पाकिस्तान में 8 साल के हिंदू बच्चे को दी जा सकती है फांसी की सजा! बचा पाएंगे इमरान खान ?
पाकिस्तानी अखबार के मुताबिक 8 साल का बच्चा एक मस्जिद में पानी पीने गये था और फिर उसके ऊपर ईशनिंदा का आरोप लगाकर उसके परिवार पर हमला कर दिया गया था
इस्लामाबाद, अगस्त 09: पाकिस्तान में 8 साल के एक हिंदू बच्चे को ईशनिंदा के आरोप में मौत की सजा का सामना करना पड़ रहा है। इसके साथ ही 8 साल का ये हिंदू बच्चा पाकिस्तान में रहने वाला सबसे कम उम्र का बच्चा बन गया है, जिसके ऊपर कोर्ट में मौत का मुकदमा चलेगा। 8 साल के हिंदू बच्चे के नाम का खुलासा नहीं हुआ है, लेकिन डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक बच्चो को पुलिस ने हिरासत में रखा हुआ है और अब कोर्ट में उसके ऊपर ईशनिंदा के आरोप में मुकदमा चलेगा, जिसमें पाकिस्तान में मौत की सजा का प्रावधान है।

ईशनिंदा का लगा आरोप
पाकिस्तानी अखबार के मुताबिक 8 साल का बच्चा एक मस्जिद में पानी पीने गये था और फिर उसके ऊपर ईशनिंदा का आरोप लगाकर उसके परिवार पर हमला कर दिया गया था। वहीं, मुस्लिम भीड़ ने एक मंदिर पर हमला कर दिया था और पूरे मंदिर में तोड़फोड़ की थी। वहीं, मंदिर के अंदर मुस्लिमों की भीड़ ने भगवान की मूर्तियों को भी तोड़ दिया था। रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने 8 साल के बच्चे के साथ ही उसके पूरे परिवार को हिरासत में रखा गया था। हालांकि, पुलिस ने अदालत में कहा कि हिरासत में रखने के पीछे की वजह भीड़ से बच्चे और उसके परिवार की जान बचाना है। वहीं, डेली टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, 8 साल के बच्चे को पाकिस्तान पुलिस ने अब गिरफ्तार कर लिया है और उसके ऊपर ईशनिंदा की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। पाकिस्तानी पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि बच्चे ने एक मदरसे के बाहर रखी कालीन पर पेशाब कर दिया था

मौत की सजा मिलेगी ?
पाकिस्तान में ईशनिंदा के मामले में मौत की सजा का प्रावधान है और 8 साल के हिंदू बच्चे के खिलाफ काफी सख्त धाराओं में मुकदमा दर्ज करते हुए गिरफ्तार किया या है। मुस्लिम भीड़ का आरोप है कि 8 साल के हिंदू बच्चे ने ईशनिंदा किया है। आपको बता दें कि पाकिस्तान में मुस्लिम भीड़ अकसर अल्पसंख्यकों के ऊपर ईशनिंदा का आरोप लगाकर हमले करते रहती है। मुस्लिमों की भीड़ कई हिंदू और ईशाइयों की हत्या भी कर चुकी है और पाकिस्तान में किसी अल्पसंख्यकर का जान लेना या मंदिरों पर हमला करना, मूर्तियों को तोड़ देना एक साधारण सी बात है और उसके लिए पाकिस्तान में कोई सजा नहीं है।

हिंदुओं में दहशत का माहौल
ब्रिटिश अखबार डेली मेल ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि मोंग इलाके में मुस्लिमों की भीड़ के डर से ज्यादातर हिंदू अपनी जान बचाने के लिए भाग गये हैं। वहीं, पाकिस्तान सरकार ने फसाद हो जाने के बाद इलाके में अर्द्धसैनिक बलों को तैनात किया है। ब्रिटिश अखबार द गार्जियन से बात करते हुए पीड़ित हिंदू लड़के के परिवार के एक सदस्य ने अज्ञात स्थान पर बताया कि ''8 साल का बच्चा ईशनिंदा करेगा, ऐसा ना उसकी समझ में होगा ना उसकी सोच में होगा, उसे झूठा फंसाया गया है''। लड़के के परिवार के सदस्य ने कहा कि ''बच्चे को अभी तक भी समझ नहीं आया है कि उससे क्या अपराध हुआ है, ईशनिंदा क्या है, उसे वो भी नहीं पता है, लेकिन 8 साल के बच्चे को पाकिस्तान पुलिस ने जेल में रखा है''। बच्चे के परिजन ने गार्जियन से कहा कि ''हमने अपनी दुकानें और अपना काम छोड़ दिया है, पूरा हिंदू समुदाय डरा हुआ है और हमें प्रतिक्रिया का डर है। हम इस क्षेत्र में वापस नहीं जाना चाहते हैं। हमें नहीं लगता कि दोषियों के खिलाफ या यहां रहने वाले अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए कोई ठोस और सार्थक कार्रवाई की जाएगी।''

