यूरोपीय संघ ने पेगासस स्पाईवेयर के इस्तेमाल से हैकिंग की निंदा की

यूरोपीय संघ के न्याय आयुक्त डिडियर रेयंडर्स ने यूरोपीय संसद से कहा है कि पेगासस स्पाईवेयर जासूसी विवाद के बाद कार्यकर्ताओं, पत्रकारों और नेताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए तेजी से कानून बनाना चाहिए. उन्होंने कहा कि अवैध फोन हैकिंग के अपराधियों पर मुकदमा चलाया जाना चाहिए.

eu commissioner calls for urgent action against pegasus spyware

रेयंडर्स ने यूरोपीय संसद के सदस्यों को बताया कि यूरोपीय आयोग ने राष्ट्रीय सुरक्षा सेवाओं द्वारा अपने फोन के माध्यम से राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ अवैध रूप से जानकारी जुटाने के कथित प्रयासों की "पूरी तरह से निंदा" की है.

रेयंडर्स ने कहा, "कोई भी संकेत है कि गोपनीयता की इस तरह की घुसपैठ वास्तव में हुई है तो इसकी पूरी तरह से जांच की जानी चाहिए और संभावित उल्लंघन के लिए जिम्मेदार लोगों को न्याय के दायरे में लाया जाना चाहिए. यह निश्चित रूप से, यूरोपीय संघ के प्रत्येक सदस्य देश की जिम्मेदारी है." उन्होंने आगे कहा, "मुझे उम्मीद है कि पेगासस के मामले में सक्षम अधिकारी आरोपों की पूरी तरह से जांच करेंगे और भरोसा कायम करेंगे."

उन्होंने साथ ही कहा कि ईयू की कार्यकारी शाखा हंगरी के डेटा संरक्षण प्राधिकरण की जांच का बारीकी से पालन कर रही है, जिसमें दावा किया गया था कि प्रधानमंत्री विक्टर ओरबान की सरकार पत्रकारों, मीडिया मालिकों और विपक्षी नेताओं की पेगासस सॉफ्टवेयर के साथ निशाना बनाने वालों में शामिल थी.

पेगासस एक स्पाईवेयर है जिसके जरिए स्मार्टफोन्स हैक करके लोगों की जासूसी की जा सकती है. यह पहली बार नहीं है जब पेगासस का नाम जासूसी संबंधी विवादों में आया हो. 2016 में भी कुछ शोधकर्ताओं ने कहा था कि इस स्पाईवेयर के जरिए युनाइटेड अरब अमीरात में सरकार से असहमत एक कार्यकर्ता की जासूसी की गई.

अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थाओं जैसे वॉशिंगटन पोस्ट, गार्डियन और ला मोंड व जर्मनी में ज्यूडडॉयचे त्साइटुंग ने पेगासस जासूसी कांड की जांच में हिस्सा लिया था. जांच के बाद दावा किया गया है कि 50 हजार फोन नंबरों को जासूसी के लिए चुना गया था. इनमें दुनियाभर के 180 से ज्यादा पत्रकारों के फोन नंबर शामिल हैं.

इस बीच भारतीय सुप्रीम कोर्ट में पेगासस विवाद पर सुनवाई चल रही है. कोर्ट विभिन्न दिशा-निर्देशों की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है. अगले कुछ दिनों में सुप्रीम कोर्ट इस मामले में एक अहम आदेश जारी कर सकती है.

एए/सीके (एएफपी, एपी)

Source: DW

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