनी ने अपने वीडियो मैसेज में कहा था कि अगर वह काबुल से नहीं भागते तो उनका भी हाल अफगानिस्‍तान के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नजीबुल्लाह की तरह होता। सुरक्षा अधिकारी मुझे बार-बार चेतावनी दे रहे थे, आगाह कर रहे थे कि तालिबान मेरा भी वही हाल करना चाहते हैं, जो उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नजीबुल्लाह का किया था। इसलिए मैं बिना किसी सामान को लिए वहां से जल्दी निकल गया। तालिबान मुझे खोजने के लिए काबुल के चप्पे-चप्पे में थे। वे मुझे खोजने के लिए हर घर में तलाशी ले रहे थे। तालिबान ने 25 साल जो पहले हुआ, वही दोहराने वाले थे। अफगानिस्तान के राष्ट्रपति को एक बार फिर लोगों की आंखों के सामने फांसी दी जाने वाली थी और ऐसा शर्मनाक इतिहास एक बार फिर दोहराया जाने वाला था। जो मैं नहीं चाहता था।

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