Elon Musk नहीं, शी जिनपिंग के हाथ होगा ट्वीटर का रिमोट? जानिए एलन मस्क और चीन का गहरा रिश्ता
चीन में जितने भी विदेशी निवेशक मौजूद हैं, वो चीनी अधिकारियों की राजी-खुशी से ही चीन में अपना कारोबार कर सकते हैं और उनके सामने ‘लाल रेखा’ पार करने की इजाजत नहीं होती है...
वॉशिंगटन, अप्रैल 30: दुनिया के सबसे अमीर कारोबारी, टेसला के मालिक और स्पेएक्स के सीईओ एलन मस्क ने जब ट्वीटर खरीदने का ऐलान कर दिया, उस वक्त दुनियाभर से प्रतिक्रियाएं आईं। लेकिन, एक प्रतिक्रिया काफी अलग थी और वो प्रतिक्रिया थी, अमेजन कंपनी के सीईओ जेफ बेजोस का, जिन्होंने एलन मस्क और चीन के बीच संबंधों का हवाला देते हुए सवाल उठाया था, कि क्या वाकई ट्वीटर पर चीन का प्रभाव नहीं पड़ेगा? हालांकि, बाद में जेफ बेजोस ने एलन मस्क को क्लीनचिट दे दी थी, लेकिन जेफ बेजोस के सवाल को दरकिनार नहीं किया जा सकता है। आइये जानते हैं, कि क्या वाकई चीन का परोक्ष नियंत्रण ट्वीटर पर हो सकता है और आखिर चीन के साथ एलन मस्क का क्या रिश्ता है?

2019 में शंघाई में खोली टेस्ला की फैक्ट्री
जब एलन मस्क ने 2019 में शंघाई में एक टेस्ला फैक्ट्री खोली, तो चीनी सरकार ने अरबों डॉलर की सस्ती जमीन, ऋण, टैक्स ब्रेक और सब्सिडी के साथ उनका स्वागत किया था और उस वक्त एलन मस्क ने चीन की तारीफ करते हुए कहा था, कि ‘मुझे सच में लगता है कि चीन ही भविष्य है'। तब से टेस्ला की गाड़ियां चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की सड़क पर सरपट भाग रही है, जहां ‘फ्रीडम ऑफ स्पीच' को सड़क पर उतरने की आजादी नहीं है। साल 2021 में एलन मस्क की टेस्ला कंपनी ने दुनियाभर में जितनी कमाई की, उस राजस्व का एक चौथाई हिस्सा चीन से आया, वो भी बगैर किसी समस्याओं के और उस हालत में, जब अमेरिका और चीन की सरकार के संबंध सबसे ज्यादा खराब दौर से गुजर रहे हैं। हालांकि, पिछले साल मैन्युफैक्चरिंग खामियों को लेकर टेस्ला को चीन में उपभोक्ता और नियामक विद्रोह का सामना करना पड़ा था, लेकिन मामला उतना जल्दी ही शांत हो गया।
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ट्वीटर पर पड़ेगा प्रभाव?
चीन में जितने भी विदेशी निवेशक मौजूद हैं, वो चीनी अधिकारियों की राजी-खुशी से ही चीन में अपना कारोबार कर सकते हैं और उनके सामने ‘लाल रेखा' पार करने की इजाजत नहीं होती है और एलन मस्क भी चीन में टेस्ला के लिए यही कर रहे हैं। यहां तक की विश्व की सबसे बड़ी प्रतिष्ठित मोबाइल कंपनी को भी चीन में सेंसरशिप का सामना करना पड़ा था, लेकिन मोबाइल बेचने की खातिर एप्पल कंपनी ने फौरन चीन पर शासन करने वाली कम्युनिस्ट पार्टी की बातें मान ली थीं और फिर एप्पल पर लगा सेंसरशिप हटा। तो क्या ट्वीटर पर फ्री स्पीच की बात करने वाले एलन मस्क का व्यापार ट्वीटर की वजह से चीन में प्रभावित होगा?

ट्वीटर से परेशान कम्युनिस्ट पार्टी
क्योंकि, ट्वीटर से चीन की कम्युनिस्ट पार्टी हमेशा से परेशान रही है और चीन में ट्वीटर है नहीं। लेकिन, कम्युनिस्ट पार्टी के प्रोपेगेंडा को ट्वीटर ने हमेशा से चुनौती दी है और लेकिन दुनिया भर में बीजिंग की विदेश नीति को आगे बढ़ाने के लिए चीन ने ट्वीटर का व्यापक इस्तेमाल भी करने की कोशिश की है, जिसमें झूठी और भ्रामक जानकारियां शामिल रही हैं, जिसे ट्वीटर ने ब्लॉक किया है। तो क्या आगे ऐसा हो पाएगा?