धाराओं को देखकर वकील भी हैरान
8 साल के बच्चे पर पाकिस्तान की पुलिस ने जो धाराएं लगाई हैं, उसे देखकर पाकिस्तान के कई वकील भी हैरान हैं। गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक, एफआईआर रिपोर्ट ने वकीलों को भी झकझोर दिया है। वकीलों का कहना है कि ये हैरान करने वाला मामला है, क्योंकि इससे पहले किसी भी बच्चे पर ईशनिंदा का आरोप नहीं लगाया गया है। आपको बता दें कि पाकिस्तान के ईशनिंदा कानूनों की लंबे समय से भारी आलोचना की जाती है। यूरोपीयन यूनियन भी इस कानून की भारी आलोचना कर चुका है, लेकिन पाकिस्तान की कट्टरपंथी समाज की डर से पाकिस्तान की सांप्रदायिक सरकार इस कानून को अल्पसंख्यकों के खिलाफ तलवार की तरह इस्तेमाल करती है। वहीं, पाकिस्तान की अदालतो में ईशनिंदा के आरोप में फौरन मौत की सजा सुना दी जाती है। हालांकि, कई मामलों में ऊपरी अदालत आरोपियों को बरी कर देती है। वहीं, जेल में बंद 8 साल के इस बच्चे पर भी ईशनिंदा के आरोप में मुकदमा चलना है।

अल्पसंख्यकों को इंसाफ नहीं
पाकिस्तान हिंदू काउंसिल के प्रमुख और सांसद रमेश कुमार ने गार्जियन अखबार को बताया कि, 'मंदिर पर हमले और आठ साल के नाबालिग लड़के पर ईशनिंदा के आरोपों ने मुझे वाकई झकझोर दिया है। हमले के डर से हिंदू समुदाय के सौ से ज्यादा घर खाली कर दिए गए हैं।' इस बीच, मानवाधिकार कार्यकर्ता कपिल देव ने कहा कि, 'मैं मांग करता हूं कि लड़के के खिलाफ आरोप तुरंत हटाए जाएं और पीड़ित परिवार को फौरन पुलिस सुरक्षा दी जाए''। गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले कुछ वर्षों में पाकिस्तान में हिंदू मंदिरों पर हमले बढ़े हैं जो उग्रवाद और कट्टरता के बढ़ते स्तर को दर्शाता है। हाल के हमले हिंदुओं के उत्पीड़न की एक नई लहर प्रतीत होते हैं।'

मुस्लिमों की भीड़ ने तोड़ा मंदिर
वीडियो फुटेज से पता चला है कि मुस्लिमों की भीड़ ने बुधवार को भोंग में हिंदू मंदिर पर हमला किया था और मंदिर के मुख्य दरवाजे को जला दिया था। इसके साथ ही कट्टरुपंथी भीड़ ने भगवान की मूर्तियों को क्षतिग्रस्त कर दिया था। वहीं, हिंदुओं पर हमले और मंदिर में तोड़फोड़ के बाद नई दिल्ली में भारत के विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तानी राजनयिक को तलब किया था और मुख्य रूप से मुस्लिम पाकिस्तान में रहने वाले हिंदुओं के लिए सुरक्षा की मांग की थी। वहीं, प्रधानमंत्री इमरान खान ने ट्विटर पर हमले की निंदा करते हुए कहा कि उन्होंने पुलिस को फौरन कार्रवाई करने के लिए कहा है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि मंदिर की मरम्मत की जाएगी। वहीं पुलिस ने कहा कि मंदिर में तोड़फोड़ करने के संदेह में 50 लोगों को गिरफ्तार किया है और अन्य 100 संदिग्धों की तलाश कर रही है। लेकिन, सवाल ये उठ रहे हैं कि आखिर 8 साल के बच्चे के खिलाफ ईशनिंदा के आरोप में मुकदमा क्यों दर्ज किया गया है और क्या अब पाकिस्तान की अदालतों में नाबालिग बच्चों को भी फांसी की सजा सुनाई जाएगी?












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