Tesla की फैक्ट्री लगाने के लिए उतावले Elon Musk ने भारत दौरा क्यों टाला? मोदी सरकार से क्या-क्या ऑफर मिला था?
Elon Musk India Visit Explainer: माना जा रहा था, कि दुनिया के सबसे अमीर कारोबारियों में शामिल और इलेक्ट्रिक कार कंपनी टेस्ला (Tesla) के मालिक एलन मस्क (Elon Musk) इस हफ्ते के अंत में भारत के दौरे पर आने वाले थे और इस दौरान एलन मस्क करीब 2 से 3 अरब डॉलर के निवेश का ऐलान करने वाले थे, लेकिन अब एलन मस्क ने भारत का दौरा फिलहाल टाल दिया है।
लेकिन, सवाल ये है कि भारत में टेस्ला की फैक्ट्री लगाने के लिए उतावले दिखने वाले एलन मस्क ने भारत दौरा क्यों टाल दिया है? हालांकि, उन्होंने भारत का दौरा टालने की वजह का खुलासा नहीं किया है, लेकिन उन्होंने पुष्टि करते हुए कहा है, कि 'दुर्भाग्यवश उन्हें भारत का यात्रा करने में देरी हो रही है और वो बाद में इस साल भारत आएंगे।'

जबकि, DogeDesigner ने कहा है, कि एलन मस्क 21 और 22 अप्रैल को भारत दौरे पर आने वाले थे, लेकिन 23 अप्रैल को उन्हें टेस्ला का अर्निंग कॉल एटेंड करना है और भारत का दौरा टालने के पीछे ये वजह हो सकती है। हालांकि, अर्निंग कॉल की वजह से भारत का दौरा टालना, जहां उनकी मुलाकात प्रधानमंत्री मोदी से होने वाली थी, ये समझ से परे है।
लेकिन एलन मस्क का दिल्ली दौरा, भारत और टेस्ला दोनों के लिए फायदे का सौदा साबित होने वाला था।
टेस्ला कंपनी को लेकर कहा जाता है, कि ये कंपनी अपने साथ एक कारोबारी माहौल लेकर चलती है, यानि इस कंपनी के साथ इसकी कई सहायक कंपनियां भी चलती हैं, यानि टेस्ला कंपनी के भारत में लगने का मतलब है, कि टेस्ला पूरे लाव लश्कर के साथ भारत आएगी, लिहाजा, ऐसी उम्मीद थी, 2 अरब डॉलर के तत्काल निवेश के साथ साथ एलन मस्क, भारत में दीर्घकालिक निवेश की भी घोषणा कर सकते थे।
इस दौरे के दौरान, भारत में इलेक्ट्रिक कार के निर्माण के साथ साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ होने वाली राउंड टेबल बैठक के दौरान एलन मस्क स्पेस सेक्टर में स्टार्टअप को लेकर भी बातचीत करने वाले थे। यानि, टेस्ला के साथ साथ स्पेस सेक्टर में भी स्पेस-एक्स के निवेश को लेकर बातचीत होने की उम्मीद थी। आपको बता दें, कि स्पेस-एक्स एलन मस्क की ही कंपनी है, जिसने अमेरिकन स्पेस सेक्टर में तहलका मचा रखा है।
एलन मस्क की भारत यात्रा उस वक्त हो रही थी, जब टेस्ला कई बड़ी कठिनाइयों से जूझ रही है और चीनी कंपनियों ने टेस्ला की हालत खराब कर दी है। जिससे, एलन मस्क की कंपनी की कारों की बिक्री बुरी तरह से प्रभावत हुई है, जिसका असर टेस्ला के शेयर पर पड़ा है।
एलन मस्क से भारत का वादा क्या था?