चीन या ट्वीटर... क्या करेंगे मस्क?
अब चीन के पास एक ऐसा निवेशक है, जो दुनिया का सबसे अमीर कारोबारी है और उस कार कंपनी का मालिक है, जिसका वैल्यू एक ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा है और जिसकी राजस्व में चीन 25 प्रतिशत का योगदान देता है, और वो निवेशक दुनिया के सबसे ज्यादा प्रभावशाली सोशल मीडिया नेटरवर्क को नियंत्रित करत है। मस्क ने सार्वजनिक रूप से अभी तक चीन के खिलाफ कुछ भी नहीं कहा है। उदाहरण के लिए, जब शंघाई में चीन के अधिकारियों ने नवीनतम COVID-19 प्रकोप को नियंत्रित करने के लिए अत्यंत सख्त लॉकडाउन लगाया और टेस्ला के संयंत्र को भी बंद कर दिया, तो एलन मस्क कुछ नहीं बोले। जबकि यही एलन मस्क ने अमेरिका में लगाए लॉकडाउन के लिए अमेरिकी सरकार की भारी आलोचना की थी और एक तरफ से उन्होंने कैलिफोर्निया के अधिकारियों को फटकार लगाई थी।

निवेश देखेंगे या फिर फ्री स्पीच?
इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए अलबामा विश्वविद्यालय में डिजिटल मीडिया टेक्नोलॉजी की असिस्टेंट प्रोफेसर जेसिका मैडॉक्स ने कहा कि, ‘ये एक चिंता की बात है, क्योंकि इन स्थितियों में हितों का टकराव हो सकता है और इसके बारे में सोचना चाहिए, कि चीन से अब प्रोपेगेंडा और भ्रामक खबरों का निकलना शुरू होगा, तो फिर एलन मस्क, जो अब इस कंपनी के मालिक हैं, वो इसे कैसे संभालेंगे? क्योंकि उनके ज्यादातर निवेश चीन में ही हैं'। जेफ बेजोस ने भी यही चिंता जताई है, जो एलन मस्क के बड़े व्यापारिक प्रतिद्वंदी हैं। उन्होंने ट्वीट में चिंता जताते हए कहा, कि ‘क्या चीन की सरकार को अब टाइन स्क्वायर पर थोड़ा सा लाभ मिलेगा?'

छोटी-छोटी बातों से परेशान होता है चीन
चीन के बारे में काफी पुरानी कहावत है, कि वो छोटी छोटी आलोचनाओं से घबरा जाता है और चीन की कम्युनिस्ट पार्टी अपने खिलाफ एक शब्द भी नहीं सुनना चाहती है। चीन में स्थिति ये है, कि दो लोगों को भी आपस में कम्युनिस्ट पार्टी की निंदा करने का अधिकार नहीं है और सरकार वैसे लोगों को रिवार्ड देती है, जो कम्युनिस्ट पार्टी की निंदा करने वालों की मुखबिरी करता है। जबकि, ट्वीटर पर ज्यादातर वक्त शिनजियांग में उइगर मुस्लिमों को लेकर चीन से सवाल पूछे जाते हैं, तो क्या अब चीन के प्रभाव में आकर एलन मस्क ऐसे खातों को डिलीट कर देंगे, जहां से चीन की आलोचना होगी या फिर शिनजियांग पर सवाल पूछे जाएंगे? इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, ना तो एलन मस्क ने और ना ही उनके प्रवक्ता ने मेल पर पूछे गये इन सवालों का कोई जवाब दिया। आपको बता दें कि, चीन ने काफी शुरूआत में ही ट्वीटर की क्षमता को पहचान लिया था और साल 2009 में चीन में ट्वीटर को पूर्ण रूप से बैन कर दिया गया था, जब चीन में एक जातीय दंगा भड़का था और काफी संख्या में मुसलमानों को मारा गया था।

चीन से पहले भी डरता रहा है ट्वीटर
ऐसा नहीं है कि, ट्वीटर पहले भी चीन से नहीं डरता था। साल 2019 में जब चीन की कम्युनिस्ट पार्टी ने हांगकांग की स्वतंत्रता को खत्म कर दिया और नेशनल सिक्योरिटी कानून को लागू किया, तो हांगकांग में काफी प्रदर्शन हुए, जिसकी तस्वीरें ट्वीटर पर लोग अपलोड करने लगे, जिसमें चीन की पुलिस की बर्बरता दुनिया के सामने आ रही थी। जिसके बाद कम्युनिस्ट पार्टी ने ट्वीटर की कान को मरोड़ा और देखते ही देखते वो तमाम अकाउंट्स डिलीट हो गये, जहां से वो तस्वीरें डाली जा रही थीं। सिर्फ ट्वीटर ही नहीं, बल्कि फेसबुक और यूट्यूब ने भी अपने प्लेटफॉर्म की कम्युनिस्ट पार्टी के गंगाजल से शुद्ध किया था, तो फिर अब एलन मस्क फ्री स्पीच को क्या आगे बढ़ा पाएंगे, इसपर सवाल उठाने की भी शायद जरूरत नहीं होगी।












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