...तो क्या रूस के अंदर से ही हुआ था राष्ट्रपति पुतिन पर हमला? ड्रोन एक्सपर्ट्स कर रहे बड़ी साजिश का इशारा
बुधवार को क्रेमलिन के ऊपर ड्रोन से हमला किया गया था और एक्सपर्ट्स का कहना है, कि ये हमला मॉस्को के भीतर से ही किए जाने की संभावना है।

Vladimir Putin News: पिछले हफ्ते रूस के राष्ट्रपति भवन क्रेमलिन पर ड्रोन हमला किया गया था और रूस ने दावा किया, कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को मारने की कोशिश की गई थी। रूस ने इस ड्रोन हमले के पीछे यूक्रेन को जिम्मेदार ठहराया है।
लेकिन, यूक्रेन ने रूसी राष्ट्रपति की हत्या की कोशिश के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। वहीं, कई एक्सपर्ट्स शक जता रहे हैं, कि क्रेमलिन, जो एयर डिफेंस सिस्टम की कई परतों से घिरा हुआ है, भला वहां तक ड्रोन कैसे पहुंच सकता है?
अब अमेरिका स्थित ड्रोन विशेषज्ञों ने कहा है, कि बुधवार को क्रेमलिन के ऊपर दुर्घटनाग्रस्त हुए ड्रोन ने मॉस्को की सुरक्षा में तैनात किए गये एयर डिफेंस सिस्टम को चकमा दिया है, लिहाजा हो सकता है, कि क्रेमलिन पर हमला मॉस्को के अंदर से ही किया गया हो।
क्रेमलिन पर हुआ था ड्रोन अटैक
रूस ने बुधवार को दावा किया था, कि यूक्रेन ने मास्को में क्रेमलिन पर राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की हत्या के लिए ड्रोन से हमला किया है। क्रेमलिन पर हमले में किसी भी भूमिका से इनकार करते हुए, यूक्रेनी राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की के प्रेस सचिव ने कहा, कि उन्हें "क्रेमलिन पर तथाकथित रात के हमलों" के बारे में कोई जानकारी नहीं है।
रूस की कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिंक के साथ एक टेलीग्राम चैनल, बाज़ा ने क्रेमलिन पर ड्रोन हमले का वीडियो जारी किया था, जिसमें देखा जा सकता है, कि क्रेमलिन के सीनेट भवन के गुंबद के पास विजय दिवस परेड की साइट रेड स्क्वायर की तरफ एक ड्रोन बढ़ रहा है और फिर उसमें धमाका होता है।
रूसी अधिकारियों ने कहा, कि क्रेमलिन से टकराने से पहले ही ड्रोन को मार गिराया गया। वीडियो में क्रेमलिन के ऊपर ड्रोन में विस्फोट होते हुए देखा जा सकता है। लिहाजा, अब अलग अलग सरकारें, जासूसी एजेंसियां और एक्सपर्ट्स पता लगाने में जुटे हैं, कि भला क्रेमलिन पर ड्रोन हमला कैसे हो सकता है?
गैर-लाभकारी रेजिलिएंट नेविगेशन एंड टाइमिंग फाउंडेशन के अध्यक्ष, जो कठिन और अनावश्यक जीपीएस की वकालत करते हैं, दाना गोवर्ड ने कहा है, कि मास्को कम से कम 2015 से क्रेमलिन को ड्रोन से बचाने के बारे में बहुत चिंतित है, जब उसने किसी भी ड्रोन हमले से बचने के लिए इलेक्ट्रनिक उपकरणों का इस्तेमाल शुरू कर दिया था, जिसमें जीपीएस को चकमा देने वाले उपकरण भी शामिल हैं।
समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने बताया कि "स्पूफिंग" तब होता है, जब ड्रोन या अन्य उपकरणों को नकली जीपीएस सिस्टम भेजा जाता है और उसके टारगेट को बदल दिया जाता है। इससे संभावित हमले को नाकाम कर दिया जाता है।
भारी सुरक्षा के बीच कैसे पहुंचा ड्रोन?
ड्रोन एक्सपर्ट गोवर्ड का मानना है, कि इस्तेमाल किए गए ड्रोन मध्य आकार के थे और "संभवतः जीपीएस का उपयोग नहीं कर रहे थे, लेकिन या तो वो मैन्युअल रूप से नियंत्रित थे, या उन्हें काफी पास से नियंत्रित किया जा रहा था, जो कामिकेज़ शैली है।" उन्होंने कहा, कि लंबी दूरी की उड़ान भरते समय ड्रोन को पहचान से बचना मुश्किल होता है।
एक अन्य ड्रोन विशेषज्ञ ब्लेक रेसनिक, जो ड्रोन निर्माता कंपनी BRINC के संस्थापक और सीईओ भी हैं, ने इसे आश्चर्यजनक बताया, कि ड्रोन बिना अपनी पहचान बताए मास्को के बीच से उड़ान भरने में कैसे सक्षम हुआ? रेसनिक ने कहा, कि "यह आश्चर्य की बात है, कि यह ड्रोन पूरे मास्को से क्रेमलिन तक उड़ने में सक्षम हो गया और मॉस्को ना ही इसका पता लगा पाया और ना ही इसे नष्ट कर पाया।"
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गोवर्ड ने कहा, कि क्रेमलिन के पास रडार और विज़ुअल ट्रैकिंग पर आधारित कई क्लोज-डिफेंस सिस्टम हैं जो इसे ड्रोन और यहां तक कि मिसाइलों से बचाने के लिए गोलियों और विस्फोटक प्रोजेक्टाइल का उपयोग कर सकते हैं। लिहाजा, ड्रोन एक्सपर्ट्स का कहना है, कि ये ड्रोन मॉस्को के अंदर से ही, क्रेमलिन के करीब से चलाया गया होगा और हो सकता है, कि पुतिन को मारने की साजिश, रूस के अंदर से रची गई हो।












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