भारत में इलेक्ट्रिक यात्री कारों की बिक्री अब मजबूत होने लगी है, हालांकि, अभी इसका आधार छोटा है। जिसे बढ़ाने के लिए भारत सरकार ने टेस्ला के लिए, भारत में सालाना 8,000 इलेक्ट्रिक कारों को 15% कम शुल्क पर आयात करने के लिए एक नीति तैयार की है।
विश्लेषकों का अनुमान है, कि 2030 तक भारत के ऑटोमोबाइल सेक्टर में इलेक्ट्रिक कारों का योगदान 5 प्रतिशत होगा, जो मौजूदा समय 2 प्रतिशत से ज्यादा तो है, लेकिन भारत सरकार के 30 प्रतिशत के लक्ष्य से काफी कम है।
हालांकि, एलन मस्क का भारत दौरा टलना, टेस्ला के इंडिया प्लान को लेकर कनफ्यूजन पैदा कर रहा है, लेकिन अगर एलन मस्क ने जैसा कहा है, और उनके दौरा टलने के पीछे कोई खास वजह नहीं और टेस्ला का भारत में फैक्ट्री लगाने की योजना पहले की ही तरह है, तो फिर ये भारतीय ऑटो सेक्टर के लिए 'एप्पल मोमेंट' हो सकता है।
टेस्ला के लिए भारत सरकार ने एक बेहतरीन कारोबारी माहौला तैयार करने की कोशिश की है, और फैक्ट्री लगाने के लिए कई तरह के ऑफर दिए हैं। एप्पल फैक्ट्री के लिए भी मोदी सरकार ने एक बेहतरीन कारोबारी माहौल बनाया, जिसे एक मील का पत्थर माना जाता है। और इसी का नतीजा है, कि एप्पल भारत में हिट हो गया है। और इसकी कामयाबी ने दूसरी कंपनियों को प्रोत्साहित किया है।
टेस्ला के लिए मोदी सरकार ने टैरिफ नीति में बदलाव करने का मकसद प्रमुख ब्रांडे जरिए भारतीय बाजार को एक ब्रांड बनाना है, जैसे एप्पल का भारत आना, माइक्रोन कंपनी का भारत में सेमिकंडक्टर चिप बनाने के लिए फैक्ट्री की स्थापना करना और इलेक्ट्रिक कार बनाने के लिए टेस्ला का भारत में फैक्ट्री बनाना।

टेस्ला के लिए भारत सरकार की कोशिशें
पिछले महीने जारी सरकार की नई EV Policy को क्रियान्वित करने और दिशानिर्देश विकसित करने के लिए टेस्ला प्रतिनिधियों सहित ऑटोमोबाइल उद्योग के खिलाड़ियों के साथ इसी गुरुवार को पहली परामर्श बैठक आयोजित की गई थी।
इससे पहले 16 अप्रैल को वित्त मंत्रालय ने स्पेस सेक्टर में 100 प्रतिशत FDI लाने और उसे क्रियान्वित करने के लिए विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम के तहत संशोधित नियमों को अधिसूचित किया था। इस फैसले का मकसद एलन मस्क की ही अंतरिक्ष सेक्टर में काम करने वाली कंपनी, स्पेस एक्स के भारत में निवेश करने के लिए रास्ता तैयार करना था। ऐसा माना जा रहा था, कि स्पेस एक्स के प्रोजेक्ट स्टारलिंक को भारत में उतारने के लिए बातचीत हो सकती थी। आपको बता दें, कि स्टारलिंक के सैकड़ों सैटेलाइट पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थापित हैं और एलन मस्क हाई स्पीड इंटरनेट की पेशकश करने वाले थे।
भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल सेक्टर की चुनौतियां
एलन मस्क की यात्रा का मुख्य मकसद टेस्ला फैक्ट्री की ही भारत में स्थापना करना था, और एलन मस्क ये देखने वाले थे, कि भारत में टेस्ला की फैक्ट्री की स्थापना के लिए पारिस्थितिकी तंत्र कैसा है और भविष्य में भारत को टेस्ला के संभावित निर्यात केन्द्र बनाने के लिए कितनी क्षमता है।
इसमें कोई शक नहीं है, कि चीनी इलेक्ट्रिक कार कंपनियों ने एलन मस्क की टेस्ला को दोराहे पर ला खड़ा किया है और एलन मस्क के लिए, भारत का अप्रयुक्त बाजार उतना ही महत्वपूर्ण हो सकता है, जितना कि भारत के लिए ईवी की कहानी है। चीन के स्थानीय खिलाड़ियों ने टेस्ला को बुरी तरह से मात देना शुरू कर दिया है और चीन की कार कंपनियों ने नई कारों के लिए जो टेक्नोलॉजी पेश की है, उसने टेस्ला के पैरों तले जमीन खिसका दी है।
