शांति का नोबेल: 'नो पीस, नो वार' के रास्ते 20 साल का खून खराबा बंद कराने वाले 43 साल के अबी अहमद को जानिए
ओस्लो। इथोपिया के राष्ट्रपति अबी अहमद को साल 2019 के नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित करने का ऐलान शुक्रवार किया गया था। अबी अहमद जिनका पूरा नाम अबी अहमद अली है उन्हें प्रतिद्वंदी इट्रीया के साथ देश के कई दशकों से चले आ रहे संघर्ष को सुलझाने की दिशा में किए गए प्रयासों की वजह से इस पुरस्कार से नवाजा जाएगा। नोबेल कमेटी की ओर से इस बात का ऐलान किया गया। दिसंबर माह में नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में यह पुरस्कार दिया जाएगा। इस वर्ष यह 100वां नोबेल शांति पुरस्कार है।

अबी अहमद के नाम ने सबको चौंकाया
नोबेल शांति पुरस्कार के लिए इस बार स्वीडन की 16 साल की क्लाइमेट एक्टिविस्ट ग्रेटा थुनबर्ग और जर्मन चासंलर एंजेला मार्केल के अलावा हांगकांग के कार्यकर्ताओं का नाम भी शामिल था। लेकिन ज्यूरी ने सबको चौंकाते हुए अबी अहमद को पुरस्कार देने का ऐलान किया। ज्यूरी की ओर से कहा गया, 'शांति और अंतराष्ट्रीय सहयोग की दिशा में अबी के प्रयास सराहनीय हैं, खासतौर पर जिस तरह से उन्होंने इट्रीया के साथ सीमा विवाद को सुलझाने की पहल की, वह प्रशंसनीय है।' उन्होंने इरिट्रिया के राष्ट्रपति इसाइस अफवर्की के साथ शांति पर लगातार चर्चा की और 'नो पीस, नो वार' सिद्धांत पर समझौता किया।

15 अगस्त को हुआ जन्म
15 अगस्त 1976 को इथोपिया के बेशाहशा में मुस्लिम पिता और क्रिश्चियन मां की संतान अबी अहमद ने पिछले वर्ष देश की कमान संभाली थी। वह एक ऐसे घर में रहते थे जहां पर बिजली और पानी नहीं था। पिछले माह रेडियो शेगर एफएम को दिए दिए इंटरव्यू में 43 साल के अबी अहमद ने बताया था, 'हमें नदी से पानी लाना पड़ता था। सातवीं कक्षा तक मैंने न तो बिजली देखी थी और न ही कंक्रीट की बनी सड़क।' अपनी तंगी और व्यक्तिगत संघर्षों को अबी ने कभी आड़े नहीं आने दिया। वह मुश्किलों के बाद भी आगे बढ़ते रहे।

एक आर्मी ऑफिसर रहे हैं अबी अहमद
अबी अहमद किशोावस्था में सेना का हिस्सा बन गए थे। उन्होंने मिलिट्री इंटेलीजेंस यूनिट को ज्वॉइन किया और बतौर मिलिट्री ऑफिसर कई अहम काम किए। लेकिन अप्रैल 2018 में जब उन्होंने पीएम पद संभाला तो राजनीतिक और आर्थिक सुधारों को आगे बढ़ाया। सरकार में शामिल होने से पहले वह लेफ्टिनेंट कर्नल की रैंक से रिटायर हुए हैं। उन्हें टेक्नोलॉजी का खासा शौक है और वह इथोपिया की साइबर जासूसी यूनिट के हेड रह चुके हैं।

क्यों मिला है अहमद को नोबेल पुरस्कार
पीएम बनते ही अबी ने साफ कर दिया था कि वह इरिट्रिया के साथ शांति वार्ता को जारी रखेंगे। यह उनकी पहल का नतीजा था कि 20 साल बाद पिछले वर्ष इथोपिया और इट्रीया का बॉर्डर खुला। 20 साल तक दोनों देशों ने बहुत खून खराबा देखा था। पूर्वी अफ्रीका के इन दोनों देशों को साल 1998 में आजादी मिली थी और तब से ही दोनों के बीच सीमा विवाद जारी था।
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