किस्सा: तालिबान का गॉडफादर, जिसने अफगानिस्तान की आज की कहानी 30 साल पहले लिख दी थी...

हामिद गुल को पाकिस्तान में भी काफी विवादास्पद शख्स माना गया। जब हामिद गुल की मौत हुई थी, उस वक्त पाकिस्तान में कट्टरपंथियों के विरोधियों ने जश्न मनाया था।

इस्लामाबाद, अगस्त 17: "हामिद गुल मरा नहीं है, वह तालिबान सहित कई जिहादी संगठनों के तौर पर जिंदा है''। ये एक लाइन का परिचय है उस पाकिस्तानी अधिकारी की, जिसने तालिबान को बनाया तो नहीं, लेकिन तालिबान को सींचकर बड़ा करने में उसी का सबसे बड़ा योगदान है। उस अधिकारी का नाम है, हामिद गुल। जिनकी मौत तो हो चुकी है, लेकिन पाकिस्तान में कहा जाता है कि जब तक धरती पर जिहादी संगठन रहेंगे, हामिद गुल उनमें जिंदा रहेंगे। हामिद गुल....पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के चीफ, जिहादियों के संरक्षक और भारत के सबसे बड़े दुश्मन...।

अफगानों का कसाई

अफगानों का कसाई

हामिद गुल को पाकिस्तान में भी काफी विवादास्पद शख्स माना गया। जब हामिद गुल की मौत हुई थी, उस वक्त पाकिस्तान में कट्टरपंथियों के विरोधियों ने जश्न मनाया था, जबकि कट्टरपंथी विचारधारा वालों ने मातम मनाया था। चाहे अमेरिका हो या रूस या फिर अफगानिस्तान...हामिद गुल ने हर जगह आईएसआई को स्थापित कर दिया था। डीड्ब्ल्यू की एक रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान के कई इतिहासकारों ने उन्हें "तालिबान का पिता" कहा, लेकिन ज्यादातर लोग गॉडफादर सटीक शब्द मानते हैं। हामिद गुल ने तालिबान का निर्माण नहीं, उसका पालन पोषण किया था। अफगानिस्तान में हामिद गुल को 'अफगानों का कसाई' भी कहा जाता है।

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    कट्टरपंथियों के बड़े मददगार

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    आज आप अगर पाकिस्तान में कट्टरपंथियों का इतना दबदबा देखते हैं, उसके पीछे दो लोगों का सबसे बड़ा हाथ माना जाता है। एक जिया उल हक को और दूसरा हामिद गुल को। हामिद गुल ना सिर्फ एक पूर्व आईएसआई प्रमुख थे, बल्कि वह पाकिस्तान के रूढ़िवादी वर्गों, दक्षिणपंथी पत्रकारों, मदरसा मौलवियों और धार्मिक छात्रों और पाकिस्तानी सेना के एक शक्तिशाली गुट के विचारक भी थे। इस्लामाबाद के एक कार्यकर्ता अरशद महमूद ने डीडब्ल्यू को बताया कि, "हामिद गुल को अफगान युद्ध के समय सैन्य तानाशाह जनरल जिया-उल-हक की तुलना में अपेक्षाकृत कम जाना जाता है, लेकिन उनकी भूमिका हक की तरह ही हानिकारक थी।" "वह अफगानिस्तान को नष्ट करने के लिए जिम्मेदार हैं, और पाकिस्तान के लिए उसकी विरासत समान रूप से खतरनाक है। अफगान उससे नफरत करते हैं, और ये नफरत ठीक ही है।"

