Epstein Files Kaaba Kiswah: मुस्लिमों का सबसे पवित्र कपड़ा किस्वा, अय्याश एपस्टीन को किसने सऊदी से भेजा?
Epstein Files: एपस्टीन फाइल्स से जुड़े विवाद थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। एक के बाद एक बड़े नेताओं, बिजनेसमेन और पावरफुल लोगों का नाम इसमें आता जा रहा है। इसमें अब एक और नाम जुड़ गया है। दरअसल अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस द्वारा जारी किए गए ईमेल्स के मुताबिक, अमेरिकी सेक्स ऑफेंडर जेफरी एपस्टीन को साल 2017 में इस्लाम के सबसे पवित्र स्थल मक्का में स्थित काबा के पवित्र वस्त्र 'किस्वा' के तीन टुकड़े मिले थे। ये टुकड़े संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और सऊदी अरब के संपर्कों के ज़रिये खरीदे गए और बाद में अमेरिका के वर्जिन आइलैंड्स में स्थित एपस्टीन के निजी निवास पर भेजे गए थे। कहा जा रहा है कि ये किस्वा एपस्टीन को गिफ्ट में दिया गया।
'कलाकृति' बताकर कराया गया कस्टम क्लीयरेंस
इन पवित्र वस्तुओं को अमेरिका भेजते समय सीमा शुल्क से "आर्टवर्क" यानी कलाकृति बताकर क्लीयरेंस कराया गया था। यही बात अब सबसे बड़ा विवाद बन गई है। आमतौर पर किस्वा के टुकड़ों का ट्रांसफर केवल राजनयिक उपहार या धार्मिक उद्देश्यों के लिए किया जाता है, लेकिन एक निजी व्यक्ति द्वारा इसका इस तरह से हासिल किया जाना पवित्रता के उल्लंघन के रूप में देखा जा रहा है।

कैसे बाहर आई जानकारी?
ये ईमेल और जानकारियां "एपस्टीन फाइल्स ट्रांसपेरेंसी एक्ट" के तहत जारी किए गए हजारों दस्तावेज़ों का हिस्सा हैं। इन ईमेल्स की तारीख फरवरी और मार्च 2017 के बीच की बताई जा रही है। दस्तावेज़ों में सऊदी अरब के मक्का शहर से किस्वा के टुकड़ों की खरीद और शिपमेंट से जुड़ी पूरी जानकारी दर्ज है।
UAE और सऊदी संपर्कों की भूमिका
ईमेल के अनुसार, एक अमीराती व्यवसायी अज़ीज़ा अल-अहमदी ने सऊदी अरब में मौजूद अपने संपर्क अब्दुल्ला अल-मारी के साथ मिलकर इस पूरी डील को अंजाम दिया। इन दोनों का मकसद काबा के किस्वा के तीन टुकड़ों को खरीदना और अमेरिका भेजना था। किस्वा काले रंग का वह खास कपड़ा होता है, जिस पर सोने की कढ़ाई की जाती है और जो काबा को पूरी तरह ढकता है।
किस्वा का धार्मिक महत्व
22 मार्च 2017 को भेजे गए एक ईमेल में अज़ीज़ा अल-अहमदी ने किस्वा के गहरे आध्यात्मिक महत्व का ज़िक्र किया था। उन्होंने लिखा कि तवाफ़ के दौरान "कम से कम 10 मिलियन मुसलमानों" ने इन पवित्र कपड़ों को छुआ है। उनके अनुसार, किस्वा के इन टुकड़ों में "प्रार्थनाएं, आंसू और उम्मीदें" समाई हुई हैं। वहीं, एपस्टीन को मिले शिपमेंट में किस्वा के अंदरूनी और बाहरी दोनों हिस्से शामिल थे।
शिपमेंट और लॉजिस्टिक्स का पूरा नेटवर्क
ईमेल्स के मुताबिक, शिपमेंट को "सऊदी अरब से आर्टवर्क" के तौर पर घोषित किया गया था। अमेरिका में इस पूरे लॉजिस्टिक ऑपरेशन को संभालने में एपस्टीन की सहयोगी डैफने वालेस की अहम भूमिका थी। वहीं, चैलमर स्टॉफर नामक व्यक्ति ने कस्टम ड्यूटी क्लीयरेंस और ट्रांसपोर्टेशन का काम संभाला।
मियामी से वर्जिन आइलैंड्स तक का सफर
रिकॉर्ड बताते हैं कि यह पैकेज पहले सऊदी अरब से अमेरिका के मियामी शहर पहुंचा। इसके बाद इसे एपस्टीन के सेंट थॉमस स्थित निजी निवास तक भेजा गया। यह डिलीवरी LSJE LLC नाम की एक कंपनी के तहत की गई थी, जो सीधे तौर पर जेफरी एपस्टीन से जुड़ी मानी जाती है।
इनवॉइस और पेमेंट का पूरा रिकॉर्ड मौजूद
दस्तावेज़ों में इनवॉइस, डिलीवरी कन्फर्मेशन और भुगतान से जुड़ी पूरी जानकारी मौजूद है। इन रिकॉर्ड्स से साफ होता है कि किस्वा के तीनों टुकड़े सफलतापूर्वक एपस्टीन के घर तक पहुंचाए गए थे और इसके लिए बाकायदा भुगतान भी किया गया था।
इस्लाम में किस्वा की धार्मिक अहमियत
किस्वा का इस्लाम में बेहद खास महत्व है। इसे हर साल हज के दौरान बदला जाता है। पुराने किस्वा के टुकड़ों को आमतौर पर राजनयिक उपहार, मस्जिदों या धार्मिक संस्थानों को दिया जाता है। इसका निजी तौर पर इस्तेमाल या गलत तरीके से हासिल करने पर मुस्लिम समुदायों में गंभीर नाराज़गी और विवाद को जन्म दे सकता है।
सोशल मीडिया पर गुस्सा और सवाल
इस खुलासे के बाद सोशल मीडिया पर जबरदस्त बहस छिड़ गई है। लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि एपस्टीन ने इन पवित्र वस्तुओं को क्यों और किस मकसद से मंगवाया था। एपस्टीन के विवादित और कुख्यात अतीत को देखते हुए, इस रहस्यमय खरीद ने दुनियाभर में आक्रोश और शक दोनों पैदा कर दिए हैं।
अब भी जारी है बहस
फिलहाल यह मामला वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। लोग इसे केवल एक कानूनी मुद्दा नहीं, बल्कि धार्मिक और नैतिक सवाल के रूप में भी देख रहे हैं। DOJ के दस्तावेज़ सामने आने के बाद इस विवाद के और गहराने की संभावना जताई जा रही है।
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