एरिक गार्सेटी हो सकते हैं भारत में US के राजदूत, बाइडेन ने फिर किया नॉमिनेट, दो साल से खाली है पद
भारत में पिछले दो सालों से राजदूत का पद खाली है और बाइडेन के चार सालों में से दो साल का वक्त भी खत्म हो चुका है। लिहाजा, नये राजदूत को भारत में काम करने का काफी कम समय मिलेगा।

US Envoy To India: अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने मंगलवार को लॉस एंजिल्स के पूर्व मेयर एरिक गार्सेटी को भारत में अपने राजदूत के रूप में फिर से नामित किया है। वहीं, व्हाइट हाउस ने भरोसा जताया है, कि इस बार संयुक्त राज्य अमेरिका की सीनेट एरिक गार्सेटी के नाम पर मुहर लगा देगी। व्हाइट हाउस ने सीनेट को एरिक गार्सेटी का नामांकन भेजने के बाद कहा कि, "कैलिफोर्निया के एरिक एम. गार्सेटी, रिपब्लिक ऑफ इंडिया में संयुक्त राज्य अमेरिका के राजदूत पद के लिए असाधारण और पूर्णाधिकारी उम्मीदवार हैं।" मीडिया के एक बयान में कहा गया है, कि आज व्हाइट हाउस उन उम्मीदवारों का नामांकन फिर से शुरू करेगा, जिनकी पिछली कांग्रेस में पुष्टि नहीं हुई थी।

एरिक गार्सेटी फिर से नॉमिनेट
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव काराइन जीन-पियरे ने अपने डेली मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि, "जैसा कि विदेश सचिव एंटनी ब्लिंकन ने हाल ही में कहा था, भारत के साथ हमारा संबंध महत्वपूर्ण है और यह परिणामी है।" आपको बता दें कि, यूएस फॉरेन सर्विस के प्रोफेशनल एसोसिएशन अमेरिकन फॉरेन सर्विस एसोसिएशन (एएफएसए) के आंकड़ों को देखने पर पता चलता है, कि एरिक गार्सेटी का नॉमिनेशन सीनेट के सामने पिछले 16 महीनों से लंबित पड़ा है और एक बार फिर से जो बाइडेन ने उनका नाम नॉमिनेट किया है। सीनेट में 20 राजदूतों का नॉमिनेशनल लंबित पड़ा हुआ है, जिसमें सबसे लंबे वक्त से नॉमिनेशन एरिक गार्सेटी का ही लंबित है।

सीनेट को क्यों नापसंद हैं एरिक
एरिक गार्सेटी को जुलाई 2021 में आधिकारिक रूप से बाइडेन प्रशासन ने भारत में राजदूत बनाने के लिए नामांकित किया गया था, लेकिन सीनेट में उनके नाम पर सहमति नहीं बन पाई। रिपोर्ट के मुताबिक, एरिक गार्सेटी के ऊपर आरोप है, कि उन्होंने अपने एक सहयोगी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की, जबकि उसके खिलाफ यौन उत्पीड़न और पीड़ित को धमकाने का आरोप था। हालांकि, एरिक गार्सेटी ने इन आरोपों का बार बार खंडन किया है। वहीं, बाइडेन प्रशासन भी एरिक गार्सेटी के नामांकन को लेकर अड़ा हुआ है, जबकि 15 दिसंबर को सीनेट में डेमोक्रेटिक पार्टी को बहुमत हासिल हो चुकी है और बाइडेन प्रशासन ने कहा था, कि गार्सेटी का नामांकम उसके लिए प्राथमिकता है और वो गार्सेटी का समर्थन करना जारी रखेगा।

बाइडेन का आधा कार्यकाल खत्म
बाइडेन प्रशासन की प्राथमिकता कैसी है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है, कि उनके 4 साल के कार्यकाल में से 2 साल खत्म हो चुके हैं, लेकिन अभी तक वो भारत में राजदूत नियुक्त नहीं कर पाए हैं। पूर्व भारतीय विदेश सचिव कंवल सिब्बल का कहना है, कि "नामांकन में जिस तरह की देरी पहले ही हो चुकी है, उससे यही लगता है कि, इसने प्राथमिकता की डिग्री खो दी है। इसमें जितना ज्यादा देरी होगा, नियुक्तिकर्ता के पास दिल्ली में उतना ही कम समय होगा"। सिब्बल ने पिछले दिनों दिप्रिंट को बताया था, कि "नियुक्तियों को अपने पैर जमाने में छह महीने का समय लगता है और तब तक नये राष्ट्रपति के चुनाव का वक्त आ जाएगा, लिहाजा जो नया एंबेसडर आएगा, क्या वो अपने पद के साथ इंसाफ कर पाएगा?"

भारत में ही नियुक्ति में सबसे ज्यादा देरी
AFSA के आंकड़ों के मुताबिक, 20 देश ऐसे हैं जिनके अमेरिकी राजदूत नामितों की पुष्टि लंबित है। इनमें शामिल देश हैं, अज़रबैजान, बहामास, बारबाडोस, काबो वर्डे, कंबोडिया, इक्वाडोर, गुयाना, भारत, कुवैत, मालदीव, मोंटेनेग्रो, नाइजर, नाइजीरिया, पापुआ न्यू गिनी और वानुअतु, रवांडा, सऊदी अरब, तिमोर-लेस्ते, तुर्कमेनिस्तान, संयुक्त अरब अमीरात और जिम्बाब्वे। लेकिन, इस साल घोषित किए गये सभी अन्य नॉमिनेशन के विपरीत गार्सेटी एकमात्र ऐसे नॉमिनेशन हैं, जो पिछले 16 महीने से लंबित है। लंबित सूची में भारत एकमात्र एशियाई देश भी है। वहीं, अमेरिका ने पाकिस्तान में आधिकारिक तौर पर पिछले साल अप्रैल में ही अपने राजदूत की नियुक्ति कर दी थी।












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