    कश्मीर में अशांति के लिए गुल जिम्मेदार

    कश्मीर में अशांति के लिए गुल जिम्मेदार

    भारत के कश्मीर में जब इस्लामिक चरमपंथियों ने सिर उठाया था, उस वक्त आईएसआई के चीफ हामिद गुल ही थे और माना जाता है कि कश्मीर में मजहबी आतंक का बीज गुल ने ही बोया था। भारत सरकार ने 1989 में हामिद गुल को अफगान युद्ध के साथ साथ श्रीनगर में आतंकियों घटनाओं के पीछे का मास्टरमाइंड बताया था। कश्मीर को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच सात दशकों से ज्यादा समय से विवाद चल रहा है, लेकिन हामिद गुल ने इस विवाद को मजहबी बना दिया। हामिद गुल को अक्सर इस्लामी पार्टियों द्वारा अपनी पश्चिम विरोधी रैलियों में आमंत्रित किया जाता था। जब हामिद गुल की मौत हुई थी, उस वक्त ब्रिटेन में आतंकवाद विरोधी विशेषत्र गफ्फार हुसैन ने फेसबुक पर लिखा था कि, "दुनिया में बहुत अराजकता और रक्तपात के लिए जिम्मेदार एक शख्स का निधन हो गया है, फिर भी पाकिस्तान को एक आतंकवादी पनाहगाह में बदलने में मदद करने की उसकी विरासत जीवित रहेगी।"

    तालिबान का गॉडफादर

    तालिबान का गॉडफादर

    हामिद गुल 1987 से 1989 तक आईएसआई के प्रमुख थे और ये वो दौर था जब सोवियत संघ के खिलाफ अमेरिका समर्थित अफगान जिहाद अपने अंतिम चरण में था। इस्लामवादियों ने उन्हें एक अफगान युद्ध नायक के तौर पर सम्मानित किया, जिसने सोवियत संघ पर ऐतिहासिक जीत के लिए मुजाहिदीन का नेतृत्व किया। अफगानिस्तान से सोवियत सैनिकों की वापसी के बाद जहां अमेरिका ने अफगानिस्तान और पाकिस्तान से मुंह मोड़ लिया, वहीं गुल और उनकी आईएसआई ने काबुल में पाकिस्तान के अनुकूल सरकार स्थापित करने के लिए काम करना जारी रखा। अफगानिस्तान में जब तालिबान सत्ता पर काबिज होने के लिए खूनी लड़ाई लड़ रही थी, उस वक्त हामिद गुल के कहने पर आईएसआई ने भारत समर्थक या रूस समर्थक गुटों के खिलाफ लड़ने के लिए कई इस्लामी समूहों का समर्थन किया।

    अफगानिस्तान को हमेशा रखा अस्थिर

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    हामिद गुल और आईएसआई ने सोवियत सेना के जाने के बाद किसी भी अफगान सरकार को सफल नहीं होने दिया। लंदन में एक पाकिस्तानी शोधकर्ता और पत्रकार फारूक सुलेहरिया ने डीडब्ल्यू को बताया कि, " अफगानिस्तान के इतिहास के सबसे खराब दौर का वास्तुकार हामिद गुल था''। सुलेहरिया ने कहा कि, स्थिति इस हद तक खराब हो गई थी कि जब तालिबान एक ताकत के रूप में उभरा, तो अधिकांश अफगानों के पास उनका स्वागत करने के अलावा कोई विकल्प नहीं था।

    ''अमेरिका को अमेरिका की मदद से हराएंगे''

    हामिद गुल वो शख्स हैं, जिन्होंने अफगानिस्तान को पूरी तरह से कट्टरता के दलदल में डूबोया और इस देश को तबाह कर दिया। पाकिस्तान में एक बार फिर से हामिद गुल काफी चर्चा में हैं, और वजह है उनका दिया गया एक बयान, जिसमें उन्होंने एक पाकिस्तानी चैनल पर दिए बयान में कहा था कि ''आईएसआई ने अमेरिका की मदद से रूस को अफगानिस्तान में हराया और आईएसआई एक दिन अमेरिका की मदद से अफगानिस्तान में अमेरिका को हराएगा''। हामिद गुल भले ही मर चुका है और पाकिस्तान में उसका गुनगान किया जा रहा हो, लेकिन अफगानिस्तान में बर्बादी फैलाने के लिए हामिद गुल को कभी माफ नहीं किया जाएगा।

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