लेकिन, इलेक्ट्रिक व्हीकल सेक्टर में भारत के सामने कई चुनौतियां हैं और इलेक्ट्रिक कार अभी भी भारतीय बाजार के लिए एक लग्जरी कार है। वहीं, अगर टेस्ला की फैक्ट्री इस साल भारत में लग भी जाती है, तो कारों के उत्पादन में अभी काफी वक्त लगेगा। खासकर, बड़े पैमाने पर उत्पादन में तो कई सालों का वक्त लग जाएगा। दूसरी तरफ, टाटा मोटर्स ने जो इलेक्टिक कार पेश की है, उसने सफलता का स्वाद तो चखा है, लेकिन इसके लिए उसने कम कीमत पर फोकस किया है। लेकिन, टेस्ला की सबसे कम कीमत वाली कार की कीमत ही करीब 33 से 35 लाख के बीच है, यानि भारत के मिडिल क्लास के खरीदने की क्षमता से काफी ज्यादा।
इसके अलावा, टेस्ला की सबसे कम कीमत वाली कार, मॉडल 3 को भारतीय परिस्थितियों में टेस्ट करने के लिए कई ग्राउंड क्लीयरेंस समस्याओं का सामना करना पड़ा है। इसके अवाला, टेस्ला कारों को भारत में रास्ते पर आने वाले एक के बाद एक स्पीड ब्रेकर, खराब सड़कों और चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर से भी निपटना है।

भारत की नई इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी क्या है?
मोदी सरकार ने इलेक्टिक गाड़ियों को बढ़ावा देने के लिए 35 हजार डॉलर से ज्यादा कीमत वाली कारों के लिए आयात शुल्क में 15 प्रतिशत की छूट दी है, लेकिन इसके लिए शर्त ये है, कि उस कार कंपनी को भारत में कम से कम 500 मिलियन डॉलर का निवेश करना होगा। आयात शुल्क में छूट देने का मकसद भारत में निर्माण को बढ़ावा देना है।
इसके अलावा, छूट विशेष रूप से उन इलेक्ट्रिक कारों के मॉडल के लिए है, जिनकी लागत में इंश्योरेंस, माल ढुलाई की कीमत शामिल है और जिनकी कीमत 35 लाख से ज्यादा है।
इसके अलावा, सरकार की एक और शर्त ये है, कि इन शर्तों के साथ एक साल में सिर्फ 8 हजार कारें ही बेची जा सकती हैं। टेस्ला के लिए खास तौर पर इस नीति को डिजाइन किया गया है, ताकि वो भारतीय बाजार में अपने भविष्य का टेस्ट कर सकें। जबकि, दो साल पहले भारत सरकार ने एलन मस्क की टैक्स में छूट देने की पेशकश ठुकरा दी थी, जब एलन मस्क ने टैक्स में छूट की मांग करते हुए चीन में बनाए गये कारों को भारतीय बाजार में बेचने की इजाजत मांगी थी।
वाणिज्य मंत्रालय का कहना है, कि नई नीति तैयार करने का मकसद ही भारत में इलेक्ट्रिक कारों की फैक्ट्रियों के निर्माण में बढ़ावा देना, ताकि मेक इन इंडिया का सपना पूरा हो सके और इलेक्टिक कार कंपनियों के बीच एक स्वस्थ प्रतिस्पर्धा शुरू हो सके। और भारतीय बाजार में इलेक्टिर गाड़ियों के लिए एक स्वस्थ ईवी पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण हो सके।
एलन मस्क भारत क्यों नहीं आ रहे हैं, इसका पता तो बाद में चलेगा, लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है, कि चीनी बाजार में 'बहिष्कार' का सामना करने वाले एलन मस्क के लिए अब भारतीय बाजार ही बचा है, जहां से वो टेस्ला की डूबती नैय्या को पार लगा सकते हैं, वहीं भारत के लिए भी ये बेहतरीन मौका होगा, क्योंकि टेस्ला के आने से ना सिर्फ ईवी पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि मोदी सरकार ये दिखा सकेगी, कि बड़ी कंपनियों का बाजार बनने के लिए अब भारत पूरी तरह से तैयार है।
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