Dying Star: तारे का मरते दम तक संघर्ष, ब्लैक होल से लिया 'पंगा'! जानिए फिर क्या हुआ अंजाम?
दुनियाभर के स्पेस साइंटिस्ट्स ने एक तारे के चमक यानी ऑप्टिकल फ्लेयर को लेकर अध्ययन किया है। ये अध्ययन भारतीय टेलीस्कोप ग्लोबल रिले ऑफ ऑब्जर्वेटरीज वाचिंग ट्रांजिएंट्स हैपन (GROWTH) की मदद से किया गया है।
Dying star comes close to a black hole: अंतिरक्ष की विचित्र घटनाएं अचंभित करती हैं। स्पेस में एक ऐसी ही घटना भारतीय टेलीस्कोप से आई तस्वीरों के विश्लेषण में सामने आई है। ये एक तारे की चमक को लेकर है, जिसे स्पेस में अहिंसा कहा जा रहा है। यह चमक एक मरते हुए तारे की ब्लैक होल के साथ हुई भिड़ंत का नतीजा थी। खास बात यह है कि इस स्टडी में भारत के पहले रोबोटिक ऑप्टिकल रिसर्च टेलीस्कोप की मदद ली गई। जिसका नाम 'ग्लोबल रिले ऑफ ऑब्जर्वेटरीज वाचिंग ट्रांजिएंट्स हैपन (GROWTH)' है। आइए जानते हैं कि तारे की इस चमक को लेकर साइंटिस्ट्स ने अपने विश्लेषण में क्या अहम बातें कहीं ?

स्पेस में ऑप्टिकल फ्लेयर की घटना
स्पेस में होने वाली घटनाएं पृथ्वी बिल्कुल अलग होती हैं। दुनियाभर के खगोलविद अंतिरक्ष का वर्षों से नजदीकी से अध्ययन करने के लिए वहां घटित होने वाली हर घटनाओं पर नजर रखते रहे हैं। हाल में एक नया शोध सामने आया है, जो तारों कि अचानक चमक बढ़ने और ब्लैक होल से जुड़ी है। तारे की अचानक चमक बढ़ने से जुड़ी घटना को ऑप्टिकल फ्लेयर कहा है।

GROWTH के जरिए अध्ययन
ऑप्टिकल फ्लेयर की घटना के अध्ययन में भारत के पहले रोबोटिक ऑप्टिकल रिसर्च टेलीस्कोप का प्रयोग किया गया। टेलीस्कोप का नाम ग्लोबल रिले ऑफ ऑब्जर्वेटरीज वाचिंग ट्रांजिएंट्स हैपन (GROWTH) है। जिसे भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान और आईआईटी बॉम्बे ने संयुक्त रूप से विकसित किया गया है। इस टेलीस्कोप का प्राइमरी रिसर्च फोकस टाइम-डोमेन एस्ट्रोनॉमी यानी यह ब्रह्मांड में होने वाले विस्फोटों और उनके स्रोत का अध्ययन करना है।

मरते हुए तारे की ब्लैक होल से भिड़ंत
साइंस जर्नल 'नेचर जर्नल' में स्टडी से जुड़े निष्कर्ष पर एक रिपोर्ट प्रकाशित की गई। जिसमें दावा किया गया कि साइंटिस्ट्स ने बताया कि ब्लैक होल ने मरते हुए तारे के मटीरियल को अपनी ओर खींचा और जेट की स्पीड से लॉन्च कर दिया। रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि ब्लैक होल के गुरुत्वाकर्षण ज्वारीय (tidal) फोर्स ने भी तारे को नुकसान पहुंचाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। जिसकी वजह से एक तारे का जीवन नष्ट हो गया। तारे के टुकड़े ब्लैक होल के चारों ओर एक डिस्क बनाते दिखे जो कि उसके चारों ओर घूम रहे थे। बाद में ब्लैकहोल ने इन्हें भी अपनी ओर खींच लिया।

10 महीने पुरानी तस्वीर का विश्लेषण
साइंटिस्ट्स ने जिस तस्वीर के विश्लेषण में ऑप्टिकल फ्लेयर का दावा किया है वो 11 फरवरी 2022 को ली गई थी। ये कैलिफोर्निया स्थित ज्विकी ट्रांसिएंट फैसिलिटी प्रोजेक्ट से मिली थी। तस्वीर में प्रकाश का एक नया स्रोत देखा गया। जिसमें साइंटिस्ट्स ने AT2022cmc नाम दिया। ये तेजी से चमक के बाद लुप्त हो रहा था। इसमें आईआईटी बॉम्बे के साइंटिस्ट्स इस तस्वीर का टेलीस्कोप GROWTH की मदद ली। स्पेस साइंटिस्ट्स की रिसर्च में जो डेटा सामने आया वो चौंकाने वाला था। साइंटिस्ट्स ने कहा कि तारे की ये चमक यानी फ्लेयर धरती से 8.5 अरब प्रकाश वर्ष दूर थी।

साइंटिस्ट्स ने किया ये दावा
दुनियाभर क खगोलविदों के साथ मिल कर भारत के स्पेस साइंटिस्ट्स ने ये अध्ययन किया। तस्वीर से जुड़ तथ्यों के अध्ययन के लिए रेडियो टेलीस्कोप, एक्स-रे टेलीस्कोप, बड़े ग्राउंड-आधारित ऑप्टिकल टेलीस्कोप और यहां तक कि हबल स्पेस टेलीस्कोप के डेटा का भी अध्ययन किया गया। तस्वीर पर कई वेधशालाओं में शोध किया गया। जिसके बाद साइंटिस्ट्स ने अपने निष्कर्ष में कहा कि AT2022cmc तेजी से लुप्त होने वाला तारा हो रहा था। साथ ही ये आशंका व्यक्त की गई कि AT2022cmc एक आकाशगंगा के केंद्र का तारा था।












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